Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ना भारत से दूरी, ना चीन से यारी: UN के मंच पर बालेन शाह ने कैसे साधी दो दिग्गजों के बीच कूटनीतिक डोर?

    13 hours ago

    1

    0

    नेपाल ने हमेशा से अपने दो बड़े पड़ोसियों भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने पहले संबोधन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इसी कूटनीतिक राह पर आगे बढ़ते दिखे। हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ का हवाला देते हुए उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत, नेपाल और चीन के नेतृत्व में एक संयुक्त मंच बनाने का प्रस्ताव रखा। अपने चिर-परिचित आयताकार धूप के चश्मे में मंच पर पहुंचे बालेन शाह ने हिमालयी क्षेत्र के देशों के बीच आपदा प्रबंधन को लेकर मजबूत सहयोग की पुरजोर वकालत की। प्रधानमंत्री शाह ने 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म' (Himalayan Climate Resilience Mechanism) का खाका पेश करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से कोई भी देश अकेले नहीं निपट सकता। उन्होंने आपदाओं से निपटने के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया।सैटेलाइट डेटा शेयरिंग: प्राकृतिक आपदाओं की सटीक निगरानी के लिए तीनों देशों के बीच उपग्रह डेटा का वास्तविक समय (रियल-टाइम) आदान-प्रदान।अर्ली-वार्निंग सिस्टम: बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली को साझा तकनीक के जरिए और अधिक सशक्त बनाना।क्षेत्रीय समन्वय: हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के संरक्षण के लिए भारत, चीन और नेपाल के बीच नीतिगत सहयोग को बढ़ावा देना।इसे भी पढ़ें: Nepal Flood: अमेरिका देगा 3.1 करोड़ डॉलर की मदद, पुल निर्माण और राहत कार्य में मिलेगी सहायताभारत और चीन पर बालेन शाह ने क्या कहा?रैपर से नेता बने शाह ने कहा कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में लगभग दो अरब लोग रहते हैं। ये पहाड़ नेपाल से बहुत दूर तक की आबादी को पानी, इकोसिस्टम, खेती और रोज़गार के साधन उपलब्ध कराते हैं। शाह ने कहा कि इसीलिए, सबसे पहले और ज़रूरी कदम के तौर पर, हमारा प्रस्ताव है कि नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक हिमालयन क्लाइमेट रेज़िलिएंस मैकेनिज्म बनाया जाए। शाह ने खतरनाक ग्लेशियल झीलों (जिनके बारे में माना जाता है कि जुलाई में आई बाढ़ की वजह यही थीं) की निगरानी और आपदा प्रबंधन में भी सहयोग मांगा। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के कुछ हिस्सों में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में 1,400 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और 6,000 लोग लापता हो गए; इस बाढ़ ने कई कस्बों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। माना जाता है कि इस तबाही की वजह तिब्बत के ऊपरी इलाके में ग्लेशियर का टूटना था। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारत और चीन के बीच बसा नेपाल, धरती के गर्म होने के साथ ही जलवायु आपदाओं का हॉटस्पॉट बन गया है। शाह ने UNGA में कहा इस तबाही ने नेपाल-चीन सीमा के दोनों तरफ भारी नुकसान पहुँचाया। बाढ़ का पानी भारत की ओर बहता रहा। उन्होंने दुनिया के लिए एक संदेश भी दिया। नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं मानता। ग्लेशियर और बाढ़ पासपोर्ट या वीज़ा लेकर यात्रा नहीं करते। शाह ने उन देशों का खास तौर पर ज़िक्र किया और उनका "बहुत-बहुत धन्यवाद" किया जिन्होंने आपदा के बाद मदद के लिए तेज़ी से कदम उठाए।इसे भी पढ़ें: भारत के साथ संबंध बेहतरीन, राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच व्यावहारिक रुख अपना रहा Nepal: शिशिर खनालचीन ने नेपाल को 22 लाख डॉलर की इमरजेंसी आर्थिक मदद दी विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, भारत ने 26 अगस्त से 19 सितंबर के बीच 140 टन से ज़्यादा राहत सामग्री और उपकरण भेजे हैं। इससे पड़ोसियों पर संकट आने पर भारत की "सबसे पहले मदद करने वाले" (first responder) देश की छवि और मज़बूत हुई है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा था कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद देश को दी जाने वाली मदद कोई "दान" नहीं, बल्कि भारत और चीन जैसे ज़्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाले देशों की कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी है। UNGA में शाह का भारत और चीन की ओर हाथ बढ़ाना, पहले की बयानबाज़ी से पीछे हटने के तौर पर देखा जा रहा है।इसे भी पढ़ें: भारत के साथ संबंध बेहतरीन, राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच व्यावहारिक रुख अपना रहा Nepal: शिशिर खनालनेपाल का भारत-चीन के बीच संतुलन बनाने का प्रयासभारत और चीन का नाम लेकर, शाह ने असल में नेपाल की लगातार सरकारों द्वारा अपने दो पड़ोसियों के बीच संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिशों का ही समर्थन किया। कई दशकों से नेपाल व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए भारत पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहा है। हालाँकि, पिछले दशक में नेपाल ने मिलिट्री सप्लाई, मैन्युफैक्चरिंग और हाइड्रोपावर के लिए बीजिंग के साथ अपने संबंध मज़बूत करने की दिशा में लगातार काम किया है। 2025 में जेन ज़ी के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद, जब पूर्व रैपर ने इस साल की शुरुआत में पद संभाला, तो उन्होंने एक स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति बनाने की कोशिश की है। शाह ने विदेशी नेताओं के साथ बहुत कम बातचीत की है। जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि इस बात पर कोई अटकलें न लगें कि नेपाल किस तरफ़ झुक रहा है। UNGA के लिए न्यूयॉर्क का दौरा उनकी पहली विदेश यात्रा थी। भारत और चीन के लिए, नेपाल क्षेत्रीय सुरक्षा के नज़रिए से एक अहम हिस्सा है। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    Vishwakhabram: Italy की संसद में Women Politicians ने Mini Skirts पहन कर जताया विरोध, दुनिया हैरानी से देखती रह गयी
    Next Article
    Mivi One 5G भारत में 11,999 रुपये में लॉन्च, 6000mAh बैटरी और 50MP कैमरा से लैस

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment