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    मुलायम के 'हल्ला बोल' की राह पर अखिलेश:प्रशासन को बिना बताए पीड़ित के घर पहुंचेगी सपा; चुनाव से पहले पार्टी की नई स्ट्रैटजी

    5 hours ago

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    यूपी की सियासत में अखिलेश यादव ने नया पैंतरा चला है। अब किसी घटना-दुर्घटना के बाद सपा नेता प्रशासन को बिना बताए पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे। PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पीड़ितों का खासतौर पर ध्यान रखा जाएगा। सपा ने इस नई स्ट्रैटजी को ‘गोरिल्ला वॉर’ का नाम दिया है। मुलायम सिंह के दौर में भी सपा इसी तरह की रणनीति पर काम करती थी। तब इसे ‘हल्ला बोल’ कहा जाता था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सपा एक बार फिर से सड़क उतरकर संघर्ष करती दिखेगी? किस तरह की घटनाओं में आक्रामक रुख अपनाया जाएगा? अखिलेश यादव की ये रणनीति कितनी कारगर होगी? इन सब सवालों का जवाब पढ़िए इस रिपोर्ट में… ‘गोरिल्ला वॉर’ की जरूरत क्यों पड़ी गाजीपुर में 15 अप्रैल, 2026 को पिछड़ी जाति की एक लड़की की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। 22 अप्रैल को सपा नेताओं का डेलीगेशन पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा, तो उनकी गांववालों के साथ तीखी झड़प हो गई। पत्थरबाजी में पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा समेत कई लोग घायल हो गए। सपा ने आरोप लगाया कि दोषियों पर कार्रवाई के बजाय सपा कार्यकर्ताओं पर मुकदमा लिखा गया। इसके बाद ही अखिलेश यादव ने कहा था- अब पीड़ित परिवार से मिलने के लिए पुलिस-प्रशासन को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वो हमारे लोगों को रोक देंगे। हम बिना बताए जाएंगे और सरकार की नाकामी उजागर करेंगे। पीड़ित के लिए काम करेंगे, जिससे उन्हें न्याय मिल सके। समय के साथ पुरानी रणनीति पर लौट रही सपा समाजवादी पार्टी लंबे समय से ग्राउंड पर उतरकर लोकल मुद्दों के लिए संघर्ष करने की रणनीति से दूर रही है। बड़े से बड़े मामले में अखिलेश यादव या तो सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हैं या प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। जबकि, मुलायम सिंह के दौर में सपा का तौर-तरीका इससे बिल्कुल अलग रहता था। पार्टी सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन करने के लिए जानी जाती थी। अब अखिलेश यादव के ‘गोरिल्ला वॉर’ के ऐलान के बाद माना जा रहा है कि सपा एक बार फिर मुद्दों के लिए सड़क पर नजर आएगी। PDA के खिलाफ होने वाली घटना पर सपा का फोकस सपा प्रवक्ता आजम खान बताते हैं- किसी जिले में कोई घटना-दुर्घटना होती है और पुलिस या कोई अधिकारी किसी दबाव में आरोपियों पर कार्रवाई नहीं करता। पीड़ित को परेशान करता है, तो सपा पीड़ित परिवार की मदद करेगी। इसके लिए डेलिगेशन बिना पूर्व सूचना के पीड़ित परिवार तक पहुंचेगा। कानूनी मदद मुहैया कराएगा। पार्टी का फोकस PDA पर रहेगा। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर खास ध्यान रहेगा। लोकल मुद्दे उठाने से सपा को फायदा होगा सीनियर जर्नलिस्ट और समाजवादी पार्टी की राजनीति को करीब से कवर कर चुके योगेश मिश्रा कहते हैं- गोरिल्ला वॉर राजनीति में नहीं होता। अगर इसका इस्तेमाल राजनीति में हो रहा है, तो मतलब बदल जाएगा। यहां युद्ध नहीं होगा, बल्कि भाजपा और सपा के बीच जुबानी जंग और ग्राउंड पर किसी मुद्दे को भुनाने की होड़ दिखेगी। गोरिल्ला वॉर का मतलब ये भी हो सकता है कि अगर भाजपा का कोई बड़ा नेता सपा के खिलाफ बोलता है या ऐसा बयान देता है जिसका फायदा सपा उठा सके। तो सपा भाजपा के बजाय सीधे उस नेता पर जुबानी हमला करेगी। इसका एक पहलू यह भी है कि अखिलेश यादव अब केंद्र की भाजपा से नहीं, प्रदेश सरकार से निपटने की रणनीति बना रहे हैं। इसके तहत वे ऐसे जमीनी मुद्दों को उठाएंगे, जो आम लोगों को सीधे कनेक्ट करता हो। अगर वे ऐसा करने में कामयाब रहते हैं, तो सपा को फायदा होगा। ‘AI के दौर में गोरिल्ला वॉर नहीं चलेगा’ भाजपा प्रवक्ता अवनीश त्यागी कहते हैं- यह एआई का दौर है। गोरिल्ला वॉर का जमाना राजनीति में न रहा है, न अब रहेगा। विचारों का जमाना है। सबके साथ मिलकर चलने से ही देश की तरक्की होगी। गोरिल्ला वॉर जैसी बातें करके अखिलेश यादव यूपी को किस दौर में ले जाना चाहते हैं? ऐसा कहकर वे अपने कार्यकर्ताओं को ऐसे दलदल में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, जहां से निकलना मुश्किल होगा। अब हर हाथ में मोबाइल है और हर वर्ग शिक्षित है। उन्हें सही-गलत का फर्क पता है। ऐसे में बिना काम की बात किए किसी को बरगलाना नामुमकिन है। अब जानिए नियमों को लेकर क्या कहते हैं जानकार… ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में विश्वकर्मा लड़की की मौत पर सियासत, राहुल-प्रियंका ने पूछा- बेटियां असुरक्षित क्यों? अखिलेश ने पिता का वीडियो दिखाया गाजीपुर में 16 साल की लड़की की मौत पर सियासत शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी सांसद बहन प्रियंका गांधी ने शनिवार को केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा है। लड़की के साथ रेप और उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…
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