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    निरहुआ की एंट्री से बढ़ेंगी मुश्किलें:झोलाछाप डॉक्टर, बदलता गांव और सिस्टम की चुनौतियां, ‘ग्राम चिकित्सालय 2’ को लेकर अमोल-आकांक्षा ने खोले राज

    1 day ago

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    वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय सीजन 2’ इस बार सिर्फ गांव और स्वास्थ्य व्यवस्था की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम, भरोसे और बदलाव को भी दिखाएगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में अमोल पराशर, आकांक्षा रंजन कपूर और दिनेश लाल यादव निरहुआ ने अपने किरदारों, गांव की चुनौतियों और सीजन के नए ट्विस्ट पर बात की। अमोल ने बताया कि प्रभात अपने सिद्धांतों और जमीनी सच्चाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। आकांक्षा ने महिला स्वास्थ्य और बदलाव की जरूरत पर बात की। निरहुआ ने गांव की हकीकत और जागरूकता की अहमियत बताई। सवाल: पहले सीजन की सफलता के बाद सीजन 2 में कितनी जिम्मेदारी बढ़ गई? जवाब/अमोल पराशर: जब कोई सीजन हिट होता है तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी लेखक और निर्देशक पर होती है, क्योंकि उन्हें कहानी को नया भी रखना होता है और पुराने सीजन से जोड़कर आगे बढ़ाना होता है। हमारे लिए चुनौती होती है कि पहले सीजन के किरदार की बॉडी लैंग्वेज, सोच और अंदाज को फिर से पकड़कर बेहतर तरीके से निभाएं। सवाल: गांव के माहौल और अपने किरदार को समझने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: सीजन 1 में ज्यादा तैयारी करनी पड़ी थी, लेकिन सीजन 2 तक किरदार समझ में आ चुका था। डायरेक्टर ने डायलॉग, बोलने का तरीका और किरदार को जमीन से जुड़ा रखने में मदद की। गांव का माहौल मेरे लिए नया नहीं था क्योंकि मेरे पिता हरियाणा से हैं। सवाल: इस बार दर्शकों को क्या नया देखने मिलेगा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: मैं पहले सीजन का दर्शक था और मुझे वह बहुत पसंद आया था। इस बार मैं कहानी में थोड़ा ट्विस्ट लेकर आया हूं। गांव की समस्याओं के पीछे सिर्फ सामने दिखने वाले लोग नहीं होते, कई बार पर्दे के पीछे बैठे लोग भी चीजें कंट्रोल कर रहे होते हैं। यही इस सीजन का दिलचस्प हिस्सा है। सवाल: प्रभात और गार्गी के रिश्ते में क्या बदलाव दिखेगा? जवाब/अमोल पराशर: अब दोनों सिर्फ हाय-हैलो वाले दोस्त नहीं रहे। वे एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं, इसलिए बहस भी करते हैं और मदद भी करते हैं। असली जिंदगी की दोस्ती की तरह इस रिश्ते में भी कई रंग देखने को मिलेंगे। सवाल: अगर असल जिंदगी में गांव में डॉक्टर बनकर जाना पड़े तो क्या करेंगी? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: मैं महिलाओं की हेल्थ, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करना चाहूंगी। मुझे लगता है कि गांवों में इस दिशा में अभी बहुत बदलाव की जरूरत है। सवाल: शो में सिद्धांत और हालात के बीच कितना संघर्ष देखने मिलेगा? जवाब/अमोल पराशर: प्रभात ऐसा इंसान है जो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। पहले सीजन में उसने सीखा कि सिर्फ पढ़ाई और काबिलियत से काम नहीं चलता, लोगों का भरोसा भी जीतना पड़ता है। इस बार वह अपने तरीके बदलने की कोशिश करेगा, लेकिन अपने उसूल नहीं छोड़ेगा। यही उसकी ताकत और मुश्किलें भी पैदा करती है। सवाल: क्या इस बार सिस्टम और डॉक्टर के बीच टकराव भी दिखेगा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: गांवों में कई बार जहां अच्छे डॉक्टर नहीं पहुंचते, वहां झोलाछाप डॉक्टर लोगों की मदद करते दिखते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब मदद और गलत तरीके के बीच की सीमा खत्म होने लगती है। इसी टकराव को इस सीजन में दिखाया गया है। सवाल: क्या आपने असल जिंदगी में ऐसे लोगों को देखा है जो अच्छी पढ़ाई के बाद समाज के लिए काम कर रहे हों? जवाब/अमोल पराशर: हां, मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है। मेरे साथ पढ़े कुछ लोगों ने बड़ी नौकरी छोड़कर समाज के लिए काम चुना। मेरे एक जूनियर ने किसानों के लिए काम शुरू किया और टेक्नोलॉजी के जरिए उनकी मदद कर रहा है। ऐसे लोग बहुत हैं, लेकिन वे ज्यादा चर्चा में नहीं आते। सवाल: क्या आपको भी ऐसे लोग मिले हैं जो बिना चर्चा के समाज के लिए काम करते हों? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: मैं जानवरों के लिए काम करने वाले कई लोगों से मिली हूं। बहुत लोग अपनी नौकरी के साथ समाज के लिए भी काम करते हैं। मेरी मां भी एक एनजीओ चलाती हैं, जो रेप और एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद करता है। मुझे लगता है दुनिया में इंसानियत बहुत है, बस उसकी चर्चा कम होती है। सवाल: बचपन में किसी ग्राम चिकित्सक या झोलाछाप डॉक्टर से जुड़ा कोई अनुभव रहा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: बचपन का एक किस्सा आज भी याद है। एक छोटे बच्चे को इंजेक्शन लगाया जा रहा था और दवा बाहर निकल गई। जब परिवार ने पूछा तो डॉक्टर ने कहा कि ‘जितनी गिरी है, उतना भी फायदा करेगी।’ ऐसे अनुभव बताते हैं कि बिना सही जानकारी के इलाज कितना खतरनाक हो सकता है। सवाल: क्या आज गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव दिखता है? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: हाल ही में मुझे सरकारी अस्पताल जाने का मौका मिला। मैं थोड़ा डरी हुई थी, लेकिन वहां सफाई, व्यवस्था और डॉक्टरों का व्यवहार देखकर अच्छा लगा। पूरा अनुभव व्यवस्थित था और मेरी सोच भी बदली। दिनेश लाल यादव निरहुआ: आज गांवों में काफी बदलाव आया है। जागरूकता बढ़ रही है और ऐसे शो लोगों तक जरूरी बातें पहुंचाने में मदद करते हैं।
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