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    मुजफ्फरनगर दंगे के 32 आरोपी बरी:2013 हिंसा के आरोप, साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला

    1 hour ago

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    मुजफ्फरनगर की एक स्थानीय अदालत ने 2013 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के कुटबा गांव में हुए हमले में आठ लोगों की हत्या, आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के आरोप में 32 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट नंबर एक) मंजुला भालोटिया की अदालत ने सुनाया। मुजफ्फरनगर जिले में 7 सितंबर 2013 को सांप्रदायिक तनाव भड़का था। एक पंचायत से लौट रही भीड़ पर हमले के बाद 8 सितंबर को कई गांवों में हिंसा फैल गई। कुटबा गांव के निवासी इमरान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि सुबह करीब 9 बजे सैकड़ों लोगों की भीड़ ने सांप्रदायिक नारे लगाते हुए मुस्लिम समुदाय के घरों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने राइफल, बंदूक, तमंचे, तलवार और अन्य धारदार हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस दौरान भगदड़ मच गई और लोग अपने घरों में छिप गए। हमलावरों ने धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की, घरों में आग लगा दी और सामान व पशुधन लूट लिया। लगभग ढाई घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों की जान बचाई। इस हमले में वहीद, शमशाद, इरशाद, तराबू, कय्यूम, फैय्याज, मोमीन और खातून (एक महिला) सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस मामले में कुल 111 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच के बाद 36 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान चार आरोपी, जिनमें चतरा, दीपक, देवेंद्र और सोनू (सभी कुटबा निवासी) शामिल थे, की मृत्यु हो गई। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय सहरावत ने बताया कि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने शेष 32 आरोपियों को बरी कर दिया। बरी हुए आरोपियों में मनोज, राहुल पुत्र महिपाल, बुरेश पुत्र हरिया, धीरज पुत्र बाबू, विकास पुत्र मांगा, सोमपाल पुत्र नाहरू, बिजेंद्र पुत्र महावीर, भूपेंद्र उर्फ गुड्डू पुत्र प्रीतम, नरेंद्र उर्फ गुड्डू पुत्र प्रीतम, रामसिंह पुत्र आशाराम, भीम पुत्र बाबू, गुड्डू पुत्र अमरपाल, पप्पू पुत्र मांगा, कालू पुत्र गिरवर, पिंटू उर्फ बिंटू पुत्र ब्रजपाल, मनोज पुत्र हरपाल, कल्लू उर्फ मदन पुत्र प्रीतम, देशपाल उर्फ देशा पुत्र इकराम, जितेंद्र पुत्र हरपाल, नरेंद्र पुत्र हरपाल, नीरज पुत्र श्यामलाल, गुल्लू पुत्र जगवीरा, प्रवीण पुत्र ओमवीर, अमित पुत्र भोपाल, नीटू पुत्र ब्रजपाल, लवकुमार पुत्र ओमपाल, भालू पुत्र कालू, शौकी पुत्र रुघन और कुंवरपाल शामिल हैं। सभी आरोपी गांव कुटबा के निवासी हैं। यह फैसला 2013 दंगों के कई मामलों में से एक है, जहां लंबी सुनवाई के बाद साक्ष्यों की कमी के कारण आरोपी बरी हो रहे हैं। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद कमजोर हुई है।
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