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    नाव हादसे के बाद यमुना घाटों पर पसरा सन्नाटा:नाव संचालन न होने से चुनरी मनोरथ थमे, नाविकों के सामने रोजी-रोटी का संकट

    5 hours ago

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    वृंदावन में यमुना के जो घाट कभी 'जय यमुना मैया' के जयकारों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहते थे, वहां आज सन्नाटा पसरा है। 10 अप्रैल को पंजाब के यात्रियों के साथ हुए दर्दनाक नाव हादसे ने न केवल यमुना की लहरों की रौनक छीन ली है। बल्कि स्थानीय व्यापारियों और नाविकों की कमर भी तोड़ दी है। प्रशासन की सख्ती और नई पॉलिसी के फेर में अब आस्था और आजीविका दोनों संकट में हैं। थम गए 'चुनरी मनोरथ' के आयोजन यमुना जी में 'चुनरी मनोरथ' का आयोजन ब्रज की पुरानी परंपरा है। मथुरा, वृंदावन और गोकुल में हर महीने हजारों श्रद्धालु यमुना मैया को चुनरी अर्पित करने का मनोरथ करते थे। इस भव्य आयोजन से न केवल धार्मिक उल्लास जुड़ा था, बल्कि सैकड़ों लोगों का घर भी चलता था। हादसे के बाद से प्रशासन ने नावों के संचालन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे ये आयोजन पूरी तरह बंद हैं। नाव संचालन बंद होने से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं तो आहत हो ही रही हैं, साथ ही यमुना किनारे का व्यापार भी ठप पड़ गया है। क्या है चुनरी मनोरथ मां यमुना के भक्त उनका 16 श्रृंगार कर उनको 108 या अपनी क्षमता अनुसार साड़ी अर्पित करते हैं। इसमें भक्त सभी साड़ियों को एक दूसरे से जोड़ लिया जाता है और उसके बाद यमुना के एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाया जाता है। चुनरी मनोरथ में साड़ियों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाने के लिए सबसे जरूरी होती है नाव। लेकिन वर्तमान में नाव संचालन न होने से भक्त चुनरी मनोरथ नहीं कर पा रहे। सांकेतिक रूप से कर रहे चुनरी मनोरथ पहले जहां भक्त पूरी आस्था और भक्ति के साथ चुनरी मनोरथ करते थे इस हादसे के बाद उसमें बड़ी कमी आई है। भक्त अब यमुना की धार को चुनरी न ओढाकर किनारे पर मौजूद मां यमुना जी के छवि को चुनरी अर्पित कर रहे हैं। पहले जहां चुनरी मनोरथ का महीने भर सिलसिला चलता था अब उसमें 80 प्रतिशत तक कमी देखी जा रही है। तीर्थ पुरोहित सिद्धार्थ शुक्ला बताते हैं कि अब वही भक्त चुनरी मनोरथ करने आ रहे हैं जिन्होंने पहले से मनोकामना पूरी होने पर बोला हुआ है। ऐसे भक्तों को सांकेतिक रूप में घाट किनारे ही यमुना जी की प्रतिमा को चुनरी अर्पित कर मनोरथ कराया जा रहा है। अब केवल 4,5 भक्त ही चुनरी मनोरथ करने आए हैं। भगवान शिव ने किया था पहला चुनरी मनोरथ तीर्थ पुरोहित सिद्धार्थ शुक्ला बताते हैं भगवान श्री कृष्ण ने जब महारास किया और उसे देखने कैलाश से भगवान भोलेनाथ आए तो उनको गोपियों ने वृंदावन में प्रवेश से रोक दिया। जिसके बाद भगवान भोलेनाथ का भाव देखकर यमुना जी ने उनका गोपी रूप में श्रृंगार किया। उनको रास में प्रवेश कराया। भगवान श्री कृष्ण और राधारानी के महारास के दर्शन करने से भगवान शिव आनंदित हो गए और मां यमुना जी का आभार व्यक्त करने के लिए उन्होंने 108 साड़ी से बनी चुनरी उनको अर्पित की। तभी से मां यमुना का भक्त चुनरी मनोरथ करते हैं। छोटे दुकानदारों की टूटी उम्मीद सिर्फ नाविक ही नहीं, यमुना किनारे कंठी-माला और प्रसाद बेचने वाले छोटे दुकानदार भी हादसे के बाद से परेशान हो रहे हैं। दुकानदारों का कहना है की पहले घाटों पर यात्रियों की हलचल रहती थी, तो हमारी तुलसी की मालाएं और अन्य सामान आसानी से बिक जाता था। अब कोई यमुना किनारे आ ही नहीं रहा है। हमारी बोहनी तक के लाले पड़े हैं। नगर निगम की पॉलिसी का विरोध हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी नाविकों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, नगर निगम की नई पॉलिसी को लेकर नाविकों में भारी रोष है। नाविकों का आरोप है कि रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे 5 से ₹10,000 की मांग की जा रही है। नाविकों का कहना है कि वे गरीब हैं और इतनी बड़ी राशि देने में पूरी तरह असमर्थ हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि न तो अभी तक लाइफ जैकेट की कोई पुख्ता व्यवस्था हुई है और न ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। सुरक्षा और आजीविका के बीच फंसा पेंच एक तरफ प्रशासन का तर्क है कि बिना रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मानकों लाइफ जैकेट आदि के नाव चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे सुरक्षा भी रहे और गरीबों का चूल्हा भी जलता रहे। फिलहाल, प्रशासन और नाविकों के बीच जारी इस खींचतान में वृंदावन के घाट सूने पड़े हैं और भक्तों को यमुना पूजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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