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    लखनऊ में इंटरनेशनल साइबर कॉल सेंटर पकड़ा:4 मास्टरमाइंड गिरफ्तार, अमेरिका के नागरिकों को बना रहे थे निशाना

    1 day ago

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    लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया। अमेरिका के नागरिकों को फर्जी Apple Customer Support बनकर ठगा जा रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर के चार संचालकों को गिरफ्तार किया है, जबकि मौके पर 35 कॉलिंग एजेंट काम करते मिले। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। डीसीपी पूर्वी डॉक्टर दीक्षा शर्मा ने गुरुवार दोपहर 2:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया 22 जुलाई की रात विभूतिखंड थाना प्रभारी उपेंद्र सिंह जलवा बार के सामने वाहन चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान मुखबिर से साइबर हाइट बिल्डिंग की चौथी मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 420A में फर्जी कॉल सेंटर चलने की सूचना मिली। इसके बाद क्राइम टीम के साथ रात करीब 2:55 बजे छापा मारकर कॉल सेंटर पकड़ा। चार संचालक गिरफ्तार पुलिस ने मौके से प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी, उसके रिश्तेदार विवेक पांडेय और राहुल त्रिपाठी तथा मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि सूरज पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है, जबकि आकाश फर्जी वेबसाइट और VOIP सिस्टम संचालित करता था। ऐसे करते थे अमेरिका के लोगों से ठगी जांच में पता चला कि गिरोह गूगल पर विज्ञापन के जरिए फर्जी Apple Customer Support वेबसाइट को प्रमोट करता था। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर अमेरिका से कॉल आने पर VOIP के जरिए कॉल लखनऊ स्थित कॉल सेंटर पहुंचती थी। यहां एजेंट खुद को कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताते थे। इसके बाद कॉल क्लोजर खुद को FTC या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जैसे सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते या लालच देकर गिफ्ट कार्ड, सोना या नकदी के रूप में रकम ऐंठ लेते थे। हवाला से पहुंचता था पैसा पुलिस के अनुसार अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य ठगी की रकम इकट्ठा करते थे। इसके बाद हवाला के जरिए पैसा लखनऊ भेजा जाता था। कर्मचारियों को भी नकद भुगतान किया जाता था, ताकि लेन-देन का कोई डिजिटल रिकॉर्ड न रहे। देशभर और नेपाल से भर्ती किए गए थे एजेंट छापे के दौरान कॉल सेंटर में 35 वर्क स्टेशन चलते मिले। यहां 35 कॉलिंग एजेंट काम कर रहे थे। इनमें सबसे ज्यादा 10 एजेंट उत्तराखंड, 9 महाराष्ट्र, 3-3 गुजरात और नागालैंड, 2-2 असम और मणिपुर के थे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल के भी एजेंट काम कर रहे थे। पुलिस सभी से पूछताछ कर उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
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