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    लखनऊ में दो दिवसीय लोकोत्सव का शुभारंभ:लोकगीतों और आल्हा गायन से सराबोर रही पहली संध्या

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से लखनऊ लोक पर्व और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दो दिवसीय लोकोत्सव का आयोजन किया गया। गोमती नगर स्थित अकादमी परिसर के मुक्ताकाशीय मंच पर आयोजित इस उत्सव की पहली संध्या लोकगीतों और वीर रस के आल्हा गायन से सराबोर रही। शनिवार को हुई प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर शाम तक मंत्रमुग्ध किए रखा। कार्यक्रम का उद्घाटन अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक शोभित कुमार नाहर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर बिरजू महाराज कथक संस्थान की उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन राजेन्द्र विश्वकर्मा ने किया। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता का प्रतीक उद्घाटन सत्र में अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं आज संगीत ही नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने नारी सम्मान का संदेश देते हुए संस्कृत के प्रसिद्ध वाक्य 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:' का भी उल्लेख किया। इसके बाद वाराणसी की लोक गायिका डॉ. सुचरिता गुप्ता ने अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने मिश्र काफी में ठुमरी “री मैं कैसे केसर रंग घोरू” से शुरुआत की और फिर राग सहना में होरी “होरी मैं खेलूंगी श्याम से डट के” सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। डॉ. गुप्ता ने बारामासा, दादरा और चैती जैसे लोकगीतों की सुरीली छटा बिखेरी, जिनमें “दुपहरिया बितायला हो नई झुलनी के छहिया बलम”, “रूठ गए सइयां हमार” और “सुतल सइया के जगावे” व “बैरन रे कोयलिया तोरी बोली ना सुहाय” शामिल थे। महोबा की लड़ाइयों पर आधारित आल्हा सुनाया कार्यक्रम में बुंदेलखंड लोक कला समिति महोबा के आल्हा गायक जितेन्द्र चौरसिया ने वीर रस से भरपूर आल्हा गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने महोबा और मांडवगढ़ की लड़ाइयों पर आधारित आल्हा सुनाया, जिसके बोल “खट-खट तेगा बोले, खट-खट बोल रही तलवार” ने श्रोताओं में जोश भर दिया। उनकी टीम में शरद अनुरागी, राहुल अनुरागी और दुष्यंत बुन्देला ने भी संगत की।
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