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    महोबा में कुलपहाड़ के 3200 किसानों को नहीं मिली खतौनी:विधान परिषद में एमएलसी ने उठाया मुद्दा, सरकार को निर्देश

    15 hours ago

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    महोबा के कुलपहाड़ क्षेत्र में हजारों किसान अपनी कृषि भूमि के मालिकाना हक के लिए परेशान हैं। विधान परिषद में एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने खतौनी न मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद किसानों को कंप्यूटरीकृत खतौनी नहीं मिल रही है, जिससे वरासत और फसल बीमा जैसे आवश्यक कार्य बाधित हो रहे हैं। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने इस मामले पर सरकार को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने नियम 111 के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि कुलपहाड़ के लगभग 3200 खातेदारों और 7500 एकड़ भूमि की नामांतरण प्रक्रिया 30 जुलाई 2022 को धारा 52 का प्रकाशन होने के बावजूद रुकी हुई है। इस कारण किसान पिछले कई वर्षों से अपनी कृषि भूमि के अभिलेखों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। अभिलेखों के अभाव में किसानों की मृत्यु होने पर उनकी वरासत दर्ज नहीं हो पा रही है। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है और सरकार की 'ई-फार्मर रजिस्ट्री' तकनीक भी अप्रभावी साबित हो रही है। एमएलसी सेंगर ने मांग की कि जब चकबंदी और राजस्व विभाग द्वारा खतौनी टंकण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, तो इसे डिजिटल रूप में जारी करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने जनहित में इन अभिलेखों को तत्काल ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने शासन को निर्देशित किया कि इस प्रकरण में अविलंब आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि सदन के इन निर्देशों के बाद कुलपहाड़ के किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक और कंप्यूटरीकृत खतौनी कब तक मिल पाती है।
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