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    मायावती के इकलौते विधायक पर RAID से नई सियासत शुरू:योगी सरकार के मंत्री ने विरोध किया, कई अफसरों की पोल खुल सकती है

    2 hours ago

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    बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर इनकम टैक्स की छापेमारी से यूपी में नई सियासत शुरू हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और उमाशंकर सिंह के समधी दिनेश प्रताप सिंह ने छापेमारी को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। यूपी की सियासत में बीते तीन सालों से उमाशंकर सिंह सबसे ताकतवर विधायक माने जाते हैं। बसपा के विधायक होने के बाद भी सत्ता और शासन में उनका दबदबा किसी कैबिनेट मंत्री से कम नहीं है। खासतौर पर PWD (लोक निर्माण विभाग) और खनन महकमें उनकी हनक है। सरकार भले ही भाजपा की हो, लेकिन दोनों विभागों में उनका भौकाल किसी से छिपा नहीं है। कहा जा रहा है कि छापेमारी के बाद कई अफसरों की पोल खुल सकती है। उनकी सियासी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की विधानसभा में एक ब्रिज का उद्घाटन करा दिया, दयाशंकर सिंह ने आपत्ति उठाई तो उन्हें बाहरी करार दे दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे के दौरान एकाएक उनके ठिकानों पर आयकर के छापों ने न केवल राजनीतिक हलचल मचा दी, बल्कि सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एकाएक उमाशंकर पर छापामार कार्रवाई करनी पड़ी। मायावती खुलकर सामने आईं राजनीतिक विश्लेषक आनंद राय मानते हैं, यह पहला मौका है जब मायावती खुलकर बचाव में आई हैं। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा, ‘उमाशंकर सिंह जबसे BSP में आए हैं, उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से जिम्मेदारी निभाई है, आज तक इनके क्षेत्र से इनके बारे में किसी भी प्रकार की अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने या अन्य कोई गलत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।’ अखिलेश ने भी बचाव किया सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उमाशंकर पर कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा, सवाल यह नहीं कि उमाशंकर बसपा के एकलौते विधायक हैं, उन पर छापा पड़ा है। भाजपा का कोई है तो उस पर छापा नहीं पड़ता है, भाजपा को खुश कर दो छापा नहीं पड़ेगा। छापेमारी की टाइमिंग को लेकर खड़े हुए सवाल उमाशंकर सिंह के खिलाफ इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, ‘आईटी वालों को नाम कौन बताता है, उनके यहां छापा इसलिए पड़ा है कि कुछ लोग जापान गए हैं। अगर वे जापान नहीं गए होते तो छापा नहीं पड़ता, क्योंकि पुलिस को पता लग जाता पुलिस लीक कर देती। सरकार के लोग जापान चले गए इसलिए छापा पड़ गया।’ उन्होंने यहां तक कहा कि भाजपा किसी की सगी नहीं है। भाजपा, भाजपा वालों की सगी नहीं है। मंत्री दिनेश प्रताप के समधी हैं उमाशंकर सिंह प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह और बलिया के रसड़ा से बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह आपस में रिश्तेदार हैं। दिनेश प्रताप सिंह की बेटी का विवाह उमाशंकर सिंह के बेटे से हुआ है। दिनेश कांग्रेस से MLC रहे, उमाशंकर 2012 में पहली बार विधायक बने योगी सरकार के करीबी हैं उमाशंकर जानकार मानते हैं कि बसपा विधायक उमाशंकर सिंह प्रदेश सरकार के काफी करीबी हैं। सरकार के कई बड़े अधिकारियों से उनके पारिवारिक संबंध हैं। भाजपा सरकार में भी PWD और खनन महकमें में उनका दबदबा है। बीते दिनों PWD में उमाशंकर सिंह की फर्म को सैकड़ों करोड़ के टेंडर देने के लिए टेंडर के रिडाइजन किया गया था, लेकिन मामला मीडिया में आने के बाद टेंडर रद्द कर दिया गया। खनन महकमे में भी उमाशंकर सिंह की फर्मों को बड़ी बड़ी खदानें आवंटित करने, खदानों में अवैध खनन और परिवहन होने के बाद कार्रवाई नहीं होने के मामले भी सामने आए। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के विधानसभा क्षेत्र बलिया सदर में उमाशंकर सिंह की फर्म ने जो ब्रिज बनाया, उसका उद्घाटन करने को लेकर भी दोनों के बीच विवाद हुआ। उस दौरान सामने आया था कि बलिया और उसके आसपास के जिलों में पीडब्ल्यूडी में उमाशंकर के करीबी इंजीनियर ही पोस्टिंग पाते हैं। भाजपा के साथ खड़े रहे उमाशंकर बसपा विधायक उमाशंकर सिंह सदन से सड़क तक हमेशा भाजपा के साथ खड़े दिखते हैं। राज्यसभा चुनाव 2024 में उमाशंकर सिंह ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। उसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मूर्मू और उप राष्ट्रपति चुनाव में सीबी बालाकृष्णन के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद भी उमाशंकर सिंह पर आयकर महकमे की रेड ने राजनीतिक जगत में चर्चा शुरू कर दी है कि एनडीए के साथ खड़े रहने के बाद भी उमाशंकर के खिलाफ आयकर महकमे की कार्रवाई क्यों हुई। छापे के पीछे की राजनीतिक वजह उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर के छापों के बाद अब शासन एवं सत्ता के गलियारों में कार्रवाई के पीछे की राजनीतिक वजह तलाशी जा रही है। उमाशंकर सिंह बसपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में बड़ी आर्थिक मदद भी करते हैं। बीते दिनों यूपी में बड़ी राजनीतिक हलचल में एकाएक बसपा सुप्रीमो मायावती सक्रिय हुई हैं। वह सोशल मीडिया पर लगातार भाजपा पर हमलावर हैं, भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक पर उनकी नजर भी है। जानकार मानते हैं कि उमाशंकर सिंह के यहां छापों से ऐसे कागज भी जुटाने का प्रयास हो सकता है, जिससे उनके किन-किन राजनेताओं से आर्थिक संबंध हैं, इसका पता लगाया जा सके। गैलेंट समूह पर भी पड़े थे छापे गोरखपुर का गैलेंट समूह यूपी में सैंकड़ों करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है। गैलेंट समूह के संचालक गोरखपुर से होने के कारण सीएम योगी से काफी पहले से जुड़े हैं। 2023 में गैलेंट समूह पर आयकर और ED की कार्रवाई हुई थी। अखिलेश यादव ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में गैलेंट पर कार्रवाई को लेकर भी तंज कसा था। दिनेश प्रताप की बयानबाजी पर पार्टी सख्त बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के मंत्री और उमाशंकर सिंह के समधी दिनेश प्रताप सिंह ने जिस तरह बयान दिए हैं, उससे केंद्र की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दिनेश प्रताप के बयान के बाद लखनऊ से दिल्ली तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके बयानों को आपत्तिजनक बताया है। आनंद राय का कहना है कि उमाशंकर सिंह राजनीति में संबंधों का निर्वहन करते हैं, लोगों की मदद करते हैं। लेकिन इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। राजनीति में उनके विरोधी भी हैं जो ठेके पट्‌टों को लेकर शिकायत करते रहे हैं। वहीं सभी दलों में उनके समर्थक भी हैं। वहीं, इस पूरे प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह भी कहते हैं कि ED ने छापे मारे हैं, तो कोई न कोई साक्ष्य जरूर मिले होंगे। उमाशंकर सिंह बसपा से तीन बार के विधायक हैं। वे प्रभावशाली विधायक भी हैं। कोई भी संस्था तब तक हाथ नहीं डालेगी, जब तक साक्ष्य न हो। मेरा तो मानना है कि ये चुनावी वर्ष है। उमाशंकर सिंह बीएसपी के एकमात्र विधायक हैं। उनके कंधे से सदन में बीएसपी की पहचान है। उन पर प्रहार करने का मतलब बीएसपी पर भी दबाव डालना है। …………. ये खबर भी पढ़ें… बसपा विधायक के घर से 11 करोड़ कैश मिला:महंगी घड़ियां-जेवर बरामद, 1000 करोड़ टैक्स चोरी में दूसरे दिन भी RAID बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग (IT) की छापेमारी दूसरे दिन भी जारी है। सोनभद्र, कौशांबी और बलिया में कार्रवाई चल रही है, जबकि लखनऊ के आवास पर छापेमारी खत्म हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, यहां से टीम को करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए कैश मिले हैं। इसके अलावा महंगी घड़ियां, सोना-चांदी और कीमती जेवर भी बरामद हुए हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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