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    मेयर की बाउंड्री टूटकर लगा बोर्ड-'ये सरकारी भूमि है':मुरादाबाद में 10 बीघा सरकारी भूमि पर बना रखी थी बाउंड्री

    16 hours ago

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    मुरादाबाद में हाईवे किनारे जिस जमीन पर भाजपा के महापौर विनोद अग्रवाल ने बाउंड्री बनाकर कब्जा कर रखा था, वहां अब सरकारी भूमि का बोर्ड लगा दिया गया है। ये बोर्ड डीएम की ओर से लगाया गया है। जिस पर मोटे अक्षरों में लिखा है- ‘ये सरकारी भूमि है।’ बता दें कि करीब 2 महीने पहले प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मेयर की बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद जमीन को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया था। डीएम ने यह भूमि सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट- मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के लिए आरक्षित की है। जिलाधिकारी की ओर से इस भूमि का आवंटन बेसिक शिक्षा विभाग को किया जा चुका है। यहां सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण के लिए मिट्टी की जांच की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। निवर्तमान जिलाधिकारी अनुज सिंह के तबादले से 2 दिन पहले यहां सरकारी भूमि का बोर्ड लगा दिया गया है। जिस पर प्रोजेक्ट का पूरा विवरण भी दर्ज है। मेयर की बाउंड्री तोड़कर खाली कराई गई भूमि पर जिलाधिकारी मुरादाबाद के आदेश पर लगाए गए सरकारी बोर्ड पर लिखा है- यह भूमि गाटा संख्या 1086/3,1087/1,एवं 1088 कुल क्षेत्रफल 1.9870 हेक्टेयर है। मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय मुरादाबाद की शासकीय भूमि है। यदि इस भूमि पर कोई अतिक्रमण / अवरोध करता है तो उसके विरुद्ध सुसंगत धाराओं में विधिक कार्रवाई की जाएगी। 2 महीने पहले IAS राममोहन मीणा ने ध्वस्त कराई थी बाउंड्री मुरादाबाद में प्रशासन ने करीब 2 महीना पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए BJP के मेयर विनोद अग्रवाल की हाईवे किनारे स्थित करीब 10 बीघा जमीन की बाउंड्री बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दी थी। मेयर की बाउंड्री सरकारी भूमि पर बनी थी। जिसे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के लिए आरक्षित किया गया है। बावजूद इसके इस जमीन पर भाजपा के मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता ऋषिपाल चौधरी के भाई अमित चौधरी ने बाउंड्री बनाकर कब्जा कर लिया था। मेयर का शुरु से इस मामले में ये दावा रहा है कि यह जमीन उन्होंने 10 साल पहले आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदी थी। इसे लेकर मेयर ने मुरादाबाद के कमिश्नर से लेकर शासन तक तमाम शिकायतें भी की थीं। मेयर की शिकायत पर निर्वतमान डीएम अनुज सिंह ने अपनी मौजूदगी में दोबारा जमीन की पैमाइश कराई थी। जिसमें ये पाया गया था कि वास्तव में मेयर और भाजपा नेता अमित चौधरी ने जिस जमीन पर बाउंड्री बना रखी थी, वह सरकारी जमीन ही है। DM का ट्रांसफर होते ही काफिले के साथ पहुंचा हाजी चांद बाबू डीएम अनुज सिंह का ट्रांसफर होते ही हाजी चांद बाबू ने फिर से मौके पर पहुंचकर इस जमीन की नापजोख शुरू करा दी। रविवार रात को डीएम के ट्रांसफर का ऑर्डर आया और मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हाजी चांद बाबू तीन गाड़ियों के काफिले के साथ इस जमीन पर पहुंच गया। इनमें से काले रंग की एक कार पर भाजपा का झंडा भी लगा था। बता दें कि हाजी चांद बाबू विवादित जमीनों के सौदे और उनकी खरीद फरोख्त के लिए बदनाम है। UPPCL के प्रोजेक्ट मैनेजर पहुंचे तो स्कूल की जगह मेयर की बाउंड्री बनी थी मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के लिए नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे धीमरी गांव के रकबे में (पुराने बंद हो चुके टोल प्लाजा के पास) करीब 6 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। इस स्कूल के निर्माण का जिम्मा यूपीपीसीएल (उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) को दिया गया है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर स्कूल के निर्माण के लिए चिन्हित की गई जमीन ढूंढते हुए मौके पर पहुंचे तो पता चला कि जिस सरकारी जमीन पर स्कूल का निर्माण होना है, उस पर कुछ भाजपा नेताओं ने कब्जा करके बाउंड्री बना ली हैं। जब कब्जा करने वालों के नाम तलाशे गए तो पता चला कि इस जमीन का बैनामा कराने वालों में मेयर विनोद अग्रवाल, उनका पार्टनर संजय रस्तोगी और खुद को प्रदेश के एक कद्दावर भाजपा नेता का करीबी बताने वाला अमित चौधरी शामिल है। इसकी जानकारी तुरंत जिला प्रशासन को दी गई। इसके बाद तहसील से रेवेन्यू की एक टीम मौके पर पहुंची। इनके साथ यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर भी थे। इसके बाद मेयर और अन्य के निर्माणों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया था। जंगल में मेयर की जमीन तक निगम के खजाने से बनी सड़क, JE ने दी झूठी रिपोर्ट शहर में लोग नाली खड़ंजे को तरस रहे हैं और मेयर विनोद अग्रवाल ने नगर निगम के खजाने से अपनी 10 बीघा जमीन तक जंगल में सड़क बनवा ली। नेशनल हाईवे बाईपास पर पुराने टोल प्लाजा के पास हाईवे किनारे जहां मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी की जमीन जंगल में है। इसके आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है। जमीन के चारों और सरकारी लैंड है। आगे गांगन नदी का रकबा है। लेकिन मेयर और भाजपा नेता की जमीन की वैल्यू बढ़ाने और इन तक अप्रोच रोड बनाने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने झूठ बोलकर यहां सड़क बनाई। 20 मई 2022 को दी अपनी रिपोर्ट में नगर निगम के अवर अभियंता ने लिखा- स्थलीय निरीक्षण करने पर पाया गया कि मौके पर कच्ची सड़क है। जिसकी वजह से जलभराव हो रहा है। इसके कारण क्षेत्रवाासियों को आवागमन में असुविधा हो रही है। इसलिए इस सड़क का निर्माण जनहित में आवश्यक है। दस्तावेज बताते हैं, खुद मेयर ने दी सड़क को मंजूरी नगर निगम के एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज बताते हैं कि, जंगल में अपनी जमीन तक सड़क बनाने के लिए प्रोजेक्ट को खुद मेयर विनोद अग्रवाल ने मंजूरी दी थी। इस सड़क का निर्माण 15वें वित्त आयोग की निधि से किया गया। जिसके अध्यक्ष खुद मेयर हैं। महापौर विनोद अग्रवाल की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को नगर निगम द्वारा 15वां वित्त आयोग निधि के लिए एक बैठक हुई। इसमें बुनियादी ग्रांट की दूसरी किश्त के प्रस्तावित कार्यों का अनुमोदन किया गया। इसमें सीरियल नंबर 12 पर मेयर की जमीन तक बनने वाली सड़क भी है। कार्य के उल्लेख में लिखा गया- पुराने टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे बाईपास से अमित चौधरी की फैक्ट्री तक हॉटमिक्स द्वारा सड़क का सुधार कार्य। बता दें कि नगर निगम के खजाने से बनी इस सड़क के एक ओर भाजपा मेयर अग्रवाल ने करीब 10 बीघा जमीन पर और दूसरी ओर भाजपा नेता अमित चौधरी ने करीब 22 बीघा जमीन पर बाउंड्री रखी थी। दस्तावेजों में कोई चकमार्ग तक नहीं, निगम ने कच्ची सड़क का झूठ बोला सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि जिस जमीन पर नगर निगम ने सड़क डाली वहां कोई चकमार्ग तक नहीं था। रिकॉर्ड में यह पूरा सरकारी जमीन का पैच है। जिसके बीच में नगर निगम ने सड़क डाल दी। अब यहां स्कूल प्रस्तावित है और बीच की सड़क को डिमोलिश करके पूरे लैंड पैच को एक ही बाउंड्री में लिया जाएगा। मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने झूठ पर झूठ बोला। मेयर ने कहा था-प्रशासन मेरी छवि खराब कर रहा मुरादाबाद में अपनी बाउंड्री पर प्रशासन का बुलडोजर चलने के बाद महापौर विनोद अग्रवाल ने आहत मन से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को खत लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि मैं बीते 40 सालों से संघ और भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं। जिस तरह की कार्रवाई मेरे पर की गई है, उसको लेकर आगामी विधानसभा चुनावों में हम किस तरह से कार्यकर्ताओं के बीच जाएंगे और उनका मनोबल बढ़ाएंगे। मैं आपको ये खत इस आशा और विश्वास के साथ लिख रहा हूं कि आप भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के मान सम्मान की रक्षा के लिए जो भी उचित हो वो कार्यवाही सुनिश्चित कराएं। बता दें कि 12 मार्च को मुरादाबाद सदर तहसील प्रशासन ने नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे करीब 20 बीघा सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया था। प्रशासन का कहना था कि भूमि सरकारी है और यहां ‘CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ बनाया जाना है। लेकिन मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता ऋषिपाल चौधरी के छोटे भाई अमित चौधरी ने इस जमीन की बाउंड्री करा रखी थी। जिसे 12 मार्च को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया था। मेयर का दावा है कि यह जमीन सरकारी नहीं बल्कि उनकी है, जिसे उन्होंने 2017 में आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदा था। मुरादाबाद के अफसरों पर यकीन नहीं, दूसरे जिले से कराएं पैमाइश मेयर ने अपर मुख्य सचिव को भी इस मामले में एक शिकायती पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि आईएएस राममोहन मीणा का कृत्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से अवैध बुलडोजर कार्रवाई के संबंध में दिए गए आज्ञापक दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश उत्तर प्रदेश शासन ने अनुपालन के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्रेषित किया है। अतिक्रमण हटाने के लिए न्यूनतम 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। इस नोटिस की प्रति जिलाधिकारी की ओर से इस कार्य के लिए बनाई गई ई-मेल आईडी पर भेजने के भी निर्देश हैं। ACS संजय प्रसाद को भेजे खत में मेयर विनोद अग्रवाल आगे लिखते हैं- श्रीमान जी मेरी भूमि की पैमाइश किसी अन्य जिले के उपजिलाधिकारी द्वारा कराई जाए ताकि जांच निष्पक्ष एवं सही हो सके। मुझे मुरादाबाद सदर के एसडीएम व लेखपाल के कार्यों पर संदेह है और इनसे उचित न्याय की अपेक्षा नहीं है। कृपया विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्यवाही करने की कृपा करें। इनके द्वारा महानगर के निर्वाचित प्रथम नागरिक महापौर की छवि को धूमिल करने की नियत से ये गलत कृत्य किया गया है। आगे भी गलत करने का प्रयास कर रहे हैं। मेयर यहां नगर निगम से म्यूजिकल पार्क बनवाना चाहते थे नगर निगम के सोर्सेज का कहना है कि, जहां मेयर की बाउंड्री वाल पर बुलडोजर चला है, वहां मेयर की योजना नगर निगम से म्यूजिकल पार्क बनवाने की थी। मेयर विनोद अग्रवाल ने भी इसकी पुष्टि की है। दरअसल पिछले कुछ समय में सत्ताधारी दल के नेताओं पर ये आरोप लगे हैं कि वे विकास की योजनाओं को अपनी जमीनों के आसपास ले जाकर अपनी जमीनों के रेट बढ़ाने की कवायद में जुटे हैं। इसके अलावा योजनाओं के आसपास की जमीनें खरीदकर उन्हें योजना के लिए अधिग्रहीत कराने का खेल भी बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है।
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