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    लेम्बोर्गिनी केस में यू-टर्न, घायल ने समझौता कर लिया:बोला- कारोबारी का बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था, ड्राइवर का सरेंडर; पुलिस की जांच में शिवम आरोपी

    13 hours ago

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    कानपुर के लेम्बोर्गिनी केस में बुधवार को यू-टर्न हुआ। पहले कथित ड्राइवर ने दोपहर में कोर्ट में सरेंडर कर दिया। फिर मुकदमा दर्ज कराने वाले मो. तौसीफ ने समझौता कर लिया। वकील के साथ वह कोर्ट पहुंचा। ड्राइवर मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी मैं ही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त मैं घबरा गया था। कुछ समझ नहीं आया। इसी वक्त हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा और दरवाजा खोला गया तो मैं नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को निकाला था। हादसे के बाद मैं कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि हम सभी गाड़ी चला लेते हैं। इसके बाद शिवम मिश्रा के वकील नरेंद्र कुमार यादव ने कहा- घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता किया है। वादी ने पहचान की है कि गाड़ी मोहन ही चला रहा था। वादी ने कहा है कि वह इस केस में अग्रिम कोई कार्रवाई नहीं चाहता है। बता दें कि लेम्बोर्गिनी कार ने रविवार को 6 लोगों को कुचल दिया था। इसका वीडियो सामने आया। पुलिस कमिश्नर ने जांच के हवाले से दावा किया कि लेम्बोर्गिनी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। शिवम मिश्रा का नाम भी FIR में जोड़ा गया था। बुधवार को ACJM-7 कोर्ट में सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी ने कहा- आरोपी शिवम मिश्रा की ओर से उनके वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी कार को रिलीज कराने के लिए अर्जी दाखिल की है। सुनवाई के दौरान मोहन ने कहा कि गाड़ी वह ड्राइव कर रहा था, जबकि कानपुर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम मिश्रा को ही आरोपी ड्राइवर बताया है। कारोबारी के पिता बोले- पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे मंगलवार दोपहर मामले में नया ट्विस्ट आया। कारोबारी पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। केके मिश्रा ने कहा- हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई। ठीक होने पर बेटे को लेकर मैं खुद थाने आऊंगा। मीडिया ने पूछा कि पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि गाड़ी शिवम चला रहा था। इस पर पिता ने जवाब दिया- पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे हैं। वहीं, कारोबारी के वकील ने दावा किया कि शिवम बेहोश है और दिल्ली में भर्ती है। उधर, कारोबारी केके मिश्रा का दावा पुलिस की जांच में पूरी तरह से झूठा निकला है। पुलिस की जांच में CCTV, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कई ऐसे अहम सबूत सामने आए हैं। इससे साफ हो गया है कि कार को शिवम मिश्रा ही ड्राइव कर रहा था, हादसा उसी से हुआ था। कार में कोई दूसरा व्यक्ति या ड्राइवर मौजूद नहीं था। पहले जानिए पुलिस की जांच रिपोर्ट में 5 बड़े सबूत 1.) हादसे के वीडियो ने बयां कर दी सच्चाई पुलिस ने अपनी जांच में हादसे के बाद एक वीडियो शामिल किया है। इसमें हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से बाउंसर आते हैं। लेम्बोर्गिनी कार का शीशा ईंट से तोड़कर गेट खोलते हैं। लेम्बोर्गिनी की ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकालते हैं। दूसरी गाड़ी से लेकर उसे अस्पताल चले जाते हैं। पुलिस का दावा है कि शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते एकदम साफ देखा जा सकता है। वीडियो देखने से यह साफ पता चलता है कि गाड़ी में कोई और दूसरा व्यक्ति ही नहीं था। इस वजह से ईंट से शीशा तोड़ना पड़ा और तब कार का दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला जा सका। 2.) 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज पुलिस की जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा सबूत प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं। जांच कर रहे दरोगा दिनेश सिंह ने 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं। पूछताछ के दौरान इन सभी ने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं मौजूद था। हादसे के बाद बाउंसर उसे कार से निकालकर ले गए हैं। ड्राइवर के गाड़ी चलाने या कार में किसी दूसरे व्यक्ति के मौजूद होने की बात को सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने खारिज किया है। पुलिस ने इन सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किया है। 3.) शिवम की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर मिली पुलिस ने अपने दावे को और मजबूत करने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में बतौर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिवम की मोबाइल लोकेशन को भी शामिल किया है। हादसे के दौरान शिवम की मोबाइल लोकेशन भी VIP रोड पर हादसे वाली जगह पर ही थी। 4.) CCTV में कैद हुई पूरी घटना पुलिस ने जांच रिपोर्ट में स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम की ओर से लगाए गए CCTV की फुटेज भी हासिल किया है। नगर निगम के कंट्रोल रूम से पुलिस को मिले CCTV में पूरा हादसा कैद हुआ है। पुलिस ने इसे भी बेहद अहम सबूत मानते हुए अपनी जांच रिपोर्ट में शामिल किया है। इस फुटेज से भी साफ है कि गाड़ी में कोई ड्राइवर नहीं था, सिर्फ एक व्यक्ति ही मौजूद था। इससे आरोपी शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा का दावा झूठा होने का सबसे मजबूत सबूत है। 5.) वादी ने अपने बयान में भी शिवम को पहचाना हादसे की FIR दर्ज कराने वाले घायल चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक के बयान दर्ज किए हैं। वादी ने अपने बयान में बताया कि लेम्बोर्गिनी कार में सिर्फ एक ही व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर था। वीडियो देखकर तस्दीक किया है कि कार आरोपी शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वादी का बयान भी किसी केस में सबसे अहम माना जाता है। पूरे केस में वादी का बयान भी अहम साक्ष्य के तौर पर जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है। आज कोर्ट में पुलिस पेश करेगी जांच रिपोर्ट DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया- शिवम मिश्रा के नाम पर लेम्बोर्गिनी कार है। शिवम के वकील की ओर से गाड़ी को रिलीज करने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसके साथ ही ड्राइवर मोहन की ओर से सरेंडर याचिका दाखिल की गई है। आज ग्वालटोली थाने की पुलिस की ओर से कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी। पुलिस की जांच रिपोर्ट में साफ है कि कार शिवम चला रहा था। पुलिस की जांच में इसके पर्याप्त सबूत मिले हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी हैं। इसके बाद कोर्ट अपना फैसला लेगा। इस केस में भले ही ड्राइवर की ओर से सरेंडर याचिका दाखिल की गई है, लेकिन FIR जमानतीय धाराओं में दर्ज है। लेम्बोर्गिनी से 6 को उड़ाया था, जानिए क्या था पूरा मामला VIP रोड पर 8 फरवरी की दोपहर तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 को उड़ा दिया। मामले में पुलिस ने घायल चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक की तहरीर पर कार नंबर के आधार पर FIR दर्ज की थी। जबकि हादसे का लाइव वीडियो समेत कई अहम सबूत थे, लेकिन अरबपति कारोबारी के रसूख के चलते पुलिस ने गाड़ी नंबर के आधार पर केस दर्ज किया था। हाई प्रोफाइल मामले में आरोपी को राहत देने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया तो पुलिस ने आनन-फानन में 9 फरवरी को हादसे के 24 घंटे बाद कार चालक शिवम मिश्रा का नाम FIR में बढ़ा दिया। 10 फरवरी को आरोपी शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे, उन्होंने दावा किया कि गाड़ी उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था, बेटा कार में बैठा हुआ था। यह भी बताया कि उसकी तबीयत बिगड़ने की वजह से बेटा शिवम बयान दर्ज कराने नहीं आ सका है, जल्द ही वह अपने बयान दर्ज कराएगा। लेकिन पुलिस की जांच में आरोपी शिवम के पिता केके मिश्रा और उनके वकील धर्मेंद्र सिंह का दावा पूरी तरह से झूठा निकला है, लेकिन अब देखना है कि कोर्ट में किसका दावा कितना टिकेगा। ------------------------- इससे जुड़े एक खबर और पढ़िए- कारोबारी बोले-कानपुर पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे: लेम्बोर्गिनी बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था; योगी का आदेश- एक्शन लो कानपुर में लेम्बोर्गिनी कार से 6 लोगों को कुचलने के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। कारोबारी पिता केके मिश्रा मंगलवार को ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। मीडिया ने पूछा कि पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि गाड़ी शिवम चला रहा था। इस पर पिता ने जवाब दिया- पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे हैं। वहीं, कारोबारी के वकील ने दावा किया कि शिवम बेहोश है और दिल्ली में भर्ती है। लेम्बोर्गिनी कार मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। CM योगी ने अफसरों को कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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