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    लखनऊ में डबल डेकर बस की खिड़की से गिरीं लाशें:पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पलटी; 5 की मौत और 45 घायल

    5 hours ago

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    लखनऊ में सोमवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर डबल डेकर बस पलट गई। इस हादसे में 5 की मौत हो गई, जबकि 45 लोग घायल हो गए। 28 घायलों को SGPGI के अपेक्स ट्रामा सेंटर भेजा गया। इनमें 7 बच्चे, 12 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। हादसे के बाद ड्राइवर और क्लीनर बस छोड़कर भाग गए। मरने वालों में बीरेंद्र (30), अंजली (8), प्रियांशु (15) के अलावा एक 6 साल का बच्चा और 30 साल का युवक शामिल है। घटना के तुरंत बाद का एक वीडियो भी सामने आया है। यह क्रेन से बस को सीधा करने के समय का है। बस को सीधा करते ही उसकी खिड़कियों से लाशें धड़ाम से सड़क पर गिर गईं। फिर सड़क पर चारों तरफ खून ही खून फैल गया। बस सीधी होने के बाद भी कुछ घायल और मृत यात्री खिड़कियों से लटकते रहे। इस दौरान कोई रो रहा था, तो कोई चीख-चिल्ला रहा था। कई यात्रियों का कहना है कि ड्राइवर ने हादसे के आधे घंटे पहले ढाबे पर शराब पी थी। वहीं, कुछ यात्रियों का कहना है कि ड्राइवर को झपकी आने से हादसा हुआ। बस लुधियाना (पंजाब) से मोतिहारी (बिहार) जा रही थी। बस की स्पीड 80 किलोमीटर से ज्यादा थी। बस पलटने के बाद इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बचाव कार्य शुरू किया। क्रेन की मदद से बस को सीधी कर टोल प्लाजा ले जाया गया। वहीं, लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल के सभी डॉक्टरों को बुला लिया गया। बस नंबर और ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। ड्राइवर सोमपाल हरियाणा में पानीपत के नौल्था का रहने वाला है। बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। हादसे के बाद जो तस्वीरें आईं, उनमें कई यात्रियों के हाथ-पैर शरीर से अलग दिख रहे। दुर्घटना की जगह पर चारों ओर खून ही खून फैल गया। जिसे सफाईकर्मियों से साफ कराया गया। ड्राइवर बोला- एक्सप्रेसवे पर अचानक ब्रेकर आया बस ड्राइवर ने पुलिस पूछताछ में बताया- ढाबे पर खाने के दौरान मैंने हल्की ड्रिंक (शराब पी) की थी। एक्सप्रेस-वे पर अचानक ब्रेकर आ गया। इस वजह से ब्रेक मारा। सवारी अधिक होने के कारण बस बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई। हालांकि, ड्राइवर ने सही बयान नहीं दिया है, क्योंकि जिस स्थान पर हादसा हुआ है, वहां कोई ब्रेकर है ही नहीं। वहीं, एक प्रत्यक्षदर्शी अंश पटेल के अनुसार- बस सांप की तरह लहरा रही थी। फिर अचानक पलट गई। हादसा होते ही चीख-पुकार मच गई। हम लोग भागकर मौके पर पहुंचे। खून से सने बच्चों के जूते मिले घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में एक छोटा-सा जूता खून से सना पड़ा मिला। वह जूता अब पूरे हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर बन गया है। शायद किसी मासूम ने जिद कर के ये नए जूते खरीदे होंगे। सफर पर निकलने से पहले आईने में खुद को देखा होगा, लेकिन उसे क्या पता था कि यह सफर आखिरी साबित होगा। सड़क से मलबा हटा दिया गया है। खून के धब्बे भी धो दिए गए हैं, लेकिन उन जूतों की खामोशी और सूनी हो चुकी मां की गोद को कौन भर पाएगा? अब जानिए प्रारंभिक जांच में जो कमियां मिली हैं… इमरजेंसी गेट पर बना दी थी सीट, फंसे यात्री आरटीओ टीम बस का निरीक्षण किया। टीम में शामिल एआरटीओ प्रशासन प्रभात पांडेय ने बताया- बस की इंटरनल जांच जा रही है। देखा जा रहा है कि बस की इंटरनल बॉडी की डिजाइन में कोई बदलाव किया गया था या नहीं। मानक है कि सीटों के बीच का स्थान खाली होना चाहिए। पीछे इमरजेंसी गेट होना चाहिए। यदि बस पलट जाए तो लोग उससे निकल सकें। जांच में आया है कि इमरजेंसी गेट को कवर करके वहां और सीटें लगा दी गई हैं। 16 स्लीपर की अनुमति, बना दी गईं 43 एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव के अनुसार, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार हुई डबल डेकर बस कागजों में पूरी तरह फिट पाई गई, लेकिन मौके पर हुई जांच में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी सामने आई। बस में मूल रूप से 16 स्लीपर और 32 सिटिंग सीटों की अनुमति थी, लेकिन अंदरूनी ढांचे में छेड़छाड़ कर 43 स्लीपर सीटें बना दी गई थीं। सिटिंग सीटें घटाकर सिर्फ 9 कर दी गईं। इतना ही नहीं, बस में क्षमता से अधिक 90 यात्रियों को बैठाया गया था, जो साफ तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। इमरजेंसी गेट तक बंद, छत पर अवैध स्ट्रक्चर जांच में यह भी सामने आया कि बस के इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी, जिससे आपातकालीन निकास पूरी तरह बंद हो गया था। हादसे की स्थिति में यात्रियों के बाहर निकलने का रास्ता ही अवरुद्ध था। बस की छत पर अतिरिक्त लोहे के स्ट्रक्चर लगाए गए थे और लंबाई-चौड़ाई में भी बदलाव किया गया था। यह सभी तथ्य मौके पर पहुंचे उप परिवहन आयुक्त राधेश्याम, आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय और एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव की जांच में सामने आए। 1360 किमी सफर के लिए सिर्फ एक ड्राइवर नियमों के मुताबिक लंबी दूरी की बसों में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है। लेकिन यह बस पंजाब से बिहार तक करीब 1360 किलोमीटर की दूरी सिर्फ एक ड्राइवर के भरोसे तय कर रही थी। मानक कहते हैं कि हर 4.5 घंटे की ड्राइविंग के बाद कम से कम 45 मिनट का ब्रेक जरूरी है और 14 घंटे की ड्यूटी में तीन घंटे का आराम अनिवार्य है। प्राथमिक जांच में इन नियमों का पालन नहीं पाया गया। 67 चालान के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस डबल डेकर बस पर अब तक 67 चालान दर्ज हैं, जिनका भुगतान नहीं किया गया था। इसके बावजूद बस लगातार सड़क पर चलती रही। यह बस 50 से अधिक आरटीओ और एआरटीओ क्षेत्रों से होकर गुजरी, लेकिन न पुलिस ने रोका, न ट्रैफिक विभाग ने और न ही परिवहन विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई की। यह लापरवाही सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करती है। आज होगी तकनीकी जांच बस की विस्तृत तकनीकी जांच मंगलवार को कराई जाएगी। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय के मुताबिक ब्रेक, पहियों, टायर, वायरिंग समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच आरआई टेक्निकल टीम द्वारा की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही बस की वास्तविक तकनीकी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। -------------------------------- संबंधित खबर भी पढ़िए… लखनऊ में डबल डेकर बस की खिड़की से गिरीं लाशें लखनऊ में सोमवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर डबल डेकर बस पलट गई। इस हादसे में 5 की मौत हो गई, जबकि 45 लोग घायल हो गए। (पूरी खबर पढ़िए)
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