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    मुरादाबाद में विधायक फहीम और फैमिली के OBC सर्टिफिकेट रद्द:स्वतंत्र देव ने कहा था- बीवी की कसम खाओ; दादा जनरल कैटेगिरी में थे

    9 hours ago

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    मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह ने बिलारी सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम और उनकी फैमिली के OBC सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने विधायक और उनकी फैमिली के OBC सर्टिफिकेट के खिलाफ आई शिकायतों पर सुनवाई के बाद यह डिसीजन दिया है। फहीम वही विधायक हैं, जिनके द्वारा जल जीवन मिशन पर सवाल उठाए जाने के बाद जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सदन में उनसे बीवी की कसम खाने को कहा था। समिति ने अपने आदेश में कहा है- मोहम्मद फहीम इरफान पुत्र स्व.मोहम्मद इरफान निवासी ग्राम इब्राहीमपुर तहसील बिलारी का अन्य पिछड़ा वर्ग में झोजा जाति में वर्गीकृत होना स्पष्ट रूप से नहीं पाया गया। इसलिए इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत झोजा जाति का लाभ प्रदान किया जाना उचित नहीं है। समिति को सुनवाई और जांच के दौरान ये भी पता चला कि बिलारी विधायक मोहम्मद फहीम के दादा मोहम्मद इस्लाम लेखपाल थे और वो खुद को सामान्य कैटेगिरी में लिखते थे। पूर्व रिकॉर्ड की छानबीन में भी ये तथ्य सामने आए कि बिलारी विधानसभा सीट पर झोजा नहीं बल्कि तुर्क निवास करते हैं। जो सामान्य श्रेणी में आते हैं। 2015 में OBC सर्टिफिकेट पर जिला पंचायत चुनाव जीते थे फहीम मोहम्मद फहीम ने पहली बार OBC सर्टिफिकेट का इस्तेमाल 2015 के जिला पंचायत चुनाव में किया था। जिला पंचायत के वार्ड नंबर 37 पर उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा था। उस समय ये सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। ऐसे में फहीम ने खुद के झोजा जाति में होने का दावा करते हुए ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाकर चुनाव में जमा किया था। उस समय फहीम के सामने भाजपा से लवली यादव ने चुनाव लड़ा था। लेकिन लवली यादव करीब 3000 वोटों से चुनाव हार गए थे। फहीम जिला पंचायत सदस्य बने थे। तभी से उनके ओबीसी सर्टिफिकेट को लेकर विवाद चला आ रहा है। लवली यादव ने फहीम के झोजा जाति से होने पर आपत्ति जताते हुए उनके ओबीसी प्रमाण पत्र को गलत बताया था। पिता की मौत के बाद फहीम विधायक बने कुंदरकी से अलग होकर 2012 में बिलारी नई विधानसभा सीट बनी थी। इस सीट पर फहीम के पिता हाजी मोहम्मद इरफान सपा के टिकट पर जीतकर विधायक बने थे। लेकिन 2016 में एक सड़क दुर्घटना में हाजी मोहम्मद इरफान की डेथ हो गई थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में मोहम्मद फहीम जीतकर पिता की जगह विधायक बन गए थे। विधायक बनने के बाद फहीम ने जिला पंचायत सदस्य से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वार्ड 37 पर हुए उपचुनाव में फहीम ने अपने छोटे भाई मोहम्मद हसन फैजी को मैदान में उतारा। लेकिन इस बार BJP के लवली यादव 4100 वोटों से यहां जीतकर जिला पंचायत सदस्य बने थे। 2020 में निरस्त हो गया था विधायक की चचेरी बहन का नामांकन 2020 में हुए जिला पंचायत चुनावों में परिसीमन के बाद वार्ड 37 का नाम वार्ड 27 हो चुका था। इस बार इस वार्ड से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए भाजपा के लवली यादव ने अपनी मां गीता देवी को मैदान में उतारा।जबकि विधायक फैमिली से विधायक फहीम के चाचा हाजी मोहम्मद उस्मान ने अपने बेटी का नामांकन कराया था। आरक्षित सीट पर फरीन जहां ने खुद को झोजा बताकर ओबीसी सर्टिफिकेट लगाया। भाजपा उम्मीदवार ने उनके जाति प्रमाण पत्र को चुनौती दी थी। जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने फरीन जहां के नामांकन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार गीता देवी जीत गई थीं। फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र मामले में 2022 में एक एफआईआर भी बिलारी थाने पर दर्ज कराई गई थी। विधायक फैमिली ने चुनाव शून्य घोषित करने की मांग की थी विधायक की चचेरी बहन का नामांकन रद्द होने के बाद विधायक के चाचा ने इसके खिलाफ मुरादाबाद कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने पूरे चुनाव को ही शून्य घोषित करके दोबारा से चुनाव कराए जाने की मांग की थी। कोर्ट में 2024 तक ये मामला चला। इसके बाद कोर्ट ने 2024 में इस आवेदन को खारिज कर दिया था। लवली यादव ने पिछड़ा वर्ग आयोग में की थी शिकायत भाजपा नेता लवली यादव ने दैनिक भास्कर से कहा- हमने 2024 में विधायक मोहम्मद फहीम और उनकी फैमिली के फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट के मामले की शिकायत पिछड़ा वर्ग आयोग में की थी। हमने इनके ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द करने का अनुरोध किया था। पिछड़ा आयोग की समिति ने मामले की जांच की। हमने साक्ष्यों के साथ तर्क प्रस्तुत किया कि झोजा जाति में विधायक एंड फैमिली के बीसी के प्रमाण पत्र अवैध हैं। इसके बाद जनपद स्तरीय समिति गठित की गई। बहस और तारीखें चलीं। अब जनपद स्तरीय समिति ने फैसला दिया कि प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए जाएं।
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