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    माता प्रसाद के बाद आशीष पटेल से मिले संजय निषाद:सियासी चर्चाएं तेज, टिकट के लिए भाजपा पर प्रेशर पॉलिटिक्स या कुछ और

    13 hours ago

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    यूपी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने मंगलवार शाम प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल से मुलाकात की। संजय निषाद से मिलने आशीष पटेल खुद उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। इससे पहले, संजय निषाद ने सोमवार शाम को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद से मुलाकात की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों ने भाजपा पर प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है। आशीष पटेल अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के पति हैं। अनुप्रिया फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री और मिर्जापुर से सांसद हैं, जबकि आशीष पटेल योगी सरकार में मंत्री हैं। आशीष पटेल से मुलाकात पर दैनिक भास्कर से मंत्री निषाद ने कहा- हमने तय किया है कि सहयोगी दल यूपी भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े के साथ बैठक करेंगे। छोटे-छोटे मुद्दे सुलझाएंगे। इनमें निषाद आरक्षण, अफसरों द्वारा समय पर बजट खर्च न करना और 69 हजार शिक्षक भर्ती का मुद्दा शामिल है। सीटों को लेकर कोई मसला नहीं है। जितनी सीटें मिली हैं, वहीं सही कर लें। उन्होंने कहा- जहां हम लड़ेंगे, वहां भाजपा अपने कार्यकर्ताओं से सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाने को कहे। बूथ स्तर पर तालमेल होगा तो पता चलेगा कि हम लोगों में कितना दम है। भाजपा की परंपरा रही है कि उनके प्रदेश प्रभारी सहयोगी दलों के साथ तालमेल करते हैं। जमीनी स्थिति की जानकारी लेते हैं। इसके बाद सीट बंटवारा फाइनल होता है। अगले हफ्ते सहयोगी दलों के साथ बैठक हो सकती है। मंत्री बोले- निषाद आरक्षण मुद्दे को हल करना की जरूरत मंत्री निषाद ने कहा- इलाहाबाद में बड़ी रैली करने जा रहे हैं। जगह तय करने के लिए आशीष पटेल से बात की है। वह पहले वहां कार्यक्रम कर चुके हैं, इसलिए उनसे अच्छा ग्राउंड बताने को कहा है। पूरे प्रदेश में 10 बड़ी रैलियां करूंगा। भाजपा के संगठन मंत्री धर्मपाल से भी मेरी बात हुई है। मैंने उसने निषाद आरक्षण के मुद्दे पर कहा- आपकी पार्टी ने इसे अपने एजेंडे में रखा था। भाजपा में हम शामिल हुए थे तो समझौते में था कि विचार करके आरक्षण लागू किया जाएगा। सीएम योगी कई बार इस मुद्दे को विधानसभा में उठा चुके हैं। 2024 में भाजपा को यूपी में नुकसान हुआ। ऐसे में इस मुद्दे को हल करना चाहिए। निषाद समाज को फर्जी तरीके से ओबीसी में डाला गया था। हमारा समाज भूमिहीन है, इसलिए लोगों को पट्टा दिया जाना चाहिए। बसपा ने निषादों की रोजी-रोटी छीनी थी। विपक्षी पार्टियां निचले पायदान पर कटुता पैदा कर जातीय संघर्ष फैलाती हैं। संजय निषाद ने लिखा- हमारा साक्षा प्रयास आगे बढ़ता रहेगा मुलाकात के बाद संजय निषाद ने X पर लिखा- आज लखनऊ आवास पर एनडीए के सहयोगी और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल से मुलाकात हुई। इस दौरान प्रदेश में चल रही सरकारी योजनाओं, सामाजिक हिस्सेदारी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों दलों के बीच बूथ स्तर तक बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को मजबूत करने पर भी बात हुई। हमारा साझा संकल्प है कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के विकास के लिए काम किया जाए। युवाओं के बेहतर भविष्य, सामाजिक न्याय और हर व्यक्ति के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया जाए। मजबूत समाज, मजबूत संगठन और विकसित उत्तर प्रदेश के लिए यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। सोमवार को माता प्रसाद से मिले थे संजय निषाद इससे पहले सोमवार शाम मंत्री डॉ. संजय निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की थी। मंत्री निषाद लखनऊ में सपा नेता के आवास पर पहुंचे थे। उन्हें बुके भेंट किया था। मुलाकात की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं। कैप्शन लिखा था- शिष्टाचार भेंट। विभिन्न विषयों पर चर्चा की। संजय निषाद ने इस मुलाकात पर कहा था- सपा ने जब दरवाजा बंद किया तो हम भाजपा के साथ चले गए। अब अगर भाजपा भी दरवाजा बंद करेगी तो हम दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे। हम उसी के साथ रहेंगे, जो निषाद समाज के मुद्दों को हल करेगा। संजय निषाद ने कहा- नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की तबीयत खराब है। इसलिए उनसे मिलने गया था। उनसे निषादों को अनुसूचित जाति में आरक्षण देने को लेकर बात हुई। कल शाम भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह से भाजपा कार्यालय में मुलाकात हुई थी। उनसे आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर भी बात हुई थी। मंत्री बोले- माता प्रसाद से विनोद हत्याकांड पर भी बात हुई संजय निषाद ने कहा था- माता प्रसाद पांडेय से हमारी गोंडा के विनोद हत्याकांड को लेकर भी बात हुई। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि संजय, तुमने साबित कर दिया कि तुम निषादों के लिए लड़ रहे हो। हमारी विधानसभा में निषादों की संख्या काफी है। पहले वे हमारे साथ थे, लेकिन जब से निषाद पार्टी बनी है, वे उसी को वोट करते हैं। मैंने भी कहा कि अगर निषादों को एससी में शामिल कर दिया गया होता तो विनोद हत्याकांड नहीं होता। लोगों में एससी-एसटी एक्ट का डर रहता। मैंने उनके सामने यह मांग भी रखी कि 25 दिसंबर 2016 को निषादों को एससी में शामिल करने की अधिसूचना जारी की गई थी, उसे वापस नहीं लेना चाहिए था। अधिसूचना जारी होने के 5 दिन बाद ही उसे वापस ले लिया गया था। मंत्री निषाद का शिष्टाचार या प्रेशर पॉलिटिक्स? मंत्री संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय की इस मुलाकात पर सियासी गलियारों में दो तरह की चर्चाएं हो रहीं हैं। पहली- माता प्रसाद की तबीयत खराब थी, इसलिए वह देखने के लिए गए थे। दूसरी- चुनाव की नजदीकी को देखते हुए संजय निषाद अपनी पार्टी के लिए ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करना चाहते हैं। इसलिए वह भाजपा पर प्रेशर बना रहे हैं। राजनीतिक जानकार कहते हैं- संजय निषाद यह मैसेज देना चाहते हैं कि अगर भाजपा ने उन्हें कमतर आंका या पर्याप्त सीटें नहीं दी तो वह दूसरे विकल्प भी तलाश सकते हैं। यानी, सपा में वापसी कर सकते हैं। सपा 2027 का चुनाव पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पर फोकस करके लड़ना चाहती हैं। 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में संजय निषाद की निषाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में थी। पार्टी को 16 सीटें मिली थीं। 10 सीटें निषाद पार्टी के सिंबल पर लड़ी गईं। इनमें से 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि निषाद पार्टी के 6 प्रत्याशियों ने भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 5 जीते थे। इनमें निषाद पार्टी के मझवां (मिर्जापुर) सीट से विधायक रहे डॉ. विनोद कुमार बिंद ने 2024 में भदोही लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था। अब निषाद पार्टी के कुल 5 विधायक हैं। यूपी में निषाद समाज की 5% हिस्सेदारी एक्सपर्ट के मुताबिक, यूपी की राजनीति में निषाद समाज की हिस्सेदारी करीब 5% है। मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, निषाद और कश्यप जैसे उपनामों से पहचाना जाने वाला यह समाज कई सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित करता है। गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, संतकबीर नगर, मिर्जापुर, भदोही, प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर, फतेहपुर, हमीरपुर और सहारनपुर जैसे जिलों में इनकी अच्छी संख्या है। यहां हार-जीत तय करने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। संजय निषाद ने कब-कब सरकार को घेरा, पढ़िए 2018 में सपा से गठबंधन किया था 2018 में निषाद पार्टी ने सपा से गठबंधन किया था। मंत्री के बेटे प्रवीण निषाद ने सपा के टिकट पर गोरखपुर उपचुनाव लड़ा था और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। हालांकि, अगले ही साल यानी 2019 में निषाद पार्टी भाजपा के साथ आ गई थी। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें- व्यापारी का बेटा बोला- मंत्री निषाद फोटो-वीडियो बनवाने आ रहे, पिता निषाद समाज की आवाज उठा रहे थे 'मेरे पिताजी निषाद समाज की आवाज उठा रहे थे। फेसबुक पर लोग जिस भाषा में बात करते थे, उसी भाषा में पापा जवाब देते थे। महंत राजू दास ने गाली दी, लेकिन उनका एनकाउंटर नहीं हुआ। उनके लोग नहीं मारे गए, लेकिन मेरे पापा की हत्या हो गई। संजय निषाद सिर्फ सोशल मीडिया पर अपना वीडियो बनवाने आ रहे हैं।' यह कहना है, गोंडा में मारे गए व्यापारी विनोद सहनी (निषाद) के बेटे राजा सहनी का। पढ़ें पूरी खबर
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