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    महाशिवरात्रि 15 फरवरी को सर्वमान्य:पुरोहित दिव्यानंद ने कहा- चार प्रहर की रात्रि पूजा का है विधान, भावना से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ

    6 hours ago

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    महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर लोगों के बीच चल रहे भ्रम पर मेरठ के पुरोहित ब्रह्मचारी दिव्यानंद ने साफ किया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को ही सर्वमान्य रूप से मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि का अर्थ ही ‘रात की पूजा’ है, इसलिए 15 तारीख की रात्रि का विशेष महत्व है। कैसे करें पूजा, क्या है सही विधि? ब्रह्मचारी दिव्यानंद ज्योति के अनुसार, जो लोग विधिवत पूजा करना चाहते हैं, वे ब्राह्मण द्वारा पूजन कराएं। जिनके लिए यह संभव न हो, वे जल, धूप, दीप, नैवेद्य और बेलपत्र से भी श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, भावना सबसे बड़ा मंत्र है। भगवान शिव भोले हैं, भांग-धतूरा, बेलपत्र जैसे सरल अर्पण से भी प्रसन्न हो जाते हैं। रात की पूजा क्यों खास? शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद से सूर्योदय तक चार प्रहरों में पूजा का विधान है। विशेष रूप से मध्यकालीन रात्रि का योग अत्यंत शुभ माना गया है। इसी रात्रि को कहीं शिव-पार्वती विवाह, तो कहीं दिव्य ज्योतिर्लिंग प्रकट होने का उल्लेख मिलता है। शिवलिंग पर रात में जल चढ़ेगा या नहीं? लोगों में यह मिथक है कि शाम के बाद जल नहीं चढ़ाना चाहिए। इस पर स्पष्ट किया गया कि महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसर पर रात्रि में जलाभिषेक किया जा सकता है। सामान्य दिनों में श्रृंगार के बाद जल न चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन शिवरात्रि में जलाभिषेक प्रमुख है। मनोकामना पूर्ति के उपाय यदि किसी की विशेष मनोकामना हो, तो गुरुमुख से मिले मंत्र का जप श्रेष्ठ है। जिनके गुरु नहीं हैं, वे नीलकंठ स्तोत्र, शिव चालीसा या नाम-स्मरण कर सकते हैं। नीलकंठ स्तोत्र के पाठ से भय, बाधा और नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं। शुभ समय और योग उन्होंने बताया कि वैसे तो सूर्यास्त से सूर्योदय तक पूजा की जा सकती है, लेकिन रात्रि का मध्यकाल सबसे शुभ माना गया है। सिंह लग्न में विशेष पूजन करने से बुद्धि, तेज और सफलता की प्राप्ति होती है। ब्रह्मचारी दिव्यानंद ने कहा—तन, मन और धन से समर्पण ही शिव-भक्ति का सार है। जितना समर्पण, उतना ही फल। महाशिवरात्रि पर सुबह स्नान कर मंदिर जाएं, जलाभिषेक करें और रात्रि में श्रद्धा से पूजा-अर्चना करें—भोलेनाथ अवश्य कृपा करेंगे।
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