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    लखनऊ में 3 लोगों से 93.50 लाख की ठगी:निवेश के नाम पर दंपती से ऐंठी रकम, फेसबुक से दोस्ती कर कारोबारी को ठगा

    14 hours ago

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    लखनऊ के अर्जुनगंज निवासी एक दंपती से ऑनलाइन निवेश के नाम पर 75.84 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जानकीपुरम निवासी 54 साल के व्यक्ति से फेसबुक पर दोस्ती कर 11.60 लाख की ठगी कर ली। वहीं विकास नगर निवासी बिल्डर से सीमेंट के आर्डर के नाम पर 6.16 लाख की ठगे। पुलिस मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच कर रही है। अर्जुनगंज स्थित ओमैक्स रेजिडेंसी-1 के सनशाइन सी-विंग निवासी अभय मिश्रा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनसे व्हाट्सएप और मैसेंजर के जरिए संपर्क किया गया। आरोपियों ने खुद को Amansa Investment Limited से जुड़ा बताते हुए निवेश कराने का भरोसा दिलाया। संपर्क करने वालों में ऐश्वर्या पटेल, नेहा देसाई और रोहित शर्मा नाम के लोगों का जिक्र किया गया है, जिन्होंने स्वयं को कंपनी का वित्त एवं खाता प्रबंधक तथा तकनीकी विश्लेषक टीम प्रमुख बताया। शुरुआत में अच्छा लाभ दिखा पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने शुरुआती दौर में निवेश पर अच्छा लाभ दिखाया। इसके बाद उन्हें स्ट्रेटेजिक पार्टनर, रैपिड प्रॉफिट प्लान और एफआईआई दर्जा दिलाने का लालच दिया गया। साथ ही आरटीए (रजिस्ट्रार ट्रांसफर एजेंट) खाता खोलने के लिए प्रेरित किया गया। आरोपियों के कहने पर उन्होंने कंपनी की वेबसाइट और एक अन्य ऑनलाइन पोर्टल पर अकाउंट भी बनाया। 6 मई से 21 मई के बीच आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर करवाई। आरोपियों ने दावा किया था कि निवेश फंडिंग पार्टनर्स और संस्थागत निवेशकों के खातों के जरिए कराया जाता है, इसलिए धनराशि सीधे कंपनी खाते में नहीं भेजी जा रही है। पीड़ित ने बताया कि कई किश्तों में कुल 75.84 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। बाद में जब रकम निकालने का प्रयास किया गया तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। फेसबुक फ्रेंड बनी साइबर ठग जानकीपुरम निवासी समीर कपूर के मुताबिक, मार्च 2026 में फेसबुक पर रितिका शर्मा नाम की महिला ने उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। दोस्ती होने के बाद महिला ने मलेशिया का मोबाइल नंबर साझा कर व्हाट्सएप पर बातचीत शुरू की। उसने खुद को कुआलालंपुर में फैशन इंडस्ट्री में कार्यरत बताया। नून ऐप पर मार्केटिंग सर्वे का पार्ट टाइम काम करने की बात कही। आरोप है कि रितिका ने नून ऐप पर काम करके होने वाले मुनाफे के स्क्रीनशॉट भेजकर समीर का भरोसा जीता। शुरुआत में महिला की आईडी पर डेमो कार्य कराया गया। इसके बाद समीर ने अपनी आईडी बनाकर निवेश शुरू किया। शुरुआती दिनों में अच्छा रिटर्न मिलने से उनका विश्वास बढ़ गया और उन्होंने लगातार रकम लगानी शुरू कर दी। बार-बार पैसे जमा करने को कहा पीड़ित के अनुसार ऐप पर असाइनमेंट पूरा करने के लिए बार-बार पैसे जमा करने को कहा जाता था। रकम बढ़ने के साथ उन्होंने विभिन्न यूपीआई आईडी और बैंक खातों में भुगतान किया। 26 मार्च से 5 मई के बीच उन्होंने अलग-अलग खातों में कुल 11 लाख 60 हजार रुपए ट्रांसफर किए। जब निवेश की गई रकम वापस निकालने की कोशिश की गई तो नून ऐप के कस्टमर केयर ने जवाब देना बंद कर दिया। वहीं रितिका शर्मा ने भी व्हाट्सएप मैसेज और कॉल का जवाब देना बंद कर दिया। तब उन्हें अपने साथ साइबर ठगी होने का एहसास हुआ। गूगल पर सीमेंट डीलर का नंबर सर्च करने के बाद ठगी विकास नगर निवासी अनिल कुमार गुप्ता (54) ने बताया कि वह निर्माण कार्य से जुड़े होने के कारण सीमेंट की खरीद-फरोख्त करते हैं। अप्रैल 2026 में एसीसी सीमेंट खरीदने के लिए उन्होंने गूगल पर सीमेंट डीलर का नंबर खोजा। सर्च के दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिस पर संपर्क करने पर खुद को एसीसी कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने ऑर्डर बुक करने के लिए बैंक खातों की जानकारी दी। पांच बार में अलग-अलग खाते में 6.16 लाख जमा करवा लिए। पीड़ित के अनुसार भुगतान के बाद कई दिनों तक सीमेंट की सप्लाई नहीं हुई। पूछताछ करने पर आरोपी ने एक कथित परचेज ऑर्डर की पीडीएफ भेजी और कहा कि न्यूनतम दो हजार बैग का ऑर्डर होना चाहिए इसलिए और रकम जमा करनी पड़ेगी। इस पर उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने गोमतीनगर स्थित एसीसी कंपनी के कार्यालय में संपर्क किया। जांच में पता चला कि जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई थी, उनका कंपनी से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद अनिल कुमार गुप्ता को ठगी का एहसास हुआ। मामले में इंस्पेक्टर साइबर थाना बृजेश यादव का कहना है मुकदमें दर्ज करके ट्रांजैक्शन चेंज चेक की जा रही है। तीनों मामलों में करीब 25 लाख रुपए होल्ड किया गया है।
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