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    'मेरी जमीन मां समान, सौदा नहीं करेंगे':वाराणसी में स्पोर्ट्स सिटी का विरोध शुरू, गंजारी-हरसोस में पोस्टर लगे; बोले- मुआवजे से पेट नहीं भरता

    3 hours ago

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    ‘पहले रिंग रोड बानी तो हम लोगों ने कहा की विकास का काम है। सड़क बनेगी तो हमें भी फायदा होगा। हम लोगों ने जमीनें दी। इसके बाद स्टेडियम बनने लगा। कई किसानों की जमीन उसमें भी गयी। अब अर्बन सिटी और स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर हमारी जमीन ली जा रही है। तो सरकार यह जान ले हम अपनी जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे।’ ये कहना है वाराणसी के जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर हरसोस गांव के ओमप्रकाश सिंह का। ओमप्रकाश की रिंग रोड के किनारे दो बिस्वा जमीन है। ओमप्रकाश ने कहा- हमारी जमीन सरकार ले लेगी तो हम क्या करेंगे। मुआवजे से पेट नहीं पलता। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) गंजारी, हरपुर, शिवसागर और हरसोस गांवों में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के पास लगभग 375 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक 'स्पोर्ट्स सिटी' (स्पोर्ट्स टाउनशिप) विकसित कर रहा है। ₹200 करोड़ का बजट इस योजना के लिए प्रस्तावित है। परियोजना में स्पोर्ट्स एकेडमी, होटल, मल्टी-लेवल पार्किंग, पार्क और अन्य खेल-संबंधित सुविधाएं होंगी, जो इसे एक प्रमुख खेल व पर्यटन केंद्र बनाएगी। इस योजना की जानकारी खबरों के माध्यम से जब किसानों से हुई तो उन्होंने एकजुट होकर इस योजना का विरोध शुरू कर दिया है। करीब 1000 ग्रामीण इस योजना में प्रभावित होंगे। ऐसे में सभी ने अपने खेतों में बोर्ड लगा रखे हैं। जिनपर लिखा है - ‘मेरी जमीन मेरे पूर्वज और मां के सामान। किसान सौदा नहीं करेगा।’ ‘हम लैंड पुलिंग/अधिग्रहण का पूर्ण विरोध करते हैं। डराने वालों और दलालों से सावधान।’ ऐसे में टीम दैनिक भास्कर ने हरसोस गांव पहुंचकर इन पोस्टर्स का सच जाना और किसानों से बातचीत किया। किसानों ने बताया कि सरकार को हम जमीन नहीं देंगे क्योंकि जमीन देंगे तो हम खाएंगे क्या। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… देखिए हरसोस और गंजारी गांव में लगे पोस्टर की 3 तस्वीरें… किसान बोले- हम जमीन नहीं देंगे, चाहे जो हो जाए हरसोस गांव के किसान धर्मराज पटेल ने बताया- हमारी डेढ़ बीघा जमीन है सरकार अर्बन सिटी और स्पोर्ट्स सिटी के डेवलेपमेंट के नाम पर हमारी जमीन लेना चाहती है जबरदस्ती की जा रही है। हम लोग देना नहीं चाह रहे हैं। हम अगर अपनी जमीन दे देंगे तो हम कहां जाएंगे। क्या खाएंगे और परिवार कैसे चलाएंगे। धर्मराज ने कहा हमें मुआवजा नहीं चाहिए क्योंकि हमें जमीन देनी ही नहीं है। हमारी सरकार से कोई मांग भी नहीं है। सरकार हमारी जमीन छोड़ दे। इसलिए हम लोगों ने अपनी जमीनों में यह पोस्टर लगा रखा है। पूंजीपतियों के देने के लिए हमारी जमीन ले रहे हरसोस के रहने वाले ही ओमप्रकाश सिंह ने बताया - इसके पहले हमारी जमीन रिंग रोड में गयी उस वक़्त हम लोग कुछ नहीं बोले। उसक बाद यहां स्टेडियम आ गया और वह भी बन रहा है। अब पूंजीपतियों को देने के लिए हम लोगों की जमीन पूरी लेने का सरकार ने प्रयत्न शुरू कर दिया है। स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है। लेकिन हम जमीन नहीं देंगे इसलिए यह पोस्टर खेतों में लगाया गया है। अधिकारी ने आकर पोस्टर हटाने को कहा ओमप्रकाश सिंह ने आगे बताया - हमारे पास 3 बीघा जमीन है। सिर्फ जमीन ही नहीं हमारा घर भी चला जाएगा। अधिकारी आये थे पोस्टर लगाने के बाद; हम लोगों ने पोस्टर पर लिखा है। जमीन लेंगे तो जान भी हम लोग देंगे। इस बोर्ड पर अधिकारियों को आपत्ति थी। वो आये और बोले की बोर्ड में से जान देने वाली बात हटा दो और उसके बाद लड़ो। जब जमीन ही नहीं देना तो मुआवजा कैसा जमीन के मुआवजे पर ओमप्रकाश थोड़ा नाराज हुए। बोले - जब हमें जमीन देना ही नहीं तो हम मुआवजे की बात क्यों करें। हमें कोई मुआवजा नहीं चाहिए। ओमप्रकाश ने कहा - ये सरकार मनमानी और जबरदस्ती कर रही है। ये पूंजीपतियों की सरकार है; गरीबों की सरकार नहीं है। गरीबों की नहीं पूंजीपतियों की सरकार है। जमीन तो अपनी है, किसी हालत में नहीं देंगे हरसोस की रहने वाली शांति देवी ने बताया - मेरे पास दो बिस्सा जमीन है। जो हमारी पूरी पूंजी है। सरकार जबरदस्ती नहीं ले सकती। हमरे पास शादी ब्याह करने लायक के लड़का-लड़की हैं। छोटा सा मकान है। यही हमारा सबकुछ है। हम नहीं देंगे सरकार को जमीन चाहे जान ही क्यों न चली जाए। हमारे परिवार में एक लड़का और लड़की की शादी अभी करनी है। हमारा मकान 50 साल से ज्यादा का है। चाहे जो होगा हम जमीन नहीं देंगे। सरकार को नहीं दी जाएगी जमीन राम फकीर प्रजापति ने बताया - जब सरकार जमीन घर सब लेने पर उतारू हो चुकी है। तो क्या करेंगे किसान बोर्ड लगाएंगे ही। जब पूरा घर और खेत ले लेंगे तो कहां जाएंगे हम लोग। मुआवजा नहीं चाहिए हमें। जमीन एकदम नहीं दिलाएगी सरकारों को चाहे जो हो जाए। हम लोग जमीन बेच देंगे तो आगे क्या खाएंगे। वहीं महिला शांति देवी ने भी कहा - खेत तो नहीं देंगे चाहे जो हो जाए। जा रही 21 हेक्टेयर जमीन रंजीत कुमार पटेल ने बताया - पेपर में आया था कि हरसोस ग्रामसभा से 21 हेक्टेयर जमीन लैंड पुलिंग में जा रही है। ऐसे में सभी गांव वाले एकजुट हुए और इसमें राय की गयी की क्या किया जाए। मीटिंग की सूचना पर प्रशासन दबाव बनाने लगा। लेकिन हम लोग पीछे नहीं हटे और हमने यह पोस्टर लगाया। चंदा उतारकर शादी करेंगे लेकिन जमीन नहीं बेचेंगे ओमप्रकाश ने कहा - हम सभी गांव वालों की जमीन और मकान इस प्रोजेक्ट में चले जाएंगे। ऐसे में कई गरीब ऐसे भी हैं जिनके पास यही जमीन है। वो अपनी लड़की की शादी के चक्कर में इसे बेच सकते हैं। रजिस्ट्री न होने पाए इसके लिए हम लोगों ने निर्णय लिया है कि किसी गरीब को यदि जरूरत पड़ेगी तो हम लोग चंदा करके उसकी बेटी की शादी कर देंगे लेकिन जमीन नहीं बिकने देंगे। --------------------- ये खबर भी पढ़िए- ‘ए राजा हमके बनारस घुमाई दा’ पर जमकर नाचे विदेशी, काशी में आयरलैंड की युवती को गुझिया खिलाई, बोला- कल्चरल स्वीट्स हवा में उड़ता गुलाल… रंगों में रंगे लोग… ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते देशी-विदेशी सैलानी… चारों तरफ गूंजते 'होली हैं' के नारे। यूपी में आज होली पर हर तरफ कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। विदेशी पर्यटक भी खुद को इससे दूर नहीं रख पाए। काशी-मथुरा में विदेशी पर्यटकों ने जमकर रंग खेल रहे हैं। सभी होली के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। एक-दूसरे को गुलाल लगा रहे हैं। ‘ए राजा हमके बनारस घुमाई दा’ जैसे गानों पर डांस कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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