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    मिर्जापुर में सावन के सुरों से गूंजा राम-जानकी मंदिर:पंच दिवसीय संगीत समारोह में नवोदित कलाकारों ने बांधा समां

    2 hours ago

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    मिर्जापुर में सावन माह के अवसर पर आयोजित पंच दिवसीय संगीत समारोह का समापन पूर्णिमा तिथि पर हुआ। नगर के गऊघाट स्थित राम-जानकी मंदिर परिसर के सभागार में हुए कार्यक्रम में नवोदित कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत, भजन और लोक संगीत की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक कला संगीत संस्कृति प्रचारिणी समिति और मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित समारोह का उद्देश्य लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना था। पांच दिनों तक चले आयोजन में कलाकारों ने गायन और वादन के माध्यम से सावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छटा बिखेरी। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. योगानंद गिरी ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास और लगन जरूरी है। संगीत के क्षेत्र में नियमित अभ्यास करने वाला साधक ही आगे चलकर ख्याति हासिल करता है। डॉ. योगानंद गिरी ने कहा कि संगीत भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण विधा है। ऐसे आयोजन नवोदित कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ अनुभवी कलाकारों से सीखने का अवसर देते हैं। उन्होंने कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ निरंतर साधना और अनुशासन भी जरूरी है। मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर युवा कलाकारों के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। पृथ्वी कुमार नारंग को ‘महामना’ की पदवी देने की घोषणा समारोह में डॉ. योगानंद गिरी ने कलाकारों को प्रशिक्षित करने वाले पृथ्वी कुमार नारंग को जूना अखाड़ा की ओर से ‘महामना’ की पदवी प्रदान करने की घोषणा की। उनकी ओर से नवोदित कलाकारों को प्रशिक्षण देने और संगीत के प्रति प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की गई। शास्त्रीय संगीत, भजन और लोक धुनों ने बांधा समां कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत, भजन और लोक संगीत की प्रस्तुतियां दीं। सावन की भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच कलाकारों के गायन और वादन ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। मंदिर परिसर में मौजूद संगीत प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। नई प्रतिभाओं को मंच देना रहा आयोजन का उद्देश्य समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पंच दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन करना था। इसके साथ ही नवोदित कलाकारों को अपनी प्रतिभा बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देना भी आयोजन की प्रमुख वजह रही। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने भविष्य में भी लोक कला और संगीत को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन जारी रखने का संकल्प लिया। समारोह में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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