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    मजदूर संगठन नें श्रम कानूनों का विरोध किया:चार श्रम संहिताओं, राष्ट्रीय श्रमशक्ति नीति, कानून के पुनर्विचार की मांग

    15 hours ago

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    देश के विभिन्न मजदूर संगठनों और यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं, राष्ट्रीय श्रमशक्ति नीति, 2025 और वीबी-जीआरएएम (जी) कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। इन संगठनों ने इन कानूनों के पुनर्विचार और निरस्तीकरण की मांग की है, उनका आरोप है कि ये श्रमिक हितों का गंभीर हनन करते हैं। इसी संदर्भ में, 12 फरवरी को देशभर में विभिन्न ट्रेड यूनियन, मजदूर और किसान संगठनों ने "अखिल भारतीय मजदूर किसान हड़ताल दिवस" के रूप में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत श्रमिक समुदाय की सामूहिक अभिव्यक्ति बताया गया है। मजदूर वर्ग का मानना है कि नई श्रम संहिताएं रोजगार में 'हायर एंड फायर' मॉडल को बढ़ावा देती हैं। वे ठेका प्रथा और प्रशिक्षु व्यवस्था को स्थायी रोजगार के रूप में सामान्य करती हैं। इन संहिताओं से मजदूरों के यूनियन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति, नौकरी-वेतन की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकार छिन जाते हैं। इसके अतिरिक्त, मनरेगा को कमजोर कर वीबी-जीआरएएम (जी) कानून लागू किया गया है। यह कानून देश के 30 करोड़ ग्रामीण मेहनतकशों के अधिकारों पर गहरा आघात माना जा रहा है। यह काम के अधिकार को सार्वभौमिक बनाने के बजाय केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं और चयनित सूचियों पर निर्भर करता है। इस कानून के तहत ग्राम सभा और पंचायत की संवैधानिक भूमिका समाप्त कर एक केंद्रीकृत, तकनीकी और निगरानी-आधारित ढांचा खड़ा किया गया है। साथ ही, राज्यों को अब योजना के व्यय का 40 प्रतिशत वहन करना होगा, जबकि पहले यह 10 प्रतिशत था।
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