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    वाराणसी में उठा 352 साल पुराना मेहंदी का जुलूस:इमाम हुसैन के भतीजे कासिम को किया गया याद, चौहट्टा लाल खां में जियारत को उमड़े अकीदतमंद

    3 hours ago

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    मोहर्रम की 7 तारीख को वाराणसी के चौहट्टा लाल खां मोहल्ले से मंगलवार की रात 352 साल पुराना मेहंदी का जुलूस उठाया गया। इस जुलूस में कागज की बनी मेहंदी की जियारत करने को जायरीन उमड़े थे। मेहंदी के अलावा जुलूस में दुलदुल व अलम भी था। चौहट्टा लाल खां में सैयद कासिम रिजवी के जेरे इंतजाम यह जुलूस उठाया गया। जुलूस में लेकर अंजुमन आबिदिया अल सुबह सदर इमामबाड़ा लाट सरैया लेकर पहुंची। जुलूस में शहर भर की केअंजुमनों ने नौहाख्वानी व मातम किया। इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की याद में उठा जुलूस शहर के चौहट्टा लाल खां में पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की याद में मेहंदी का जुलूस निकाला गया। जुलूस उठने से पहले मौलाना ने कर्बला के मैदान में कासिम की शहादत पढ़ी। उन्होंने कहा कि 13 साल के कासिम जंग के मैदान में पहुंचे तो उन्होंने अपने बाबा इमाम हसन के जंग के हुनर दिखाए। अब्बास और इमाम हुसैन के भतीजे की यह जंग देख कर यजीदी लश्कर घबरा गया। लश्कर के चीफ ने अरब के जंग के उसूल के खिलाफ एक साथ हमला करने को कहा और कासिम को शहीद कर दिया। लाश के हो गए थे टुकड़े मौलाना ने आगे पढ़ा - 'जब हजरत कासिम पर यजीदी लश्कर ने एकसाथ हमला किया तो 13 साल के कासिम घायल होकर घोड़े से नीचे गिरे। इस दौरान उन्होंने अपने चचा इमाम हुसैन को आखरी सलाम किया। ये सुनकर इमाम हुसैन और अब्बास जंग के मैदान की तरफ दौड़े इसे देखकर यजीद की फ़ौज ये समझी की इमाम हुसैन जंग को आ रहे हैं और भागने लगी। ऐसे में कासिम की लाश घोड़ों की टापों से रौंद दी गई। इमाम हुसैन लाश के टुकड़े लेकर खेमें तक आये। ये सुन वहां मौजूद जायरीन रोने लगे। सदर इमामबाड़े में ठंड हुआ जुलूस अंजुमन अबिदिया के सेक्रेटरी शामिल रिजवी ने बताया कि जुलूस 352 साल पुराना है। यह जुलूस यहां से उठकर सदर इमामबाड़े तक जाएगा और वहां समाप्त होगा। इसके पहले एक मेहंदी का जुलूस मुकीमगंज में भी निकला गया। जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ वापस इमामबाड़े में समाप्त हुआ।
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