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    नोएडा में 500 से अधिक कर्मचारी सड़क पर उतरे:वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, कंपनियों में मांगा लिखित जवाब

    3 hours ago

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    नोएडा में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। एनएसइजेड मेट्रो और एलिवेटेड रैंप के पास 500 से ज्यादा कर्मचारी इकठ्ठा हुए। कर्मचारियों का कहना है- जब तक उनकी मांग को नहीं माना जाता और स्पष्ट रूप से कंपनियां उन्हें लिखित में जवाब नहीं देंगी प्रदर्शन जारी रहेगा। इसके चलते कुलेसरा से ग्रेटर नोएडा की ओर से जाने वाला मार्ग बाधित रहा। मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद रहा। फेज-2 क्षेत्र स्थित ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव समेत छह कंपनियों के कर्मचारी बीते दो दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। गुरुवार से शुरू हुए प्रदर्शन में लगातार भीड़ रही है। प्रदर्शनकारियों में सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी शामिल रहीं। सुबह सड़क जाम की तो पुलिस शांत कराके उन्हें एक पार्क में ले गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने हुंकार भरी और दादरी-सूरजपुर रोड पर ट्रैफिक रोक दिया। श्रमायुक्त की अपील, अफवाहों पर ध्यान नहीं दे श्रमायुक्त उप्र ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा- पिछले कुछ दिनों से नोएडा सहित प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के संबंध में अफवाहें, भ्रामक सूचनाएं व फर्जी समाचार प्रसारित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य अनावश्यक भ्रम एवं अस्थिरता उत्पन्न करना है। आप सभी से स्पष्ट रूप से अपील है कि कृपया किसी भी प्रकार की अफवाहों या अपुष्ट सूचनाओं से प्रभावित न हों और उन्हें आगे न बढ़ाएं। उत्तर प्रदेश सरकार आपके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी श्रमिक के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा। औद्योगिक शांति एवं श्रमिक कल्याण सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनएसईजेड पर बैठे कामगार नारेबाजी के बीच प्रदर्शनकारी एक बात भी सुनने को तैयार नहीं थे। पुलिस अधिकारियों ने उनसे बातचीत की साथ ही समझाया। हालांकि वो मानने को तैयार नहीं है। अब भी भंगेल एलिवेटेड के रैंप के पास एनएसईजेड मेट्रो के पास सैंकड़ों की संख्या में कामगार मांगों को लेकर बैठे हुए है। वहां मौजूद कामगारों ने बताया कि उनकी सैलरी में 250 से 300 रुपए बढ़ोतरी की जा रही है। जबकि एक दिहाड़ी की मजदूर दिन में 700 रुपए कमा कर जाता है। उन्होनं न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने की मांग की। नए संशोधित श्रम कानून खत्म करने और न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए तक करने की मांग पर अडिग हैं, ताकि श्रमिक इस महंगाई में अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। यह आंदोलन स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वैश्विक संकट की आंच अब भारत के औद्योगिक मजदूरों की थाली तक पहुंच चुकी है। अगर समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह असंतोष और बड़े रूप में सामने आ सकता है।​​​​​​​​​​​​​​​​
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