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    'ऑफर-लेटर मिल नहीं रहा, हम शादी नहीं कर पा रहे':लखनऊ पहुंचे शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, कहा- 13 साल से भर्ती का इंतजार

    16 hours ago

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    ‘13 साल पहले भर्ती परीक्षा दी थी। परीक्षा में सफल होने के बाद नाम आया उसके बाद से ही नौकरी के इंतजार में है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने हम लोगों के पक्ष में आदेश दिया पर अभी तक नियुक्ति नहीं मिल पाई। आज भी ऑफर लेटर का इंतजार कर रहे हैं। इसीलिए ब्याह भी नहीं कर रहे। परिवार के बाकी सदस्यों की भी मदद नहीं कर पा रहे हैं।’ यह कहना है श्वेता सिंह का। वह सोमवार को अलीगढ़ से लखनऊ धरना देने के लिए आई थीं। सोमवार को निशातगंज स्थिति बेसिक शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय में बड़ी संख्या में प्रदेश के तमाम जिलों से आए इस भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों ने धरना दिया। उनका कहना था कि विभागीय अधिकारी उनकी सुनते हैं, पर उनके पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेते। 13 साल के लंबे इंतजार के बाद भी तैनाती न मिलने से बेहद निराश और हताश हैं। उम्मीद है 13 साल का वनवास खत्म होगा प्रदर्शन में शामिल मेरठ से आए संदीप वर्मा ने कहा- हम इस कदर मानसिक और शारीरिक शोषण के दौर से गुजर रहे हैं, जिसे बयां भी नहीं कर सकते। आलम यह है कि हम अपने छोटे से बच्चे की फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। लगातार स्कूल से मैसेज आते हैं कि बच्चों का नाम काट दिया जाएगा, लेकिन पैसे न होने के कारण फीस नहीं भर पा रहे हैं। बच्चों की नजर में अपराधी हुए हैं गाजीपुर से आए रामविलास यादव ने कहा कि हम अपने बच्चों की नजर में अपराधी बने हुए हैं। हम उनकी समय से फीस नहीं जमा कर पा रहे हैं। इसके चलते हम उनसे नजर तक नहीं मिल पा रहे हैं। वे अच्छे नंबर लेकर पास होते हैं और आगे की क्लास में जाते हैं, पर हम उनकी फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं। किसी प्राइवेट स्कूल में चार-पांच हजार की नौकरी करके गुजर बसर हो रहा है। जब हम सफल अभ्यर्थी हैं तो आखिर क्यों हमको तैनाती देने में देरी हो रही है? कोर्ट में भी हमारे पक्ष में फैसला दिया है। बिना देर किए अब हमें नियुक्ति मिलनी चाहिए। पक्ष में आदेश के बावजूद नियुक्ति नहीं मिली श्वेता सिंह कहती हैं कि उन्होंने 13 साल पहले भर्ती परीक्षा दी थी। परीक्षा में सफल होने के बाद उनका नाम सूची में आया, लेकिन तब से अब तक वह नौकरी का इंतजार कर रही हूं। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी गई। कोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश भी दिया, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि आज भी वे ऑफर लेटर का इंतजार कर रही हैं। इसी वजह से उन्होंने अभी तक शादी भी नहीं की। साथ ही, वह अपने परिवार के बाकी सदस्यों की भी आर्थिक रूप से मदद नहीं कर पा रही हैं। 13 साल से अधिकारी टहला रहे हैं प्रदर्शन की अगुआई कर रहे शाहजहांपुर के सुशील राव गौतम ने कहा- 29,334 पदों पर भर्ती के लिए 2013 में आवेदन निकला था। सपा सरकार के दौरान यह भर्ती निकाली गई थी और सभी सफल अभ्यर्थियों को तुरंत तैनाती भी दी जानी थी। उसी दौरान आचार संहिता लग गई, जिसके चलते भर्ती नहीं हो पाई। योगी सरकार सत्ता में आई तो भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करने की बात कही गई। 2019 में हाईकोर्ट के जिस आदेश के तहत भर्ती परीक्षा के बाद नियुक्ति दी जानी थी, उसके विरोध में सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। लंबे संघर्ष के बाद 29 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी हमारे पक्ष में आ गया। इस बार जो भरोसा मिला, वह सच हो इसके बाद हाईकोर्ट ने 6 महीने के अंदर नियुक्ति देने के निर्देश दिए। 6 महीने बाद किसी तरह नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभागीय अफसर ने जो शेड्यूल दिया था, उसके तहत 22 दिसंबर 2025 तक सभी को नियुक्ति दी जानी थी, लेकिन अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। आज कई जनपदों के करीब 150 अभ्यर्थी यहां पहुंचे। निदेशक से इस विषय में बात भी हुई। उन्होंने बहुत जल्द सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की बात की। हमें उम्मीद है कि इस बार हमें जो भरोसा दिया गया है, वह सच हो जाए। और बिना देरी किए नियुक्ति मिल जाए तो अच्छा होगा। अब तो हमारी बात सुन लीजिए जालौन से राकेश कहते हैं कि हम 13 साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अब आपसे यही कहना चाहते हैं कि कम से कम अब तो हमारी बात सुन लीजिए और हमें तैनाती दे दीजिए। हम सिर्फ विनती करने आए हैं। विरोध नहीं हक मांगने आए कानपुर देहात से आए एक अभ्यर्थी ने कहा- हम कोई विरोध नहीं कर रहे, बल्कि अपना हक मांगने आए हैं। नियुक्ति पत्र पाने के लिए यहां निवेदन करने पहुंचे हैं। इसे कोई विरोध न माना जाए। अधिकारियों से बस हमारा अनुरोध है कि हमारे इस निवेदन को स्वीकार किया जाए।
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