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    ऑनलाइन गेमिंग की लत से 20 लाख कर्ज में डूबा:गोरखपुर में बच्चे ही नहीं एडल्ट भी हो रहे शिकार, साइकेट्रिस्ट से करा रहे काउसलिंग

    3 hours ago

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    गोरखपुर में बच्चे ही नहीं अडल्ट भी ऑनलाइन गेमिंग के शिकार हो रहे हैं। एक ऐसा ही केस सामने आया है। जिसमें एक अडल्ट व्यक्ति को ऑनलाइन गेमिंग का लत कदर लगा कि पूरा परिवार लगभग 20 लाख रुपए के कर्ज में डूब गया। ताजुब्ब की बात यह है कि इस कर्ज को खत्म करने के लिए भी उसने गेम का ही सहारा लेना चाहा, जिसकी वजह से और दलदल में फंसता गया। ऑनलाइन गेमिंग की वजह से नौकरी, परिवार और दोस्तों सबसे दूरी बन गयी। व्यक्ति असामान्य व्यवहार करने लगा। गेम खेलने में कोई बाधा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता था। छोटी- छोटी बात पर घर में हंगामा और लड़ाई झगड़ा करने लगा। परेशान होकर परिवार वालों ने इलाज करवाने के लिए साइकेट्रिस्ट की सलाह ली। करीब एक साल पहले वह डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के साइकेट्रिस्ट डॉ. अमित कुमार शाही के पास आया। तबसे उसको काउंसलिंग दी जा रही है, मोटिवेशनल सेशन और अन्य थेरेपी से स्थिति अभी बहुत हद तक कंट्रोल में है। कैसे लगी ऑनलाइन गेमिंग की लत डॉ. अमित कुमार शाही के अनुसार करीब एक साल पहले उनके पास एक अडल्ट पेशेंट इलाज के लिए आया। वह लंबे समय से पेड ऑनलाइन गेमिंग का शिकार था। इस लत ने उसे परिवार, दोस्तों और समाज से भी दूर कर दिया था। इतना ही नहीं इस चक्कर में वह अपनी पूरी सेविंग गवां बैठा और लगभग 20 लाख रुपए तक का कर्जदार बन गया। बावजूद उसके वह गेम खेलना नहीं छोड़ पाता था। कर्ज चुकाने के लिए भी वह गेम का ही सहारा लेता रहा और दलदल में फंसता चला गया। व्यक्ति दोस्तों की संगत में पड़ कर इस ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसा था। यह सिलसिला लगभग 2 साल से चल रहा था। बदल गया व्यवहार, परिवार से बनी दूरी गेमिंग की लत में डूबा व्यक्ति अपना सब कुछ खो बैठा, फिर भी उसे कोई गम नहीं था। परिवार वालों को लेकर व्यवहार पूरी तरह बदल गया। घर पर क्या हो रहा है क्या नहीं, उसकी कोई चिंता नहीं थी। बस हर वक्त गेम खेलने का धुन सवार रहता था। छोटी- छोटी बातों पर झल्ला उठता था डॉक्टर के अनुसार इस लत में फंसने के बाद व्यक्ति पूरी तरह चिड़चिड़ा हो गया था। परिवार के टोकने या किसी भी तरह की दखल देने पर भड़क उठता था और छोटी बात को भी तमाशा बना देता। आसपास के लोग क्या कहेंगे या उसके व्यवहार से घर बच्चों और बड़ो पर क्या असर पड़ेगा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। डॉक्टर के पास आने को तैयार नहीं था व्यक्ति डॉक्टर ने बताया- पेशेंट इस लत में इस कदर फंस गया था बाहर निकालना बहुत ज्यादा मुश्किल था। परेशानी की बात यह थी कि इसके लिए वह कोशिश भी नहीं करना चाहता था। परिवार के लोगों ने उसे डॉक्टर के पास लाने के लिए काफी ज्यादा मशक्कत किया। तब जाकर कैसे भी वह काउंसलिंग के लिए तैयार हुआ। फोन से दूर करना बड़ा चैलेंज डॉक्टर का कहना है कि इस तरह के पेशेंट के लिए सबसे जरुरी उसे फोन से दूर करना होता है, जो सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। इस पेशेंट को भी फोन से दूर करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करना पड़ा। हॉबीज पर काम किया गया सबसे पहले तो उसके हॉबीज को जाना गया कि पहले उसे क्या पसंद था। पता चला कि म्यूजिक सुनना और इंस्ट्रूमेंट्स बजाना उसे काफी ज्यादा पसंद है। फिर उसे ऐसे ही कुछ चीजों में इंवॉल्व किया गया। जिससे वह खाली भी न बैठे और उसे अच्छा महसूस भी हो। मोटिवेशनल थेरेपी से हुआ सुधार साथ ही काउंसलिंग के दौरान उसे लगातार मोटिवेशनल सेशन दिया गया ताकि वो खुद पहले इस लत से दूर होने की कोशिश करे। यह थेरेपी काम आई और वह अब खुद ही इससे दूर होना चाहता है। अब तक 2 फॉलोअप किया गया डॉक्टर के हिसाब से इस केस में अब तक 2 बार फॉलोअप किया जा चुका है और जल्द ही तीसरी बार के लिए डेट दिया गया है। पेशेंट की हालत में अब बहुत ज्यादा सुधार देखा जा रहा। परिवार के प्रति व्यवहार भी बदला है और मोबाइल से दूरी भी बनी है। हालांकि स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, लगातार काउंसलिंग की जा रही है। साथ ही जरुरी मेडिसीन भी दिया जा रहा है। डॉक्टर की बातों को मानने के लिए उसे काफी ज्यादा मोटिवेट किया गया। उम्मीद है कि कुछ और फॉलोअप में सुधार हो जाएगा। बच्चों को कैसे रखें ऑनलाइन गेमिंग की लत से दूर
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