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    लखनऊ एयरपोर्ट तस्करी का नया हॉटस्पॉट कैसे बना?:पढ़िए कैसे कैरियर लाते और खपाते हैं, 2 दिन में ₹4 करोड़ का गोल्ड-ड्रग्स जब्त

    6 hours ago

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    लखनऊ एयरपोर्ट पर बीते कुछ दिनों में हुई लगातार बड़ी बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ पांच दिन के भीतर करोड़ों रुपए का सोना और मादक पदार्थ पकड़ा गया। अब कई सवाल उठ रहे हैं- यह खेप आ कहां से रही है? इसे ला कौन रहा है? आखिर इसका अंतिम ठिकाना कहां था? दैनिक भास्कर ने पिछली ऐसी कुछ बरामदगी को नोटिस किया तो सामने आया कि लखनऊ एयरपोर्ट अब सिर्फ यात्रियों का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भी ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। इस रिपोर्ट में पढ़िए लखनऊ एयरपोर्ट कैसे ड्रग्स तस्करी का हॉटस्पॉट बन गया… 8 फरवरी : पकड़ा गया करीब 2 करोड़ का लावारिस सोना 8 फरवरी 2026 को जेद्दा से आई फ्लाइट SV-892 लखनऊ एयरपोर्ट पेस्ट मॉडल में सोना मिलने की सूचना मिली। 5 फरवरी को फ्लाइट की जांच के दौरान एयर इंडिया की सुरक्षा टीम को दो पैकेट और एक छोटी पॉलिथीन लावारिस हालत में मिली। जब इन्हें कस्टम्स को सौंपा गया तो अंदर से 1267.600 ग्राम सोना निकला, जिसकी कीमत करीब 1.95 करोड़ रुपए आंकी गई। हैरानी की बात यह रही कि सोने पर किसी भी यात्री ने दावा नहीं किया। यहीं से जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया क्या यह सोना किसी “कैरियर” के जरिए लाया गया था, जिसे आखिरी वक्त पर रिस्क ज्यादा लगने पर छोड़ दिया गया? सोना कहां खपाया जाना था? सूत्र बताते हैं कि लखनऊ सिर्फ एंट्री पॉइंट है। यहां से सोना दिल्ली, कानपुर, वाराणसी और पटना जैसे शहरों के सराफा बाजारों तक पहुंचाया जाता है। कई बार इसे छोटे-छोटे हिस्सों में पिघलाकर पहचान मिटा दी जाती है, ताकि तस्करी का सोना कानूनी सोने में बदल जाए। लखनऊ एयरपोर्ट पर बीते महीनों में गांजा, हेरोइन और अफीम की भी कई खेप पकड़ी जा चुकी हैं। ड्रग्स विभाग और एएनटीएफ की जांच में सामने आया है कि मादक पदार्थों को भी इसी नेटवर्क के जरिए खपाने की कोशिश होती है। गांजा अक्सर पूर्वोत्तर राज्यों या ओडिशा-छत्तीसगढ़ बेल्ट से लाया जाता है, जबकि हेरोइन की कड़ियां अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी पाई गई हैं। 9 फरवरी : ₹2.05 करोड़ का हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा एयरपोर्ट पर 9 फरवरी को एक यात्री के बैग से 2.05 करोड़ रुपए का हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा गया। वह यात्री बैंकॉक से आया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी यात्री के पास से गांजा/मारिजुआना के साथ पैकेजिंग सामग्री को जब्त कर लिया। यह तब था जब एक दिन पहले यानी 8 फरवरी को एयरपोर्ट पर 2 करोड़ रुपए का लावारिस सोना बरामद हुआ था। एयरपोर्ट के बाहर ड्रग्स रिसीवर तैयार रहते हैं एजेंसियों के अनुसार तस्करी की यह चेन कई स्तरों में बंटी होती है। सबसे ऊपर विदेश में बैठा हैंडलर होता है, जो सोने की व्यवस्था करता है। इसके बाद कैरियर चुने जाते हैं कभी मजबूरी में फंसे लोग, कभी लालच में आए यात्री। भारत पहुंचने के बाद एयरपोर्ट के बाहर “रिसीवर” तैयार रहते हैं, जो सोना लेकर उसे आगे बाजार में खपाते हैं। कुछ मामलों में कैरियर को अंतिम वक्त पर निर्देश मिलता है कि अगर खतरा लगे तो खेप छोड़ दी जाए, ताकि खुद बचा जा सके। तस्करी के लिए लखनऊ को सेफ रूट मान रहे इससे पहले 5 फरवरी को भी लखनऊ एयरपोर्ट पर करीब दो करोड़ रुपए मूल्य का सोना पकड़ा गया था। दोनों मामलों में समानता यह रही कि खेप खाड़ी देशों से आई और उसे बेहद शातिर तरीके से लाया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है, जो लखनऊ को “सेफ रूट” मानकर इस्तेमाल कर रहा है। जांच में सामने आया है कि ज्यादातर सोना सऊदी अरब, यूएई और खाड़ी देशों से आ रहा है। वहां सोने की कीमत भारत के मुकाबले कम होती है। तस्कर इसका फायदा उठाकर यात्रियों या कैरियर के जरिए सोना भारत भेजते हैं, ताकि भारी कस्टम ड्यूटी से बचा जा सके। अब तक क्या-क्या मिला है एजेंसियों को? ड्रग्स और कस्टम्स विभाग को जांच के दौरान फर्जी दस्तावेज, कई मोबाइल फोन, अंतरराष्ट्रीय कॉल डिटेल्स और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन के इनपुट मिले हैं। कुछ मामलों में विदेश से ऑपरेट हो रहे हैंडलरों की पहचान भी हुई है, जिन तक पहुंचने के लिए इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सख्ती बढ़ने के बाद तस्करों ने लखनऊ जैसे अंतरराष्ट्रीय लेकिन लेवल पर कम भीड़ वाले एयरपोर्ट को चुना। यहां यात्रियों की संख्या कम होने से कैरियर पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है यही तस्करों का दांव है।
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