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    MLA नसीम और इरफान सोलंकी भागवत कथा में पहुंचे:महाराज ने नसीम के मन्दिर जाने वाली बात याद दिलाई, मंच से बोलीं- हमारा रिश्ता जन्म-जन्म तक बना रहे

    5 hours ago

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    कानपुर में सीसामऊ से विधायक नसीम सोलंकी और उनके पति पूर्व विधायक इरफान सोलंकी एक भागवत कथा के कार्यक्रम में पहुंचे। दोनों ने आशीर्वाद लिया, दक्षिणा भी चढ़ाई। बताया जा रहा है कि सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के गांधी नगर स्थित गणेश पार्क में 7 फरवरी को श्री शनि साईं मंदिर में भागवत कथा के कार्यक्रम में नसीम और इरफान पहुंचे थे। भागवत कथा वाचक पं. दीपक कृष्ण महाराज के पास खड़े नसीम और इरफान को आशीर्वाद देते हुए बोले कि बहन नसीम सोलंकी सीसामऊ विधानसभा से विधायक हैं, उनके पति इरफान भी आए हैं। भगवान की कथा, मंदिर और गंगा तीर्थ मान्यता सबकी अलग-अलग हो सकती है। एक घटना याद आ गई, अभी कुछ दिन पहले नसीम एक मंदिर गईं तो वहां के लोगों ने कहा ये करो, वो करो। लेकिन माफ करना, अगर किसी के जाने से मंदिर अपवित्र होता है तो मंदिर की महिमा कम हो सकती है। लेकिन मन्दिर मे तो कोई अपवित्र भी आए तो वो भी पवित्र हो जाता है। कोई पतित भी आए तो वो पावन हो जाता है। इरफान भागवत कथा में बोले इरफान सोलंकी ने कहा कि हम सब तो भिखारी हैं, देने वाला ऊपर वाला है। कोई अल्लाह कहता है, कोई राम कहता है। वो उनकी भी सुनता है जिनकी जुबान नहीं, उनको भी देता है जिनके हाथ नहीं हैं। बस हमें मांगने की इच्छा रहनी चाहिए। एक दिन हर इंसान को दुनिया से जाना है। बस अगर किसी इंसान के जाने के बाद कोई इंसान उसे याद करके आंसू बहाए तो ये सबसे बड़ी बात है। यहां हाथ खोलकर मांगिए, यही सच्चा दरबार है। वो किसी से लेकर नहीं देता, वो तो सबको अपने खजाने से देता है। सबकी मुराद पूरी करता है, यहां सब मांग सकते हैं। ऊपर वाले ने ही हमें पैदा किया, वही पालनहार है। ये सच है, पानी में लाठी मारने से पानी अलग नहीं हो जाएगा। हम सब डरपोक हैं, तभी तो उसके दरबार में आए हैं। हमें मालूम है कि हमारी फिक्र करने वाला सिर्फ ऊपर वाला है। उनको कई नाम से बुलाते हैं, कोई अल्लाह कहता है, कोई राम कहता है, देता सिर्फ वही है। गुरुजी, मैं इस मंच पर कई बार आया हूं, लेकिन आज सबसे अच्छा मौका मेरे लिए है कि मैं अपनी जीवनसाथी के साथ यहां आया हूं। ये मेरी सुख और दुख की साथी है। जब मेरे ऊपर मुसीबत आई, संघर्ष आया तो मेरी मां के बाद सिर्फ मेरी बेगम ने ही मेरा साथ दिया। परिवार जीवन में बहुत बड़ी चीज है। जब कोई किसी दूसरे के लिए भी ऊपर वाले से मांगता है तो सबसे पहले उसकी दुआ पूरी होती है। इसलिए मेरे लिए, मेरी बेगम के लिए दुआ कीजिए। हमारा आपका साथ ऐसे ही बना रहे। नसीम बोलीं जिस तरह से आप लोगों ने उपचुनाव में मेरा साथ दिया, वोट दिया, अपना आशीर्वाद दिया, उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मुझे और मेरे परिवार के लिए दुआ करना। हमेशा दुआ में शामिल रखें। आप हमारा परिवार हैं। ये साथ जनम-जनम तक बना रहे। आप हमारे साथ और हम आपके साथ रहें। दैनिक भास्कर से बोले इरफान इरफान ने कहा कि हम सभी धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। हम गुरुद्वारा भी जाते हैं। हम समाज को जोड़ने वाले नेता हैं। मेरी पत्नी नसीम को हर समाज के लोगों ने जिताया है। मैं हर वो काम करूंगा जो समाज को जोड़े। हमारे प्रयास से समाज जुड़े तो मैं 100 बार ऐसी जगह जाऊंगा, 500 बार जाऊंगा। ऊपर वाला कब किसकी दुआ सुन ले, ये नहीं पता। आज जो मैं छूटा हूं तो इसमें सबकी दुआ का असर रहा है। कोई मंदिर गया, कोई मस्जिद गया, कोई गुरुद्वारा गया। हम दोनों लोग कथा में गए थे। नसीम ने जब बजट सत्र में सदन में बात रखी तो विधानसभा के सभी धार्मिक स्थलों के लिए विकास कार्य कराने को धनराशि की मांग की है। वनखंडेश्वर मंदिर जाने पर बोले कि जब कथावाचक, जो कि महान लोग हैं, उन्होंने कहा तो हम इस पर उन्हें बधाई देते हैं। हालांकि वो समय बीत गया है, उसका जवाब तो नसीम को जीत दिलाकर दे दिया वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा बोले सीसामऊ सीट से हाजी मुश्ताक और उनके बेटे इरफान के बाद अब नसीम विधायक हैं। ऐसे आयोजन में जाना, मंदिर जाना इनका कोई चुनावी या वोट लेने की मंशा नहीं लगती, क्योंकि इन्हें सीसामऊ से सभी वर्गों का वोट मिलता है। इरफान के पिता हाजी मुश्ताक सोलंकी भी जब विधायक थे तो उनकी छवि ऐसी थी कि किसी भी वर्ग का व्यक्ति आता था तो वह उसका काम करते थे। इसी तरह एक जनप्रतिनिधि को कहीं भी जाने में सोचना नहीं चाहिए। वही इनका परिवार करता रहा है। विकास कार्यों में भी नहीं सोचना चाहिए कि किस धार्मिक स्थल का है। यह जिम्मेदारी जनप्रतिनिधि की है कि वह सबका काम पूरा कराए।
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