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    लखनऊ में वीरांगना वाहिनी का दूसरा सम्मेलन:महिला सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास पर हुआ विचार-विमर्श

    5 hours ago

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    लखनऊ के कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में उत्तर प्रदेश वीरांगना वाहिनी का दूसरा सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने भाग लिया, जहां 'जय वीरांगना, जय वीरांगना' और 'लो भारत अपने हाथों में, निकलो बंद मकानों से' जैसे नारे गूंज उठे। कार्यक्रम की आयोजक ऊषा विश्वकर्मा ने बताया कि यह संगठन का दूसरा सम्मेलन है, जिसमें उत्तर प्रदेश से लगभग 5,000 लड़कियां शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य देश की बेटियों को नेतृत्व के लिए तैयार करना और उन्हें जिम्मेदारियां संभालने में सक्षम बनाना है। विश्वकर्मा ने जोर दिया कि यदि महिलाएं घर का प्रबंधन कुशलता से कर सकती हैं, तो वे देश का भी बेहतर संचालन कर सकती हैं। बेटियों के योगदान के बारे में बताया ऊषा विश्वकर्मा ने यह भी बताया कि आज का दिन 'राष्ट्रीय महिला दिवस' के रूप में विशेष महत्व रखता है, जो सरोजिनी नायडू की जयंती पर मनाया जाता है। उन्होंने सरोजिनी नायडू के देश, समाज और बेटियों के योगदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ यात्राएं भी करनी चाहिए, क्योंकि इससे सीखने के अवसर बढ़ते हैं। लड़कियों को नेतृत्व की भूमिका में लाना होगा सम्मेलन में बेटियों की सोच, उनके सपनों और उन्हें साकार करने के तरीकों पर भी गहन चर्चा हुई। साथ ही, आने वाले वर्ष में वीरांगना वाहिनी के संगठन का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में कैसे किया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श किया गया। संगठन का प्राथमिक लक्ष्य लड़कियों को नेतृत्व की भूमिका में लाना है, ताकि वे सुरक्षा, देश और शिक्षा जैसे हर मुद्दे पर समान रूप से निर्णय ले सकें। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि निर्णय लेने की क्षमता विकसित किए बिना शिक्षा अधूरी है, इसलिए बेटियों को यह कौशल सीखना अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं के अधिकारों के संदर्भ में कई चुनौतियां इस मौके पर बलरामपुर से आईं तारा चौधरी ने कहा कि यह उन महिलाओं के लिए एक आह्वान है, जिन तक यह आवाज पहुंच रही है। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के लिए वीरांगना वाहिनी से जुड़ने की अपील की। तारा ने कहा कि आजादी के बाद संविधान से मिले अधिकारों के बावजूद महिलाओं को अभी भी उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है और महिलाओं के अधिकारों के संदर्भ में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। सामाजिक भेदभाव कम देखने को मिलता है तारा चौधरी ने बताया कि वह बलरामपुर के थारू क्षेत्र से आती हैं, जहां आज भी शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों के लोग अपनी संस्कृति, बोली और खान-पान से पहचाने जाते हैं और वहां सामाजिक भेदभाव कम देखने को मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि वीरांगना वाहिनी वहां तक पहुंचेगी, तो यह एक सफल प्रयास होगा और तराई क्षेत्र की महिलाएं भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। रायबरेली की ज्योति ने कहा कि समाज में पितृसत्तात्मक सोच को समाप्त करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब अनाज सभी के लिए उपलब्ध है, तो किसानों के बच्चों को शिक्षा भी मुफ्त मिलनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियां सुनाईं—'नारियां समाज की जाग जाएं अगर, तो समाज यूं ही सुधर जाएगा।'
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