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    मथुरा में योगी बोले- सनातन के राजा राम हैं:संभल दंगें में सैकड़ों हिंदू मारे गए, सपा ने केस वापस लिए

    7 hours ago

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    संत मलूकदास की आज 452वीं जयंती है। इस मौके पर वृंदावन के मलूक पीठ में जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे। मंच पर आश्रम के महंत राजेंद्र दास ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें श्रीनाथ जी की छवि भेंट की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद संतों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा- भारत के सनातन राजा राम हैं, और कोई नहीं। साल 1526 में संभल में हरिहर मंदिर को बाबर के अनुयायियों ने तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ और 19 कूप थे। साल 1976 और 1978 में दंगे हुए, जिनमें सैकड़ों हिंदू मारे गए। बाद में सपा सरकार में मुकदमे वापस करा दिए गए। अब वहां सड़क बन रही है, धर्मशाला बन रही है और परिक्रमा भी शुरू हो रही है। इससे पहले दोपहर संत मलूकदास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत भी पहुंचे थे। सीएम योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर करीब 4:15 वृंदावन के पवनहंस हेलीपैड पर उतरा। यहां से मुख्यमंत्री सीधे मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती महोत्सव में शामिल होने पहुंचे। सीएम योगी के आने से पहले मथुरा में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। इससे उनके कार्यक्रम के टेंट उड़ गए। सीएम योगी के पहुंचने पर डीएम-एसपी नंगे पांव दौड़ते हुए नजर आए। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हेलीकॉप्टर से आगरा के लिए रवाना हो गए। देखिए 4 तस्वीरें…. अब पढ़िए सीएम योगी की 5 बड़ी बातें... संत रामानंदाचार्य ने अलग-अलग महापुरुषों को संत बनाया सीएम योगी ने कहा- संत रामानंदाचार्य ने अलग-अलग जातियों से जुड़े महापुरुषों को संत बनाया। संत रैदास और संत कबीर भी उनके ही शिष्य थे। उसी परंपरा की 22वीं पीढ़ी में जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज का आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है। यह हमारी परंपरा है, जिसने भारत के बारे में सोचा है सिर्फ अपने पंथ या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि सनातन और राष्ट्र के लिए विचार किया है। जब संत एक मंच पर आते हैं और एक स्वर में बोलते हैं, तब 500 सालों का अयोध्या का कलंक मिटकर दूर होता है। यही एकता की शक्ति है। भारत के सनातन राजा राम हैं सीएम योगी ने कहा- भारत के सनातन राजा राम हैं और कोई नहीं। जो लोग कहते हैं कि तुलसीदास गरीब ब्राह्मण थे, उनसे बड़ा कौन हो सकता है? उन्होंने उस समय के सबसे बड़े बादशाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और कहा था कि वे किसी बादशाह को नहीं जानते, केवल एक ही बादशाह को जानते हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े हैं-वे हैं राम। रामलीला में जाति का कोई भेद नहीं होता सीएम योगी ने कहा- अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर भारत के गांव-गांव में देर शाम से लेकर देर रात तक रामलीला का आयोजन होता है। रामलीला के लिए सरकार सहयोग नहीं करती, बल्कि गांव के लोग ही चंदा इकट्ठा करते हैं। वहीं के लोग पात्र बनते हैं। वहां जाति या पंथ का कोई भेद नहीं होता, सभी लोग एकजुट होकर इसे देखते और सुनते हैं। इस परंपरा की शुरुआत मध्यकाल में संत तुलसीदास ने की थी। विकास के साथ विरासत को भी आगे बढ़ा रहा सीएम योगी ने कहा- विकास तभी सार्थक है, जब विरासत भी सुरक्षित रहे। इसी वजह से दोनों काम साथ-साथ चल रहे हैं। आपने काशी में देखा होगा कि काशी विश्वनाथ धाम कितना भव्य और दिव्य बन गया है। पहले जब कोई सनातन धर्मावलंबी काशी आता था, तो उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। साल 1916 में जब महात्मा गांधी काशी पहुंचे और संकरी गलियों व गंदगी को देखा, तो उन्होंने कहा था कि यदि यहां कोई जीव गिर जाए तो क्या कहेगा। 2017 में जब मुझे काशी में दर्शन का अवसर मिला, तो उस समय 50 लोग भी एक साथ नहीं जा सकते थे, लेकिन आज 50 हजार लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं। यह डबल इंजन सरकार का प्रयास है और यही विकास की गति है, जिसे हम प्रगति की ओर ले जा रहे हैं। संभल में हरिहर मंदिर को बाबर के अनुयायियों ने तोड़ा था सीएम योगी ने कहा- सनातन धर्म से बड़ा कोई नहीं हो सकता। अयोध्या में हमने राम जन्मभूमि को मुक्त होते देखा है और भव्य प्राण-प्रतिष्ठा का साक्षी बने हैं। साल 2026 चल रहा है। साल 1526 में संभल में हरिहर मंदिर को बाबर के अनुयायियों ने तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ और 19 कूप थे। साल 1976 और 1978 में दंगे हुए, जिनमें सैकड़ों हिंदू मारे गए। बाद में सपा सरकार में मुकदमे वापस करा दिए गए। अब वहां सड़क बन रही है, धर्मशाला बन रही है और परिक्रमा भी शुरू हो रही है। 1528 में बाबर के सिपहसालार ने राम मंदिर को तोड़ा था। 500 साल पूरे होने से पहले ही हमने उसे वापस लिया। 2017 के पहले अयोध्या में 3 घंटे बिजली रहती थी अयोध्या में भी पहले 2017 से पहले तीन घंटे बिजली मिलती थी। संकरी गलियां थीं और दुर्घटना का डर बना रहता था। आज अयोध्या जाएं तो वहां का स्वरूप त्रेता युग की याद दिलाता है। यह संतों की साधना और संघर्ष का परिणाम है। अगर संतों की एकता में इतनी ताकत है, तो पूरा सनातन समाज एकजुट होकर किसी भी विधर्मी या हिंदू विरोधी षड्यंत्र को सफल नहीं होने देगा। इस यात्रा को रुकने नहीं देना है, बल्कि इसे निरंतर आगे बढ़ाते रहना है। -------- ये खबर भी पढ़ें- भागवत बोले- संघ डंडा लेकर दरवाजे पर खड़ा रहेगा:संत भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए काम करें; वृंदावन में संत के पैर छुए संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पढ़िए पूरी खबर…
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