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    Marco Rubio ने भारत में विरोध प्रदर्शनों को बताया आंतरिक मामला, UN experts पर कसा तंज

    13 hours ago

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    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को भारत का "आंतरिक मामला" बताया। साथ ही, प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों को उन्होंने "ऑक्सीमोरॉन" (विरोधाभासी) करार दिया। CJP विरोध-प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र (UN) विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, रुबियो ने कहा, "ओह, UN विशेषज्ञ, मेरे पसंदीदा! UN विशेषज्ञ तो अपने आप में एक विरोधाभास हैं।"इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: कभी Pakistan पर सख्त कार्रवाई चाहते थे Marco Rubio, अब उसी की पैरवी कर रहे हैं! सीनेटर से विदेश मंत्री बनते ही क्यों बदल गये सुर?पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि यह एक घरेलू राजनीतिक मामला है। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करने जा रहा हूँ। यह एक लोकतंत्र है, यहाँ चुनाव होते हैं। मैं उनके घरेलू, राजनीतिक मामलों पर अपनी कोई राय नहीं दूँगा। अमेरिका में भी हम रोज़ाना विरोध-प्रदर्शन देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के प्रति भारतीय पुलिस की "सख्त" कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रक्षा करने और इन प्रदर्शनों तथा पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।'जबरन गायब किए जाने' (एनफोर्सड डिसअपियरेंस) से जुड़े कार्य समूह के एजेंडे पर चर्चा के दौरान, विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों से निपटने के लिए भारत में मौजूद संवैधानिक और संस्थागत सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय राजधानी में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के प्रति पुलिस की बार-बार अपनाई गई कठोर कार्रवाई पर चिंता जताई है।इसे भी पढ़ें: भारत-अमेरिका Trade Deal जल्द संभव, Marco Rubio ने ऊर्जा और रक्षा खरीद बढ़ाने पर दिया जोरउन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव डालने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। भारत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ जुड़ता है, लेकिन इस जुड़ाव का आधार बातचीत, परामर्श और सहयोग होना चाहिए, जिसमें बिना किसी भेदभाव के सबको शामिल करना और पारदर्शिता बरतना मुख्य सिद्धांत होने चाहिए। 
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