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    मथुरा में खाली पड़ा केसी घाट, नहीं चल रहीं नावें:नगर निगम की गाइडलाइन से नाविक नाराज, बोले- 5000 सिर्फ रजिस्ट्रेशन का मांग रहे

    11 hours ago

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    वृंदावन में केशीघाट पर 10 अप्रैल को हुए हादसे के बाद नगर निगम ने कई जगहों पर सुरक्षा-चेतावनी बोर्ड लगा दिये हैं। नदी के किनारों पर लकड़ी के खम्भे गाढ़कर बैरीकेडिंग की गई है। ताकि यात्री नदी किनारे आते ही अलर्ट हो जाएं। साथ ही नगर निगम ने नाविकों को लाइव जैकेट भी बांटी हैं। लेकिन नदी में इस समय कोई नाव और स्टीमर नहीं चल रही है। इस पर नाविकों का कहना है कि नगर निगम बेताशा रजिस्ट्रेशन फीस ले रहा है। गाइडलाइन भी हमारे अनुरूप नहीं है। हम क्या करें नाव या स्टीमर चलाकर। हमें क्या मिलेगा…क्या बचेगा… दरअसल 38 पर्यटकों से भरा स्टीमर पांटून पुल से टकराने पर 16 पर्यटकों की मौत हो गई थी। इस हादसे की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा मानकों की अनदेखी थी। ऐसे में हादसे के 12 दिन बाद अब क्या बदलाव आए हैं? इतना बड़ा हादसा होने के बाद स्थिति बदली या नहीं। किन सुरक्षा मानकों का प्रयोग किया जा रहा है। क्या पर्यटक और नाविक लाइफ जैकेट का प्रयोग कर रहे हैं। यह हकीकत जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम उसी केशीघाट पर पहुंची, जहां हादसा हुआ था। देखें इस समय केशीघाट की तस्वीरें… जहां 450 स्टीमर चलती थी, अब एक भी नहीं चल रही केशीघाट पर हादसे के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। पहले जहां इस घाट पर 450 से 500 स्टीमर और बोटे चलती थीं। वहां एक भी स्टीमर और नाव नहीं चल रही है। यह घाट कभी पर्यटकों से भरा रहता था, वहां अब कुछ ही पर्यटक ही नजर आ रहे हैं। इनमें कुछ घाट पर घूम रहे हैं, तो वहीं इक्का-दुक्का यात्री यमुना में खड़ी नावों में सिर्फ फोटो खिचाने के लिए बैठे दिखाई दे रहे हैं। यमुना में जहां तक नजर गई, वहां तक सिर्फ खड़ी बोटें और स्टीमर ही नजर आए। रजिट्रेशन की वजह से नहीं चल रहीं स्टीमर यमुना में नावों का संचालन न होने पर नाविकों ने बताया- हादसे के बाद कुछ दिन तक तो मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए खुद ही हम लोगों ने नहीं चलाई थी। लेकिन अब नगर निगम के नए नियमों की वजह से नहीं चला रहे हैं। लाइसेंस शुल्क में की बेतहाशा वृद्धि केशीघाट पर मिले नाविक घनश्याम ने बताया कि मेरे पिता, फिर मेरे बाबा ने भी लाइसेंस बनाया था। जिसके लिए नगर पालिका 10 रूपये 6 महीने की फीस लेता था। 2018-19 में नगर निगम ने इसे बढ़ाकर 25 रुपए कर दिया था। लेकिन अब वो लोग एक साथ 6 महीने के 5 हजार रुपए छोटे स्टीमर के मांग रहे हैं। जबकि बड़े स्टीमर की रजिस्ट्रेशन फीस 10 हजार रुपए ले रहे हैं और चक्कू नावों की 1000 रुपए फीस ले रहे हैं। यह कहां तक उचित है। नगर निगम ने खुद 2018-19 के बाद किसी तरह के लाइसेंस नहीं बनाए हैं। निगम कहता था कि उनके बायलॉज में नहीं है। तो अब हम किससे क्या बात करें। नगर निगम को इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना है… नाविकों का कहना है कि जब तक नगर निगम सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं कर देगा, तब तक यही हाल रहेगा। सबसे पहला तो रजिस्ट्रेशन है ही। इसके बाद जब नावें चलेंगी, तो लाइव जैकेट, चाइनीज बोर्ड और यमुना में बैरीकेडिंग समेत तमाम व्यवस्थाओं को सुचारू कराना है। जब नावें या स्टीमर चल ही नहीं रहे हैं तो पुलिस भी तैनात नहीं है। यात्री दूर से परिसर को घूमकर चले जाते हैं। गाइड लाइन से नहीं है सहमत नाविकों ने बताया नगर निगम ने जो गाइड लाइन जारी की है उसको बनाने से पहले एक बार नाविकों से भी चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गाइड लाइन में कहा है कि वही नाविक नाव चलाएगा जिसके नाम लाइसेंस है। इस पर घनश्याम कहते हैं कि अगर हम कहीं किसी काम से बाहर चले जाए और मेरे परिवार का सदस्य नाव चलाना जानता है तो क्या वह नाव नहीं चलाएगा। दूसरी बात ये लोग क्षमता को लेकर कह रहे हैं कि सिर्फ 10 सवारी बिठाएंगे। हमारी नावों की क्षमता 20 से 25 है तो कम से कम 15 सवारी तो बैठने दीजिए। ऐसा करेंगे तो हमारी कमाई ही क्या निकलेगी। गाइड लाइन से सहमत नहीं है नाविकों ने बताया नगर निगम ने जो गाइड लाइन जारी की है, उसको बनाने से पहले एक बार नाविकों से भी चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गाइड लाइन में कहा है कि वही नाविक नाव चलाएगा, जिसके नाम लाइसेंस है। इस पर घनश्याम कहते हैं कि अगर वह कहीं किसी काम से बाहर चला जाए और उसके परिवार का सदस्य नाव चलाना जानता है तो क्या वह नाव नहीं चलाएगा। दूसरा क्षमता को लेकर वह कह रहे हैं 10 सवारी बिठाएंगे। हमारी नावों की क्षमता 20 से 25 है कम से कम 15 सवारी तो बैठने दीजिए। कुछ लोगों को मिली लाइफ जैकेट हादसे के समय सबसे बड़ा मुद्दा उठा था लाइफ जैकेट का। इस पर जब हमने नाविकों से पूछा कि क्या आप लोगों को लाइफ जैकेट मिली है? तो उन्होंने कहा- कुछ लोगों को मिली है सभी को नहीं दी गई। प्रशासन ने मथुरा, वृंदावन और गोकुल में करीब एक हफ्ते पहले 425 लाइफ़ जैकेट वितरित कराई थी। हालांकि नावों का संचालन न होने से अभी वितरण रुका हुआ है। यमुना में लगाए बोर्ड, एक जगह दिखी बेरीकेडिंग केशीघाट से पांटून पुल की तरफ एक-दो जगहों पर बोर्ड लगे नजर आए। जिस पर लिखा था- आगे गहरा पानी है कृपया यमुना नदी में अधिक अंदर न जाएं। इसके साथ एक जगह करीब 25 से 30 मीटर में यमुना में बल्लियों से की गई बेरीकेडिंग भी नजर आई। जहां कुछ श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। यहां से आगे एक खंभे पर और बोर्ड लगा था जिस पर नाविकों के लिए जारी की गई गाइड लाइन लिखी थी। जिसमें 17 पॉइंट लिखे गए थे। नगर निगम भरा रहा फॉर्म यमुना के घाटों पर रियल्टी टेस्ट करने के दौरान हमारी टीम को निगम के एक कर्मचारी नजर आए। उनके आसपास कई नाविक खड़े थे। वहां जाकर देखा तो पता चला कि नाविकों के लिए रजिस्ट्रेशन के फॉर्म वितरित किए जा रहे थे। 3 पेज के इस फॉर्म पर सबसे ऊपर लिखा था नगर निगम मथुरा वृंदावन। उसके नीचे लाइन में लिखा था नाव पंजीकरण हेतु आवेदन पत्र। यह फॉर्म नाविक को खुद भरना था। कर्मचारी ने बताया वह फॉर्म वितरित कर रहे हैं यह जमा शुल्क के साथ किए जाएंगे। मिला जुला दिखा बदलाव हादसे के बाद जिस तरह दावे किए गए थे, वह 12 दिन बाद मिले-जुले नजर आए। नगर निगम ने बोर्ड लगाए हैं, कुछ जगह बेरीकेडिंग की है। लेकिन घाट पर कहीं कैमरे नजर नहीं आए। जो लगे थे वह घाट पर बने मंदिरों की देखभाल करने वालों ने निजी लगवा रखे थे। इसके अलावा कोई निगम कर्मी रोक टोक के लिए भी नजर नहीं आया। यानि रियल्टी टेस्ट में कहीं कुछ काम नजर आए, तो कहीं वह सब नहीं था जिसका अधिकारी दावा कर रहे थे।
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