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    ललितपुर के सेरोन में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू:मुनि सुधासागर महाराज ने कहा- तीर्थंकरों से होती है धर्म तीर्थ की स्थापना

    2 hours ago

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    ललितपुर के सतोदय तीर्थ सेरोन में मञ्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ महोत्सव का आगाज हुआ। महोत्सव की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। इसमें प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र ध्वज-पताकाएं लिए सुसज्जित हाथियों पर सवार होकर चल रहे थे, उनके पीछे महिलाएं मंगल कलश लेकर थीं। निर्धारित मार्गों से होते हुए कलश यात्रा आयोजन स्थल पर पहुंची। यहां मुनिसंघ के सान्निध्य में पुण्योजक परिवार विकास जैन और प्रियंका जैन (सीए) ने ध्वजारोहण किया, जबकि नीतेश जैन (विलौआ जखौरा) ने मंडप का शुभारंभ किया। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्म की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव से जीवन में परिणामों की विशुद्धि बढ़ती है और आत्मा पवित्र व निर्मल होती है। पंचकल्याणक में तीर्थंकर के पांचों कल्याणकों को स्वर्ग से सौधर्म इंद्र आकर मनाते हैं। मुनि सुधासागर महाराज ने आगे कहा कि एक सामान्य मां भी धन्य हो जाती है जब वह पंचकल्याणक में तीर्थंकर की मां बनती है, वह सर्व वंदनीय हो जाती है। उन्होंने बताया कि जैन धर्म अनादि काल से है और हर तीर्थंकर अपने समय में धर्म तीर्थ की स्थापना करते हैं। तीर्थंकर ऐसी आत्मा होती हैं जो तीनों लोकों में सभी के सुख और कल्याण की भावना रखती हैं। आज उन्हीं तीर्थंकरों के कल्याणकों को मनाया जा रहा है। मध्याह्न में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के मार्गदर्शन में शांति मंत्र, पात्र शुद्धि और सकलीकरण की मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं। इसमें मुख्य पात्रों में भगवान के माता-पिता महाराजा नाभिराय और मरूदेवी, सौधर्म इंद्र, धनपति कुबेर, भरत चक्रवर्ती, बाहुबली, राजा सौम , राजा श्रेयांस (देवेंद्रकुमार मंजू जैन), ईशान इंद्र (पवन जैन बाबा मार्वल), सानत इंद्र (समता जैन आनंद जैन साइकिल) और विधिनायक (राजू जैन मड़ावरा) समेत अन्य इंद्र-इंद्रणियों ने भाग लिया। इसके उपरान्त नैमेतिक पूजन के उपरान्त यागमण्डल विधान सम्पन्न हुआ जिसमें उपस्थित इन्द्र इन्द्राणियों ने भक्तिपूर्वक प्रभु के सम्मुख अर्घ समर्पित किए। सायकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनि ने श्रावको द्वारा की गई जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया।
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