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    मिठाई कारोबारी फर्म को अधिवक्ता की फीस भुगतान का आदेश:अलीगढ़ में अधिवक्ता की फीस नहीं देने पर ख्यालीराम फर्म को कोर्ट ने ऑर्डर दिया

    2 hours ago

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    अलीगढ़ में अधिवक्ता की फीस दबाना मिठाई कारोबारी फर्म को भारी पड़ गया। वाणिज्य कर विभाग में फर्म के लंबित मुकदमों और अपीलों का निस्तारण कराने वाले अधिवक्ता ओमप्रकाश वार्ष्णेय को फीस नहीं मिली तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सिविल जज (कनिष्ठ श्रेणी), कोल की अदालत ने एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए फर्म ख्यालीराम कन्हैयालाल एंड संस को 76 हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। वकीली ने फर्म के खिलाफ धन वसूली का मुकदमा किया था गांधीनगर निवासी अधिवक्ता ओमप्रकाश वार्ष्णेय (77) ने वर्ष 2025 में फर्म के खिलाफ धन वसूली का मुकदमा दायर किया था। वाद के मुताबिक, फर्म ने उन्हें वाणिज्य कर विभाग में अपने लंबित मुकदमों और अपीलों की पैरवी के लिए नियुक्त किया था। अधिवक्ता ने अलग-अलग वर्षों के मामलों का निस्तारण कराया, जिसके एवज में 26 हजार रुपये फीस और खर्च बकाया था। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2017-18 में जीएसटी राज्य कर अधिनियम की धारा 73 के तहत निर्धारित कर, अर्थदंड और ब्याज से जुड़े मामले का भी निस्तारण कराया। करीब 7.54 लाख रुपये की इस देनदारी से जुड़े काम की फीस और खर्च सहित कुल बकाया रकम 76 हजार रुपये बताई गई। अधिवक्ता का आरोप था कि बार-बार मांगने के बावजूद फर्म ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद अपने अधिवक्ता राकेश कुमार कौशिक के माध्यम से 3 जुलाई 2025 को रजिस्टर्ड कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस 4 जुलाई को फर्म को मिल गया, लेकिन 15 दिन की मोहलत के बाद भी रकम नहीं चुकाई गई। फर्म की गैरहाजिरी में हुई एकपक्षीय सुनवाई मुकदमे की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी फर्म लगातार अदालत में अनुपस्थित रही। इस पर एकपक्षीय कार्यवाही की गई। अधिवक्ता ने अपने पक्ष में शपथ पत्र, रिकवरी रिपोर्ट, अपीलों के फैसलों की प्रमाणित प्रतियां, कानूनी नोटिस और डाक रसीद समेत दस्तावेज पेश किए। अदालत ने पाया कि वादी के साक्ष्य अखंडित और विश्वसनीय हैं। प्रतिवादी की ओर से न तो कोई जवाब दाखिल किया गया और न ही साक्ष्यों का खंडन किया गया। इस आधार पर वाद एकपक्षीय रूप से स्वीकार कर लिया गया। अदालत ने फर्म को निर्णय की तारीख से तीन महीने के भीतर 76 हजार रुपये और वाद दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। भुगतान नहीं होने पर अधिवक्ता न्यायालय के माध्यम से रकम वसूल सकेंगे। हालांकि, वाद-व्यय स्वयं वादी को ही वहन करना होगा।
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