Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    MGNREGA का बदला नाम, बदला काम? Congress ने VB G RAM G एक्ट को बताया 'अधिकारों का हनन'

    15 hours ago

    1

    0

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट' की आलोचना करते हुए इसे रोज़गार अधिकार की चोरी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसने MGNREGA की जगह एक ऐसी अत्यधिक केंद्रीकृत योजना ले ली है, जिससे राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का एक लेख शेयर करते हुए रमेश ने कहा कि इस नए कानून ने उस योजना की जगह ले ली है, जो ग्रामीण परिवारों को काम का कानूनी अधिकार देती थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार द्वारा शुरू किए गए दो दशक पुराने 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (MGNREGA) की जगह, 1 जुलाई को पूरे देश में VB G RAM G अधिनियम लागू हो गया। एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि भारत के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक और J&K के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने 'VB G RAM G' की सच्चाई को उजागर करते हुए एक बहुत ही तीखा लेख लिखा है। इस नए कानून को क्रांतिकारी MGNREGA की जगह जबरदस्ती लागू किया गया है। इसे भी पढ़ें: Sharad Pawar का अगला सियासी दांव क्या? पार्टी बचाने की मजबूरी या NDA के साथ जाने की तैयारी?उन्होंने आगे कहा कि VB G RAM G असल में 'रोज़गार के अधिकार' की चोरी है। यह काम करने के संवैधानिक अधिकार की जगह एक ऐसी बहुत ज़्यादा सेंट्रलाइज़्ड स्कीम ले आती है, जिससे राज्य सरकारों पर बहुत ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ता है। रमेश ने यह भी दावा किया कि नया कानून टेक्नोलॉजी को इसलिए लाता है ताकि लोगों को सुविधा न मिले, बल्कि उन्हें बाहर रखा जा सके। उन्होंने आगे कहा कि यह पूरे साल उस तरह उपलब्ध नहीं है, जैसे MGNREGA हुआ करता था। एक अंग्रेज़ी अख़बार में छपे अपने लेख में डॉबू ने कहा कि MGNREGA – जिसे अब 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' नाम दिया गया है – एक अधिकार-आधारित और मांग-आधारित योजना थी, जो परिवारों को 100 दिनों के अकुशल काम का कानूनी अधिकार देती थी।इसे भी पढ़ें: Jairam Ramesh का तंज: पर्यावरण मंत्रालय बना प्रवचन मंत्रालय, governance फेलउन्होंने कहा कि अब इसे एक फ़ॉर्मूले पर आधारित और केंद्र द्वारा तय किए जाने वाले ट्रांसफ़र में बदल दिया गया है। जब पिछले बुधवार को VB G RAM G एक्ट लागू हुआ, तो कांग्रेस ने मांग की कि ग्रामीण रोज़गार योजना को रद्द कर दिया जाए और मज़बूत MGNREGA को वापस लाया जाए। पार्टी का कहना है कि नए कानून के तहत मिलने वाली मज़दूरी बिना किसी वाजिब वजह के बहुत कम है। पार्टी का यह भी कहना है कि भारत के मज़दूरों के लिए सही न्यूनतम मज़दूरी तय करने के लिए डॉ. अनूप सत्पथी की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी की 2019 की सिफारिशों को अपनाना चाहिए और तब से कीमतों में हुई बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए कांग्रेस ने नए कानून की आलोचना तेज़ कर दी है। रमेश और ड्रबू का तर्क है कि इसने मनरेगा (MGNREGA) के अधिकार-आधारित ढांचे की जगह एक सेंट्रलाइज़्ड मॉडल ले लिया है। साथ ही, पार्टी ने मज़दूरी को लेकर भी चिंता जताई है और मनरेगा को मज़बूत करके उसे फिर से लागू करने की मांग की है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Visakhapatnam Fishermen Case: आंध्र सरकार का बड़ा ऐलान, लापता परिवारों को मिलेगी 10 लाख की मदद
    Next Article
    Jantar Mantar पर Sonam Wangchuk की भूख हड़ताल, बगल में CJP नेता खा रहे पकौड़े, Video वायरल होने पर दी सफाई

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment