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    ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के किस्से:सोफी को फुटबॉल खेलते देख कोच ने चुना; क्रिकेट छोड़ने वाली थीं मूनी

    4 hours ago

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    ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर सातवीं बार ट्रॉफी उठाई। ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू को इस साल जनवरी में ही टीम की कप्तानी मिली थी और 6 महीने में ही उन्होंने टीम को वर्ल्ड चैम्पियन बना दिया। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया का 1225 दिन का वर्ल्ड टाइटल का सूखा खत्म हुआ। अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी ने अर्धशतक जमाया और प्लेयर ऑफ द फाइनल रहीं। वे दो बार (2023 में भी) यह अवॉर्ड पाने वाली एकमात्र खिलाड़ी हैं। वहीं, ऑलराउंडर एलिस पैरी की यह नौवीं वर्ल्ड ट्रॉफी है। वे सबसे ज्यादा नौ बार विश्व विजेता बनने वाली ​खिलाड़ी हैं। प​ढ़िए इन तीनों के किस्से... सोफी मोलिन्यू: आई कार्ड भूलीं तो अपना विकिपीडिया पेज दिखाकर क्लब में ली एंट्री ऑस्ट्रलिया के बैर्न्सडेल में एक बार क्लब क्रिकेट का फाइनल चल रहा था। मैच देखने पहुंचे पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोच जॉन हार्मर की नजर पास में लड़कों के साथ बेहतरीन फुटबॉल खेल रही 13 वर्ष की सोफी मोलिन्यू पर पड़ी। उन्होंने उनके दोस्त से पूछा, ‘यह लड़की कौन है?’ जवाब मिला, ‘इसे क्रिकेट खेलते देखोगे तो और हैरान रह जाओगे।’ हार्मर ने उसी दिन सोफी के पिता से मिलकर कह दिया, ‘यह एक दिन ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलेगी।’ बाद में वही उनके निजी कोच बने। एक बार आईडी भूलने पर सोफी ने क्लब में अपना विकिपीडिया पेज दिखाकर एंट्री ली। सोफी वेस्ट इंडीज दौरे पर स्कूल कार्यक्रम में बच्चों के साथ खुद डीजे बन गईं। बेथ मूनी: खाते में सिर्फ 10 डॉलर बचे, उसी दिन तय किया क्रिकेट के अलावा कुछ नहीं करीब 20 साल की उम्र में बेथ मूनी की जिंदगी ऐसे मोड़ पर थी, जहां क्रिकेट छोड़ने की नौबत आ गई थी। क्वींसलैंड का सालभर का कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ 1000 डॉलर (करीब 95 हजार रुपए) का था। टीचिंग की पढ़ाई, नौकरी और क्रिकेट साथ मैनेज करना मुश्किल हो रहा था। एक दिन बैंक अकाउंट में सिर्फ 10 डॉलर (953 रु.) बचे मिले। तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब पूरी बाजी क्रिकेट पर लगाएंगी या सबकुछ छोड़ देंगी। साल 2015 के एशेज में इंग्लैंड दौरे पर वे सिर्फ रिजर्व खिलाड़ी थीं और खुद को ‘ड्रिंक्स गर्ल’ मानती थीं। जिन लोगों ने कभी उनसे कहा था, ‘तुम टी20 के लिए बनी ही नहीं हो,’ वही बेथ बाद में दुनिया की नंबर-1 टी20 बैटर भी रहीं। एलिस पैरी: बचपन में भाई से बेहतर बनने के सपने ने बनाया सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर बचपन में पिता बड़े भाई डेमियन को गेंदबाजी सिखा रहे थे। पास खड़ी एलिस ने भी गेंद मांगी और वहीं से खेलना शुरू किया। इसके बाद घर के पीछे मैदान में भाई-बहन क्रिकेट खेलते। एलिस की कोशिश रहती कि भाई से ज्यादा रन बनाएं या उन्हें आउट करें। भाई से बेहतर बनने के सपने ने ही उन्हें शानदार क्रिकेटर्स में शामिल किया। आज पैरी की नेटवर्थ करीब 128 करोड़ रुपए आंकी जाती है, लेकिन उनकी कुछ आदतें बिल्कुल नहीं बदलीं। वह आज भी पूरा शेड्यूल डायरी में नोट करती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान रिपोर्टर ने देखा कि उनकी मोबाइल स्क्रीन टूटी हुई थी और मुश्किल से पढ़ी जा रही थी। पैरी ने उसी टूटे फोन से रिपोर्टर को आसपास के तीन कैफे भी खोजकर बता दिए।
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