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    नोएडा में किशोर को 2 महीने जेल में रखा:NHRC ने लिया संज्ञान, यूपी DGP और DG जेल से मांगी रिपोर्ट

    6 hours ago

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    ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए 16 साल के किशोर को दो महीने से अधिक समय तक जेल में रखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन का गंभीर मामला माना है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और डीजी जेल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही आयोग ने अपने महानिदेशक को जांच टीम गठित कर एक सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बालिग दिखाकर भेज दिया गया था जेल मामला 14 अप्रैल का है। श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के आरोप में फेज-2 थाना पुलिस ने एक किशोर को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड में उसकी उम्र बालिग दर्ज कर उसे कासना स्थित लुक्सर जेल भेज दिया गया। वहां वह करीब दो महीने तक वयस्क बंदियों के साथ रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पेशी के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता माणिक गुप्ता की नजर किशोर पर पड़ी। उन्होंने बताया कि किशोर को हथकड़ी में देखकर बातचीत की गई, जिसमें उसने खुद को नाबालिग बताया। आधार कार्ड ने खोली पूरी कहानी अधिवक्ता ने किशोर के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज जुटाकर अदालत में प्रस्तुत किए। दस्तावेजों से उसकी उम्र 16 वर्ष साबित हुई। इसके बाद अदालत ने 8 जून को आदेश जारी कर किशोर को वयस्क जेल से हटाकर बाल सुधार गृह भेजने का निर्देश दिया। गरीबी बनी जमानत में बाधा जांच में सामने आया कि किशोर भंगेल क्षेत्र का रहने वाला है और एक परचून की दुकान पर काम करता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह जमानत के लिए आवश्यक श्योरिटी की व्यवस्था नहीं कर पा रहा था। बाद में अदालत ने जमानत राशि 45 हजार रुपये से घटाकर 30 हजार रुपये कर दी। एक बाइक के दस्तावेज जमानत के तौर पर जमा कराए गए, जिसके बाद गुरुवार को किशोर को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया। अब जांच के घेरे में पुलिस और जेल प्रशासन पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के समय किशोर ने खुद को बालिग बताया था और उसी आधार पर कार्रवाई की गई। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि उम्र सत्यापन की प्रक्रिया में चूक कैसे हुई और एक नाबालिग को दो महीने तक वयस्क कैदियों के बीच क्यों रखा गया। NHRC की जांच अब यह तय करेगी कि इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। आयोग की कार्रवाई के बाद पुलिस और जेल प्रशासन दोनों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
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