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    मोदी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे:भारत ऐसा करने वाला दुनिया का 5वां देश; हरियाणा में जींद-सोनीपत के बीच चलेगी

    6 hours ago

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    देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे। इस रूट पर 89 किमी का सफर 2 घंटे में तय होगा। 10 कोच वाली यह ट्रेन इस रूट पर 14 स्टेशन के बीच मैक्सिमम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। किराया 5 से 25 रुपए के बीच होगा। इसके बाद पीएम जींद में रैली को संबोधित करेंगे। यहां वे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, दो मेडिकल कॉलेजों समेत 9 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही हाइड्रोजन फ्यूल से ट्रेन शुरू करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन जाएगा। फिलहाल जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही हाइड्रोजन ट्रेन चलती हैं। एक बार फ्यूल भरने के बाद ट्रेन 356 किमी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन में ₹112 करोड़ खर्च हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़े सवाल-जवाब, जो जानना जरूरी... सवाल: हाइड्रोजन ट्रेन के लिए जींद-सोनीपत रूट क्यों चुना? जवाबः इसकी 2 वजह हैं। पहली- इस रूट पर ट्रैफिक कम है। रोजाना 8 ट्रेनें चलती हैं। दूसरी- दिल्ली से नजदीक (जींद 145 किमी दूर) है। रेलवे निगरानी के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करना और पायलट ट्रायल करना आसान हुआ। यह नॉन इलेक्ट्रिफाइड वाला ब्रॉड-गेज मार्ग है । सवाल: हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है? जवाबः हाइड्रोजन ट्रेन को ऐसे समझिए, जैसे ट्रेन के अंदर ही एक छोटा-सा बिजलीघर लगा हो। इसमें हाइड्रोजन गैस से बिजली बनाई जाती है और उसी बिजली से ट्रेन चलती है। सवाल: एक किलो हाइड्रोजन से ट्रेन कितनी दूर चलती है? जवाब: भारतीय रेल ने अभी इसके आंकड़े जारी नहीं किए हैं। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ट्रेन रोजाना दो चक्कर लगाएगी, जिसमें 356 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी और अनुमानित 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत होगी। इस हिसाब से ट्रेन 1 किलो हाइड्रोजन में करीब 1.2 किमी सफर करेगी। सवाल: हाइड्रोजन कैसे बनती है? जवाब: पानी (H₂O) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है। जब पानी को बिजली के जरिए एक खास प्रोसेस से दो हिस्सों- हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। इस तरह हाइड्रोजन बनती है। सवाल: हाइड्रोजन कितने तरह की होती है, पहली ट्रेन किससे चलेगी? जवाब: हाइड्रोजन 3 तरह की होती हैं… सवाल: अगर हाइड्रोजन से कम बिजली वापस मिलती है, तो फिर इसका फायदा क्या है? जवाब: 100 यूनिट बिजली से बनी ग्रीन हाइड्रोजन बाद में 100 यूनिट बिजली वापस नहीं देती। कुछ ऊर्जा बनाने और दोबारा बिजली बनाने की प्रक्रिया में खर्च हो जाती है। इसलिए वैज्ञानिक हाइड्रोजन को ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि ऊर्जा को स्टोर करने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का माध्यम मानते हैं। मान लीजिए दिन में धूप या तेज हवा की वजह से सोलर और विंड प्लांट जरूरत से ज्यादा बिजली बना देते हैं। उस समय इतनी सारी बिजली का तुरंत इस्तेमाल करना या लंबे समय तक बैटरी में रखना आसान नहीं होता। ऐसे में उस अतिरिक्त बिजली से ग्रीन हाइड्रोजन बना ली जाती है। जरूरत पड़ने पर यही हाइड्रोजन फिर फ्यूल सेल में जाकर दोबारा बिजली बनाती है और उससे ट्रेन चलती है। सवाल: क्या भारत के अन्य रूटों पर भी ऐसी ट्रेनें चलेंगी? जवाब: हां, सरकार की "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" योजना के तहत देश के अलग-अलग ऐतिहासिक (हेरिटेज) और पहाड़ी रूटों पर ऐसी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है। माना जा रहा है कि जिन रूट्स पर बिजली की लाइन खींचना मुश्किल है, वहां ये ट्रेन कामयाब होगी। देश की पहली सीएनजी ट्रेन भी हरियाणा में चली थी देश की पहली सीएनजी (CNG) ट्रेन रेवाड़ी और रोहतक के बीच 13 जनवरी 2015 को चली थी। तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हरी झंडी दिखाई थी। यह ट्रेन एक डेमू (DEMU) ट्रेन थी, जो डीजल और सीएनजी दोनों ईंधनों पर चल सकती थी। अब इसे CNG की बजाय डीजल पर जलाया जा रहा है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… हाइड्रोजन ट्रेन चलाने पर धुआं नहीं, सिर्फ पानी निकलता है; क्या पेट्रोलियम-बिजली छोड़ हाइड्रोजन बनेगा अगला ईंधन इस चलाने के लिए न डीजल चाहिए, न बिजली। चलने पर न धुआं होगा, न राख; निकलेगा सिर्फ पानी। ये भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है। भारत का यह प्रयोग खास क्यों है? हाइड्रोजन गैस की कहानी क्या है और कभी एयरशिप को आग का गोला बना चुकी हाइड्रोजन क्या भविष्य का ईंधन बनेगी? पूरी खबर पढ़ें…
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