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    लखनऊ-कानपुर की दूरी कितनी घटी, समय कितना बचा:एक्सप्रेस-वे का सफर 45 मिनट में, लेकिन लखनऊ से कानपुर पहुंचने में 1.48 घंटे लगे

    19 hours ago

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    क्या लखनऊ से कानपुर की दूरी अब 45 मिनट में तय होने लगी है? सरकार का दावा तो यही था कि एक्सप्रेस-वे बनने से समय बहुत बचेगा। मंगलवार को पब्लिक के लिए एक्सप्रेस-वे खुलने पर दैनिक भास्कर ने हकीकत जानी कि क्या वाकई 45 मिनट में लखनऊ से कानपुर पहुंचा जा सकता है। और अगर नहीं तो इसकी वजह क्या है? हमने सफर की शुरुआत सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से की। कार से हम निकले तो पहली रेड लाइट पर करीब 30 सेकेंड रुकना पड़ा। इसके बाद शहीद पथ की ओर बढ़े। शहर के इस हिस्से में एवरेज स्पीड करीब 50 किमी प्रति घंटा रही। रास्ते में 3 से 4 मिनट का ट्रैफिक भी मिला। यही वजह रही कि 10:46 बजे हम शहीद पथ पार कर पाए। यानी इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से यहां तक पहुंचने में 37 मिनट लगे। अमौसी एयरपोर्ट से हम लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की तरफ बढ़े। 11:03 बजे हम एक्सप्रेस-वे के एंट्री पॉइंट पर पहुंच गए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से एक्सप्रेस-वे पहुंचने में 44 मिनट लगे। यहीं से शुरू हुआ हमारी यात्रा का सबसे अहम हिस्सा। चलती गाड़ी से टोल कटा, AI कैमरों से निगरानी एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के बाद पहला टोल प्लाजा आया, लेकिन यहां न तो बैरियर था और न ही गाड़ी रोकनी पड़ी। टोल प्लाजा से करीब 500 मीटर पहले लगे कैमरे और फास्टैग रीडर ने चलती गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग पढ़कर टोल के पैसे काट लिए। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे देश का पहला बिना बैरियर वाला एक्सप्रेस-वे है। इस एक्सप्रेस-वे पर हमारी गाड़ी की औसत स्पीड करीब 100 किमी प्रति घंटा रही। सड़कें चौड़ी और ट्रैफिक न होने की वजह से गाड़ी आसानी से एक जैसी स्पीड में चल रही थी। एक्सप्रेस-वे पर इक्का-दुक्का गाड़ियां ही नजर आईं। पूरे एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह इमरजेंसी कॉलिंग बूथ बनाए गए हैं, जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हैं। किसी भी घटना या आपात स्थिति में यहां से तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी। सड़क पर हर कुछ दूरी पर CCTV कैमरे, साइन बोर्ड और दोनों तरफ मजबूत फेंसिंग भी दिखाई दी। सफर के दौरान इस एक्सप्रेस-वे पर कई बाइक भी दिखीं। जबकि इस एक्सप्रेस-वे पर बाइक की अनुमति नहीं है। प्रवेश-बाहर जाने के लिए 6 इंटरचेंज एक्सप्रेस-वे पर कुल 6 इंटरचेंज बनाए गए हैं। लखनऊ की ओर शहीद पथ, मेन टोल, बनी और हरौनी, उन्नाव में अजगैन और अमरसास, जबकि कानपुर की ओर आजाद चौक के पास इंटरचेंज बनाए गए हैं। इन जगहों से आप एक्सप्रेस-वे पर आसानी से एंट्री और एग्जिट कर सकते हैं। करीब 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का सफर पूरा कर 11:48 बजे हम एक्सप्रेस-वे के एडिंग पॉइंट आजाद चौक पर पहुंच गए। एक्सप्रेस-वे के एंट्री पॉइंट से यहां तक आने में हमें ठीक 45 मिनट लगे। लेकिन यह सफर यहीं खत्म नहीं हुआ। कानपुर शहर का एंट्री पॉइंट रामा देवी चौराहा है। जो लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे से करीब 7 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने में हमें लगभग 19 मिनट लगे। इस समय तक हमारी गाड़ी करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी थी। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से रामा देवी चौराहे तक का पूरा सफर हमने 1 घंटा 48 मिनट में पूरा किया। इस तरह हमारे रियलिटी चेक में निकलकर आया कि 63 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे की यात्रा 45 मिनट में तय हो रही है। लेकिन दोनों शहरों के शुरुआती पॉइंट पर पहुंचने में करीब पौने दो घंटे लग रहे हैं। कानपुर से लौटते समय टोल पर मिला बैरियर कुछ देर कानपुर में रुकने के बाद हमने वापसी का सफर शुरू किया। दोपहर 2:15 बजे हम रामा देवी चौराहे से लखनऊ की ओर बढ़े। एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के कुछ ही दूर बाद पहला कंट्रोल रूम दिखाई दिया। इसी के पास मुख्य टोल प्लाजा है। यहां हमें टोल पर बैरियर दिखा। कुछ दूरी पर दूसरा कंट्रोल सेंटर है, जहां से पूरे एक्सप्रेस-वे की निगरानी की जाती है। यहां AI से लैस एडवांस कैमरे लगाए गए हैं, जो सड़क पर होने वाली किसी भी दुर्घटना, वाहन के रुकने, गलत दिशा में चलने या अन्य असामान्य गतिविधियों का तुरंत पता लगाकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजते हैं। अभी फूड प्लाजा और पेट्रोल पंप नहीं बने एक्सप्रेस-वे पर फिलहाल फूड प्लाजा और पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इनके लिए जमीन ली जा चुकी है और साइनबोर्ड भी लगाए गए हैं। हालांकि ये सुविधाएं कब तक मिलने लगेंगी इसे लेकर अभी समय सीमा तय नहीं है। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- चढ़ावा चोरी के आरोपी के खाते में मिले ₹7.32 लाख:रमाशंकर का परिवार बोला- सैलरी बचाई थी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों में रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी शामिल हैं। दैनिक भास्कर की टीम दोनों के घर पहुंची, उनके परिवार और पड़ोसियों से बात की। रमाशंकर का परिवार अयोध्या में राम सखा बगिया मंदिर के 2 कमरों में रहता है। पुलिस को उसके बैंक खाते में 7.32 लाख रुपए मिले हैं। परिवार का दावा है कि यह रकम उसकी कई साल की बचाई हुई सैलरी है। पढ़ें पूरी खबर
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