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    लखनऊ में करोड़ों की जमीन पर फर्जीवाड़ा:6 बैंकों से लोन लेकर बना घर; अब ध्वस्तीकरण का आदेश, जनता अदालत पहुंचा पीड़ित

    8 hours ago

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    लखनऊ की कानपुर रोड योजना कॉलोनी में एक प्लॉट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सात बार खरीद-फरोख्त के बाद 13 साल में यह खुलासा हुआ कि प्लॉट की पहली रजिस्ट्री ही फर्जी थी। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने मौजूदा मालिक की रजिस्ट्री निरस्त कर घर तोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। मामला गुरुवार को एलडीए में आयोजित जनता अदालत में उठा, जहां पीड़ित विवेक वर्मा अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने पूरी आपबीती रखी। 1 करोड़ का लोन लेकर खरीदा था प्लॉट पीड़ित विवेक वर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में एलडीए की निवासी अमरजीत कौर से यह प्लॉट 1.13 करोड़ रुपए में खरीदा था। इसके लिए उन्होंने करीब 1 करोड़ रुपए का बैंक लोन भी लिया। खरीद के बाद जब उन्होंने निर्माण शुरू किया तो एलडीए की ओर से नो टिस मिला। नोटिस के बाद हुई जांच में सामने आया कि जिस प्लॉट की उन्होंने रजिस्ट्री कराई थी, उसकी मूल यानी पहली रजिस्ट्री ही फर्जी निकली। 46 साल से एलडीए के चक्कर काट रहे रिटायर्ड कर्मी कृष्णा नगर के मंगला प्रसाद अवस्थी BSNL से नौकरी कर रिटायर्ड हुए हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की स्थापना के समय 1979 में उन्होंने अपने पिता महेश कुमार अवस्थी व पत्नी इंदिरा अवस्थी के नाम से अलीगंज ईडब्ल्यूएस आवासीय योजना में मकान पाने के लिए आवेदन किया था। दोनों का आवेदन शुल्क 300-300 रुपये जमा किया था। उन्होंने बताया कि इस बार अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि मकान नहीं, बल्कि जमा धनराशि वापस कर दी जाएगी। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि 600 रुपए ब्याज सहित लेकर क्या करेंगे, हमें तो भूखंड ही दे दिया जाए। इस बार भी पता नहीं मिलेगा या नहीं ? बेसिक सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं ऐसे ही गोमती नगर विस्तार के गंगा अपार्टमेंट की आधा दर्जन से अधिक महिलाओं ने बताया, उनके यहां 306 फ्लैटों में से 270 में लोग रह रहे हैं इसके बाद भी अक्सर लिफ्ट बंद रहती है, बिजली गुल हो जाती है, क्योंकि आरडब्ल्यूए का चुनाव नहीं हो रहा है और लोग मनमानी कर रहे हैं। घर में बच्चों को छोड़कर एलडीए से शिकायत करने आए हैं कि बिना बेसिक सुविधाओं के कैसे रहें। 7 बार हो चुकी थी खरीद-फरोख्त पीड़ित के अनुसार, इस प्लॉट की पहली रजिस्ट्री वर्ष 2011 में हुई थी, जबकि मूल अलॉटमेंट 1987 का है। इसके बाद यह प्लॉट लगातार हाथ बदलता रहा और कुल सात बार इसकी रजिस्ट्री हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों तक किसी स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं हुआ। अब रजिस्ट्री कैंसिल, तोड़ने का आदेश विवेक का आरोप है कि एलडीए ने उनकी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया है और मकान तोड़ने का आदेश भी जारी कर दिया है। इतना ही नहीं, प्राधिकरण अब उसी प्लॉट की दोबारा रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रहा है। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर वह हाईकोर्ट तक जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद एलडीए सिविल कोर्ट में पैरवी कर रहा है। ढाई साल से भटक रहे, गवाह भी मुकरे पीड़ित ने बताया कि वह पिछले ढाई साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इस मामले में पहले की रजिस्ट्रियों में शामिल गवाह भी अब अपने बयान से मुकर गए हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। जनता अदालत में उठी शिकायत जनता की समस्याएं सुनने के लिए आयोजित इस अदालत में अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा, संयुक्त सचिव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मामले को देखने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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