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    मेरठ पहुंचे कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे:बोले- राम मंदिर चंदे पर PM जवाब दें, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच करने की मांग

    13 hours ago

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    शुक्रवार को मेरठ के ग्रैंड एलोरा में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पत्रकार वार्ता आयोजित की। वार्ता में राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने वर्षों तक भगवान राम के नाम पर देशभर से चंदा जुटाया और उसी आंदोलन के आधार पर राजनीतिक लाभ भी लिया । अब जब ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों की बातें सामने आ रही हैं तो देश यह जानना चाहता है कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन की जवाबदेही कौन लेगा। इस्तीफों ने मामले को गंभीर बनाया अभय दुबे ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। उनके मुताबिक यदि सब कुछ पारदर्शी और नियमों के हिसाब से थी तो शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे क्यों हुए। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी सार्वजनिक रूप से बयान दे चुके हैं, जबकि वित्तीय निगरानी और पारदर्शिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। इसके अलावा ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राय के विरोध में भी जानकारियां सामने आई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के गठन और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका रही है, इसलिए केंद्र सरकार इस मामले से खुद को अलग नहीं कर सकती। वित्तीय हेराफेरी से जुड़े कई आरोप लग चुके हैं अभय दुबे ने दावा किया कि एसआईटी अब राम मंदिर से जुड़े बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 को हुई प्राण-प्रतिष्ठा पर करीब 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें लगभग आठ हजार अतिथि शामिल हुए थे। इसके अलावा 25 नवंबर 2025 को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च होने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित वित्तीय हेराफेरी से जुड़े कई आरोप सामने आ चुके हैं। लेकिन कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले का भी जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के बीच इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां होना कई सवाल खड़े करता है। छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी और सीमित कार्रवाई पूरे मामले की लीपापोती जैसी प्रतीत होती है। कांग्रेस ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की। पार्टी ने पूछा कि यदि ट्रस्ट के गठन और प्रशासनिक ढांचे में केंद्र सरकार की भूमिका रही है तो इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री अब तक मौन क्यों हैं। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरा ट्रस्ट सवालों के घेरे में है तो कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित है और यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो स्वतंत्र न्यायिक जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है। पार्टी ने पांच प्रमुख मांगें भी रखीं इनमें प्रधानमंत्री से पूरे मामले पर जवाब देने, चंपत राय, अनिल मिश्रा समेत कथित रूप से शामिल सभी प्रभावशाली लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर नया पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित करने की भी मांग की है। राम मंदिर के लिए मिले चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और खर्च का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है। पत्रकार वार्ता में महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, प्रवक्ता हरिकिशन वर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष अवनीश काजला, पूर्व शहर अध्यक्ष जाहिद अंसारी, प्रदेश प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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