Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    नेपाल के सैलाब में बलिया के मां-बेटे लापता:पिता की 4 दुकानें, 2 गोदाम बहे; 40 साल से नेपाल में रह रहा था परिवार

    18 hours ago

    1

    0

    नेपाल में आए सैलाब में बलिया के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार में करीब 40 साल से रह रहे रसड़ा के पन्नालाल चौरसिया की पत्नी ऊषा और 18 साल का बेटा राहुल सैलाब की चपेट में आने के बाद से लापता हैं। हादसे में पन्नालाल की कपड़े की दुकान, गोदाम, जरूरी कागजात और इंडियन एंबेसी से संबंधित दस्तावेज भी बह गए। नेपाली प्रशासन और राहत-बचाव दल मां-बेटे की तलाश में जुटे हैं। परिवार को अब भी उनके सही-सलामत मिलने की उम्मीद है। सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला सुबह 6 बजे बेटे ने पिलाई चाय, फिर एक्सरसाइज के लिए निकले पन्नालाल बताते हैं- 26 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे राहुल रोज की तरह मेरे लिए चाय बनाकर लाया था। मैंने बेटे के हाथ की चाय पी। इसके बाद एक्सरसाइज करने और दवा लेने बाहर निकल गया। उस समय पत्नी ऊषा देवी और राहुल दुकान पर ही थे। राहुल पढ़ाई करने के साथ मेरी कपड़े की दुकान में भी हाथ बंटाता था। मुझे क्या पता था कि बेटे के साथ यह मेरी आखिरी मुलाकात साबित होगी। सुबह 9:26 बजे लौटते समय मिली सैलाब की खबर पन्नालाल ने बताया- सुबह करीब 9:26 बजे मैं लौट रहा था। तभी रास्ते में लोगों ने त्रिशूली नदी में अचानक आए भीषण सैलाब के बारे में मुझे पता चला। मैं घबराकर तेजी से दुकान की ओर बढ़ा। वहां पहुंचने पर पता चला कि पानी के तेज बहाव में मेरी दुकान और आसपास का इलाका तबाह हो चुका है। पत्नी और बेटा सैलाब में बह गए हैं। दरअसल, दुकान से निकलने के दौरान मैं अपना मोबाइल नहीं ले गया था। अगर मोबाइल मेरे पास होता, तो सैलाब की खबर मिलते ही पत्नी और बेटे से सुरक्षित जगह पर जाने के लिए कह सकता था। 'अंकल जी, बचा लीजिए...' मलबे में फंसा राहुल लगाता चिल्लाता रहा हादसे के एक चश्मदीद ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया- पानी के साथ बालू और मलबे का बहाव इतना तेज था कि लोग जान बचाकर भाग रहे थे। पन्नालाल का परिवार और अन्य लोग भी वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे। राहुल तेज बहाव और बालू में फंस गया था। उसका चेहरा मलबे के ऊपर दिखाई दे रहा था। वह लगातार मदद के लिए 'अंकल जी...' कहकर पुकार रहा था। उसे बचाने के लिए हाथ बढ़ाकर कॉलर पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन पानी और बालू के दबाव के कारण उसे खींचना संभव नहीं हो सका। देखते ही देखते राहुल मलबे और सैलाब में ओझल हो गया। पहाड़ी पर शरण लेकर परिवार के अन्य सदस्यों ने बचाई जान सैलाब की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परिवार के अन्य सदस्यों को अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ियों की ओर भागना पड़ा। किसी तरह उन्होंने ऊंचे स्थान पर पहुंचकर जान बचाई। कई लोग घंटों खुले में रहने और बारिश झेलने को मजबूर रहे। राहत सामग्री भी जरूरतमंदों तक समय से नहीं पहुंच पाई। त्रिशूली में 20 साल से था कारोबार, चार दुकान और दो गोदाम परिवार के मुताबिक, पन्नालाल करीब 40 साल पहले रोजगार की तलाश में नेपाल गए थे। नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार में पिछले करीब 20 साल से उनका परिवार रह रहा था। उन्होंने वहां थोक और फुटकर कपड़े का कारोबार खड़ा किया था। परिवार की 4 बड़ी दुकानें और 2 गोदाम हैं। समय के साथ परिवार की अगली पीढ़ी भी नेपाल में ही पढ़ाई और कारोबार से जुड़ गई। राहुल भी पढ़ाई करने के साथ पिता की दुकान पर काम में हाथ बंटाता था। राहुल को गोद लिया था, बेटे की तरह पाला घरवालों के अनुसार, पन्नालाल के कोई बेटा नहीं था। उन्होंने राहुल को नेपाल में ही गोद लिया था। पन्नालाल और ऊषा देवी ने उसे बेटे की तरह बेहद प्यार से पाला। राहुल परिवार का बेहद लाडला था। वह अक्सर सुबह पिता के लिए चाय बनाकर देता था और दुकान के काम में भी उनकी मदद करता था। बेटी बोली- सुबह 8:45 बजे हुई बात, 15 मिनट में सब बदल गया दीक्षा बताती हैं- 26 अगस्त की सुबह करीब 8:45 बजे बड़ी मम्मी-पापा से फोन पर बातचीत हुई थी। तब किसी को भी इस भयावह आपदा का अंदाजा नहीं था। इसके कुछ ही देर बाद त्रिशूली में सैलाब की खबर आने लगी। करीब दोपहर 12 बजे काफी प्रयास के बाद अंतरराष्ट्रीय कॉल लग सकी। तब पता चला कि मां और भाई लापता हैं। छठ पर हर साल घर आता था पूरा परिवार घरवालों ने बताया कि नेपाल में रहने के बावजूद पन्नालाल का रसड़ा से गहरा जुड़ाव था। छठ पर्व पर पूरा परिवार रसड़ा आता था। इसी साल जनवरी में भी परिवार के सदस्य वैष्णो देवी दर्शन के बाद घर आए थे। रसड़ा की पुरानी मस्जिद के पास पन्नालाल का पुश्तैनी मकान है। करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने पुराने मकान को तुड़वाकर नया मकान बनवाया था। इसके बाद मकान में ताला लगाकर वह दोबारा नेपाल चले गए थे। वहीं, नेपाल की त्रासदी की खबर रसड़ा पहुंचने के बाद रिश्तेदार और परिचित लगातार पन्नालाल के संपर्क में हैं। हर किसी की नजर नेपाल से आने वाली अगली सूचना पर टिकी है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता अब ऊषा देवी और राहुल का पता लगना है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ेंः- घर का आंगन 25 फीट धंसा, गिरकर लड़की की मौत, 7 घंटे फंसी रही, 60 जवानों ने गड्ढा खोदकर निकाला कानपुर में घर का आंगन अचानक धंसने से 25 फीट गहरे गड्‌ढे में गिरी लड़की को 7 घंटे के ऑपरेशन के बाद बाहर निकाल लिया गया। लेकिन अस्पताल में उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसा शुक्रवार सुबह 6:40 बजे हुआ। रक्षाबंधन पर 18 साल की यशी सविता नहाकर बाथरूम से बाहर निकली थी। जैसे ही उसने अपना एक कदम आंगन की तरफ बढ़ाया, नीचे की जमीन धंस गई। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    पाकिस्तान में 200 साल पुराना गुरुद्वारा गिराया:शॉपिंग मॉल बनाया जा रहा; BJP बोली- सिखों की विरासत खत्म की जा रही
    Next Article
    AMU के छात्र ने फांसी लगाकर दी जान:सुसाइड नोट में लिखा- मैं लूजर हूं, कुछ नहीं कर पा रहा, इसलिए जान दे रहा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment