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    मुलायम सिंह यादव के स्मारक का नाम 'सोशलिस्ट म्यूजियम':चौथी पुण्यतिथि पर नाम सार्वजनिक किया, म्यूजियम राजनीतिक सफर को दर्शाएगा

    7 hours ago

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    इटावा के सैफई में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के निर्माणाधीन स्मारक का नाम ‘सोशलिस्ट म्यूजियम’ रखा गया है। समाजवादी पार्टी ने 10 अक्टूबर को नेताजी की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर पहली बार यह नाम सार्वजनिक किया। पार्टी के नेताओं के मुताबिक, स्मारक का नाम नेताजी की समाजवादी विचारधारा और उनके राजनीतिक सफर को ध्यान में रखकर तय किया गया है। सपा के प्रदेश सचिव गोपाल यादव ने बताया कि मुलायम सिंह यादव समाजवादी विचारधारा के प्रमुख नेता थे। डॉ. राममनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं की विचारधारा भी समाजवाद पर आधारित थी। नेताजी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से की थी और इसी पार्टी के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे। पार्टी के नाम में शामिल ‘सोशलिस्ट’ शब्द का अर्थ समाजवादी होता है। इसी वजह से स्मारक का नाम ‘सोशलिस्ट म्यूजियम’ रखा गया है। आने वाली पीढ़ियां जान सकेंगी नेताजी का संघर्ष गोपाल यादव ने कहा कि अमेरिका के अब्राहम लिंकन मेमोरियल की तर्ज पर तैयार हो रहा यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को नेताजी के जीवन और विचारों को समझने का अवसर देगा। जिन लोगों ने मुलायम सिंह यादव का संघर्ष और उनकी राजनीतिक यात्रा नहीं देखी, वे यहां आकर उनके जीवन और समाजवादी सिद्धांतों के बारे में जान सकेंगे। 1967 में जसवंतनगर से शुरू हुआ था चुनावी सफर मुलायम सिंह यादव ने 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1969 में इसी सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1974 में भारतीय क्रांति दल, 1977 में जनता पार्टी, 1985 में लोक दल और 1989 में जनता दल के टिकट पर जसवंतनगर से विधायक चुने गए। वर्ष 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर चुनाव लड़ने पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी। वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के टिकट पर जसवंतनगर और तिलहर, दोनों विधानसभा सीटों से जीते। वर्ष 1993 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर, शिकोहाबाद और निधौली कलां, तीनों सीटों से जीत हासिल की। वर्ष 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई। मैनपुरी, संभल और आजमगढ़ से भी जीते लोकसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव ने 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैनपुरी लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 1998 और 1999 में संभल से लोकसभा पहुंचे। वर्ष 2004 और 2009 में मैनपुरी से चुनाव जीते। वर्ष 2014 में उन्होंने मैनपुरी और आजमगढ़, दोनों सीटों से जीत हासिल की। वर्ष 2019 में एक बार फिर मैनपुरी से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 8.3 एकड़ में बन रहा स्मारक, लागत करीब 80 करोड़ रुपए सैफई में नेताजी के समाधि स्थल के पास करीब 8.3 एकड़ क्षेत्रफल में स्मारक का निर्माण कराया जा रहा है। वर्ष 2023 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसकी घोषणा की थी। उस समय निर्माण की अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपए बताई गई थी। स्मारक को अमेरिका के अब्राहम लिंकन मेमोरियल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसमें भारतीय लोककला और वास्तुकला की झलक भी शामिल होगी। योजना के मुताबिक, परिसर में करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में पार्क और जनसुविधाओं की व्यवस्था की जानी है। कांस्य प्रतिमा, संग्रहालय और कला दीर्घा बनाने की योजना स्मारक के स्मृति सभागार में मुलायम सिंह यादव की भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। संग्रहालय और कला दीर्घा में उनके राजनीतिक जीवन, संघर्ष, सादगी, तस्वीरों और यादगार वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रवेश द्वार से समाधि स्थल तक जाने के लिए विशेष गलियारा, दीर्घा, चौक और प्रांगण बनाने की भी योजना है। स्मारक के स्तंभों की बनावट में सम्राट अशोक के समय के लुंबिनी, मेरठ और प्रयागराज के स्तंभों से प्रेरित कला शामिल करने का प्रस्ताव है। परिसर में हरियाली, बैठने और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। वर्ष 2023 में घोषित योजना के अनुसार, स्मारक का उद्देश्य नेताजी के राजनीतिक जीवन और समाजवादी विचारधारा को संरक्षित करना है। अब ‘सोशलिस्ट म्यूजियम’ नाम सार्वजनिक होने के बाद इसे उनके लंबे राजनीतिक सफर और समाजवादी सिद्धांतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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