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    Mehbooba Mufti ने Eid पर Palestine, Lebanon और Iran के लिए की दुआ, खाड़ी पर तेहरान के हमले को किया अनदेखा

    3 hours from now

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    जम्मू-कश्मीर में ईद पर जबरदस्त राजनीति देखने को मिली। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ईद की मिठास में कड़वाहट घोलने का पूरा पूरा प्रयास किया और इस अवसर पर राजनीतिक बखेड़ा खड़ा करते हुए फिलस्तीन, लेबनान और ईरान के लोगों के लिए दुआ की लेकिन महबूबा को उन लोगों का दर्द नजर नहीं आया जो खाड़ी में ईरानी हमलों से प्रभावित हुए हैं। महबूबा को उन भारतीयों का भी दर्द नजर नहीं आया जो खाड़ी में संकट के दौरान मारे गये या घायल हो गये।हम आपको यह भी बता दें कि कश्मीर की सड़कों पर आज भी ईरान के मारे गये सर्वोच्च नेता खामेनई के समर्थन में नारे लगे। वह नारेबाजी देखकर निश्चित ही आपके मन में भी यही सवाल उठेगा कि भारत विरोधी रहे खामेनेई के लिए कश्मीर की सड़कों पर क्यों मातम मनाया जा रहा है? क्यों यहां का माहौल बिगाड़ने के प्रयास चल रहे हैं?इसे भी पढ़ें: Kashmir में छाया बसंत का जादू, Asia का सबसे बड़ा Tulip Garden पर्यटकों के लिए खुला, बड़ी संख्या में उमड़ रहे सैलानीदूसरी ओर, कश्मीर में ईद-उल-फितर पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। डल झील के किनारे स्थित हजरतबल दरगाह में उमड़े मुस्लिमों ने नमाज अदा की और गले मिलकर एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। हालांकि, अधिकारियों ने श्रीनगर शहर में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी। हजरतबल में 50 हजार से अधिक अकीदतमंदों ने सजदे में सिर झुकाया, यह कश्मीर में ईद की सबसे बड़ी सामूहिक नमाज़ रही। श्रीनगर शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित जामा मस्जिद के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि यहां नमाज के लिए लोगों की भीड़ न जुट सके। अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने पूर्व में घोषणा की थी कि ईद की नमाज जामा मस्जिद में अदा की जाएगी और अधिकारियों से इस कोई प्रतिबंध न लगाने का आग्रह किया था।दूसरी ओर, कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “लगातार सातवें वर्ष भी पाबंदियों और नजरबंदियों के साये में जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक कायम है। खुशियों और इबादत का यह दिन मुसलमानों के लिए गम और वंचना में बदल गया है।’’ उन्होंने कहा, “यह हमारे दौर की कैसी विडंबना है कि जो लोग हमारी मस्जिदों और ईदगाहों के दरवाजों पर ताले जड़ते हैं, वही सबसे पहले हमें ‘ईद मुबारक’ कहने पहुंच जाते हैं!’’ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस बात पर अफसोस जताया कि जामा मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने की इजाजत नहीं दी गई।
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