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    MP के 82 लाख किसानों को 17-अगस्त से मिलेगी खाद:भास्कर की खबर के बाद डेडलाइन तय; सरकार बोली- जितनी जरूरत, उतना देंगे

    21 hours ago

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    मध्यप्रदेश में खाद की बिक्री रोकने के फैसले के बाद सरकार ने अब इसकी टाइम लिमिट तय कर दी है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के मुताबिक भारत सरकार के iFMS पोर्टल और प्रदेश के खाद विक्रेताओं के स्टॉक का Reconciliation (मिलान) 16 अगस्त की शाम तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 17 अगस्त से खाद का वितरण शुरू होगा। सरकार ने कहा है कि किसानों को सुगमता से खाद उपलब्ध कराने के लिए 14 अगस्त की शाम 7 बजे से 15 और 16 अगस्त को अवकाश के दिनों में बिक्री बंद की गई है। सरकार का दावा है कि 17 अगस्त से किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि बिक्री रोकने के फैसले के बाद प्रदेश के 82 लाख किसान टेंशन में थे। स्टॉक मिलान के लिए 14 अगस्त शाम 7 बजे से बिक्री रोकी 14 अगस्त को विभाग ने खाद बिक्री पर रोक का आदेश जारी किया था। इसमें आगामी आदेश तक अनुदानित खाद की बिक्री नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। बिक्री रोकने का कारण iFMS पोर्टल पर दर्ज उर्वरक स्टॉक और खाद विक्रेताओं के वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान बताया गया था। यह रोक विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री केंद्रों पर लागू की गई थी। आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई थी। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिलान का काम 16 अगस्त शाम तक पूरा होगा। 4.21 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े के मुताबिक प्रदेश में रासायनिक खाद का पर्याप्त भंडारण है। खरीफ सीजन में 82 लाख किसानों पर असर प्रदेश में करीब 82 लाख पंजीकृत किसान हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र और सक्रिय किसानों की संख्या 82 से 83 लाख के बीच दर्ज की गई है। राज्य में करीब 152 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। खरीफ फसलों की बोनी हो चुकी है। फसल बढ़ने के साथ किसानों को यूरिया समेत अन्य खाद की जरूरत होगी। खासकर धान उगाने वाले किसानों के लिए खाद की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सरकार ने अब 17 अगस्त से वितरण शुरू करने की बात कही है। किसान संगठन ने बिक्री रोकने को गलत बताया राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने खाद बिक्री रोकने के फैसले को गलत बताया था। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों को यूरिया और अमोनियम सल्फेट की जरूरत है। फसल खाद की जरूरत के हिसाब से चलती है, वह सरकार के आगामी आदेश का इंतजार नहीं करती। कक्काजी ने कहा था कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि स्टॉक मिलान को बिक्री रोकने का आधार बनाना उचित नहीं है और इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। किसान संघ ने फैसले को गलत बताया था राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने खाद बिक्री रोकने के फैसले को गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि स्टॉक मिलान के नाम पर खाद की बिक्री बंद करना उचित नहीं है। इस समय किसानों को फसल के लिए यूरिया और अमोनियम सल्फेट की जरूरत है। कक्काजी ने कहा था कि फसल खाद की जरूरत के हिसाब से चलती है, वह सरकार के आगामी आदेश का इंतजार नहीं करती। जिस समय फसल को खाद की जरूरत होती है, उसी समय किसानों को खाद उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा था कि खाद उपलब्ध नहीं होने या बिक्री रोकने के पीछे कोई और कारण हो सकता है। स्टॉक मिलान को बिक्री रोकने का आधार बनाना वैधानिक नहीं लगता। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा और समय पर खाद नहीं मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कालाबाजारी का खतरा भी जताया गया था बिक्री बंद रहने के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ने पर कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई थी। अधिकृत बिक्री केंद्रों से खाद नहीं मिलने पर किसान निजी बाजार पर निर्भर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में महंगे दाम पर खाद बेचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, फिलहाल प्रदेश में खाद की कालाबाजारी शुरू होने की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए इसे संभावित खतरे के रूप में ही देखा गया था। ई-टोकन के खिलाफ भोपाल में किसानों ने किया था आंदोलन खाद बिक्री पर रोक ऐसे समय लगी है, जब प्रदेश में किसान पहले ही ई-टोकन व्यवस्था का विरोध कर चुके हैं। किसानों ने 28 और 29 जुलाई को नर्मदापुरम से पैदल भोपाल पहुंचकर दो दिन आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान राजधानी में भारी जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी थी। किसानों की मांगों में खाद वितरण की ऑनलाइन ई-टोकन व्यवस्था का विरोध भी शामिल था। किसानों का आरोप था कि ऑनलाइन व्यवस्था में समय पर टोकन नहीं मिलता। कई बार दूर-दराज के केंद्र आवंटित होने से भी खाद लेने में परेशानी होती है। ई-टोकन व्यवस्था के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन, हंगामा और चक्काजाम किया था। विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव या इसे स्थगित करने का निर्णय लिया है। ……………………………….. यह खबर भी पढ़ें MP सरकार 60% मूंग खरीदेगी, खाद की ई-टोकन व्यवस्था रोकी मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने घोषणा की कि सरकार 60% तक मूंग खरीदेगी। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा समेत जिलों में करीब 3 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…
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