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    मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा! मुर्की गांव में 146 नाम कटे:वोटर आईडी का दुरुपयोग, स्थायी रूप से नाम कटने का आरोप

    6 hours ago

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    जौनपुर के केराकत क्षेत्र के मुर्की गांव में मतदाता सूची को लेकर सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुमैया बानो पत्नी मोहम्मद अफसर ने मंगलवार को निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को पत्रक सौंप कर आरोप लगाया कि उनके वोटर आईडी नंबर का दुरुपयोग कर किसी अज्ञात युवक ने उनके ग्राम पंचायत वोटर आईडी के भाग संख्या 138 और 139 पर कुल 146 मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित दिखा दिया। सुमैया ने पत्रक में लिखा कि उनका नाम निर्वाचन नामावली के भाग संख्या 139 व क्रम संख्या 103 पर अंकित है और इस तरह के कृत्य से उन्हें बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। फार्म-7 पर खुला बड़ा खेल मामला प्रकाश में आने के बाद भास्कर की टीम जब मुर्की गांव में पहुंची तो पता चला कि लोग प्राथमिक विद्यालय पर जमा होकर अपने नाम कटने का विरोध कर रहे थे। फार्म-7 के दस्तावेजों में ईपिक संख्या, मोबाइल नंबर और आवेदक का नाम अलग-अलग पाए गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि बीएलओ ने सोमवार को नाम कटने की जानकारी दी थी, जबकि फार्म की अभिस्वीकृति रसीद पर नियति तारीख 1 फरवरी अंकित थी। आवेदक पांचू राम ने की सीबीआई से जांच की मांग फार्म पर आवेदक पांचू राम ने बताया कि उनका नाम फॉर्म में कैसे आया, इसका उन्हें कोई पता नहीं है। फॉर्म पर नाम आने से उनकी छवि खराब हुई है। पांचू राम ने कहा कि सहयोग के लिए तैयार हैं और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से होने चाहिए। प्रधानाध्यापिका सविस्ता ने की निष्पक्ष जांच की अपील मुर्की प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सविस्ता ने बताया कि लेखपाल द्वारा 146 नामों की सूची बीएलओ को दी गई थी। सूची में उनके पिता आफताब का नाम भी कट गया। फॉर्म पर अंकित मोबाइल नंबर पर फोन करने पर संजय पाण्डेय ने कहा कि उनका नंबर गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। सविस्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की अपील की। संजय पाण्डेय ने समझाया फार्म-7 का मकसद फार्म पर अंकित मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर संजय पाण्डेय ने बताया कि बीएलए-1 के पास आपत्ति करने का अधिकार होता है। फॉर्म-7 में आपत्ति का मतलब है कि सूची की जांच और सत्यापन किया जाए। जिन नामों पर शक या संदेह होता है, उन्हें बीएलओ के माध्यम से जांच के लिए भेजा जाता है। फॉर्म-7 कब होता है इस्तेमाल फॉर्म-7 का उपयोग तब किया जाता है जब कोई मतदाता मृत हो गया हो, स्थायी रूप से निर्वाचन क्षेत्र छोड़ गया हो, किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक बार दर्ज हो, कोई व्यक्ति भारत का नागरिक न हो, या कोई स्वयं अपना नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहता हो।
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