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    पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को दिया था ब्रेक

    8 hours ago

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    डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे। FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए उनके निधन का कारण हार्ट अटैक बताया है। रिपोर्टर विक्की ललवानी के अनुसार, पहलाज निहलानी के निधन का कारण लिवर सिरोसिस बताया जा रहा है, जबकि डेकन हेराल्ड की न्यूज में इसे उम्र संबंधित दिक्कत कहा गया है। पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर 'हथकड़ी' (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर 'शोला और शबनम' (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर 'आंखें' (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर 'अंदाज' (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर 'तलाश' (2003), और गोविंदा स्टारर 'रंगीला राजा' (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं। एक नजर पहलाज निहलानी के करियर पर- पहलाज निहलानी ने 1982 में बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म हथकड़ी बनाई और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 1985 में उनकी दूसरी फिल्म आंधी-तूफान रिलीज हुई, जिसने उन्हें बॉलीवुड में एक निर्माता के रूप में पहचान दिलाई। साल 1986 में उन्होंने फिल्म इल्जाम बनाई, जिससे गोविंदा ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म हिट रही और गोविंदा को देशभर में पहचान मिली। इसके अगले ही साल 1987 में आई आग ही आग के जरिए चंकी पांडे ने बॉलीवुड में कदम रखा। इसी साल निहलानी ने गुनाहों का फैसला भी बनाई। 1990 के दशक में पहलाज निहलानी ने शोला और शबनम और आंखें जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। खासकर आंखें उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक साबित हुई और इसने उनकी सफलता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। खून की उल्टियां होने पर, 5 साल पहले 28 दिनों तक एडमिट रहे थे पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "एक रात अचानक से 3 बजे मुझे बेचैनी होने लगी और खून की उल्टियां भी हुईं। मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। यह क्रोनिक फूड पॉइजनिंग का मामला था। लेकिन इमरजेंसी थी। शुरुआत में मुझे 5-6 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया।" “जब मैं आईसीयू से बाहर आया तो सोचा कि 2-3 दिन में मैं घर चला जाऊंगा। लेकिन लंबे समय तक मेरा टेम्प्रेचर कम नहीं हुआ। मुझे बुखार आ रहा था और शाम के वक्त पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था। डायग्नोसिस बढ़ता गया और यह चिंता का विषय बन गया।” गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी की फिल्म इल्जाम से बॉलीवुड डेब्यू किया था। आगे उन्होंने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर बात करते हुए कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ 'अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी, तो मैंने उससे एक दिन मांगा। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो।' आगे उन्होंने कहा, 'लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। हालांकि उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।' गोविंदा के पास काम नहीं था, तो दी गई शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज निहलानी ने आगे कहा, 'गोविंदा के पास काम नहीं था, तब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी। क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।' 'उसके पिता बहुत बड़े हीरो रहे हैं महबूब खान के। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती हैं। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ 'इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।' दिव्या भारती को चोट लगी, तो रोक दी थी शूटिंग पहलाज निहलानी ने दिव्या भारती के साथ फिल्म शोला और शबनम की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने दिव्या भारती के डेडिकेशन से जुड़ा किस्सा शेयर किया और बताया कि कैसे उन्हें दिव्या भारती की चोट के चलते एक्ट्रेस के इनकार के बावजूद शूटिंग रोकनी पड़ी थी। पहलाज निहलानी ने कहा था, 'शोला और शबनम' के दौरान हम 20 घंटे शूटिंग करते थे। हम सुबह से शूटिंग शुरू करते थे और उसके बाद बैक टू बैक सीन, फिर डांस और फिर दूसरे सीन शूट होते थे। एक दिन मुझे याद है हम ऊटी में शूट कर रहे थे और दिव्या का पैर एक कील पर पड़ गया। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।' ‘मैं मॉनिटर के पास खड़ा था जब दिव्या शूट के लिए वापस आईं। उन्होंने किसी को पता नहीं चलने दिया कि उन्हें चोट लगी है। मैं भी नहीं समझ पाया फिर उन्होंने मुझसे रुमाल मांगा और अपने पैर में हुए जख्म पर बांध लिया। मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो वो कुछ नहीं बोलीं लेकिन मैंने उनके पैर से खून बहता देखा तो फिर तुरंत पैक अप करवा दिया।’ इनकार के बावजूद जबरदस्ती सेट पर पहुंची थीं दिव्या भारती आगे उन्होंने कहा था, 'पैकअप के बावजूद वो शूटिंग करने पर अड़ी रहीं, मुझसे देखा नहीं जा रहा था लेकिन इतनी चोट लगने के बावजूद उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। मैंने फाइनल पैक अप किया और प्रोडक्शन वालों को इन्फॉर्म कर दिया कि अगले दिन शूटिंग नहीं होगी लेकिन दिव्या नहीं मानीं। मैंने उनकी मां को कह दिया था कि अगले दिन दिव्या को शूटिंग पर ना भेजें ताकि वो रेस्ट कर सकें। लेकिन सुबह छह बजे, दिव्या सेट पर आ गईं और हाउस-कीपिंग से चाबी लेकर मेरे पास पहुंचीं और कहा, 'चलो उठो, आप अब तक सो क्यों रहे हो'? वो अपनी वजह से शूट कैंसिल नहीं करना चाहती थीं और फिर वो शूटिंग करके ही मानीं। उनके साथ मेरी कई बेहतरीन यादें हैं।' रीटेक से झल्ला उठे धर्मेंद्र, पहलाज से कहा था- क्या मैं न्यूकमर हूं 1987 की धर्मेंद्र स्टारर फिल्म आग ही आग को पहलाज निहलानी ने प्रोड्यूस किया था, जबकि इसके डायरेक्टर शिबू मित्रा थे। शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र को एक सीन के लिए 15 रीटेक देने पड़े, जिससे वो चिढ़ गए और डायरेक्टर को खूब खरी खोटी सुनाई। इस फिल्म में उनके साथ शत्रुघ्न सिन्हा, नीलम कोठारी, चंकी पांडे और गुलशन ग्रोवर समेत कई एक्टर नजर आए थे। डायरेक्टर को सुनाने के बाद धर्मेंद्र ने सेट पर सबके सामने गुस्से में पहलाज निहलानी से कहा था- ‘पहलाज, क्या मैं कोई न्यूकमर हूं, जो मुझसे टेक पर टेक करवा रहे हो।’ 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक CBFC के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म 'स्पेक्टर' से किसिंग सीन को छोटा कराने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार 'उड़ता पंजाब' में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। मूवी टिकट पर GST लगने पर कहा- इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 साल पहले मूवी टिकट पर 12-18 प्रतिशत GST लगाया था। इस पर दैनिक भास्कर से बातचीत में पहलाज निहलानी ने कहा था, बहुत से देशों में एंटरटेनमेंट पर टैक्स नहीं है इसलिए GST को इंडिया में भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से पूरी तरह हटाना चाहिए। सरकार को ये सोचना चाहिए कि अपने कल्चर और भाषा को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा फिल्में बनाने की कोशिशों को बढ़ावा दिया जाए। मौजूदा समय में जिस तरह का बिजनेस आ रहा है, उसकी वजह से अच्छे विषयों पर फिल्में नहीं बन पा रही हैं और पैसे कमाने के लिए हल्के विषयों और वल्गर कंटेंट पर फिल्में बनने की मजबूरी हो गई है। निहलानी ने आगे कहा था, फिल्में कॉमन मैन के लिए बनती हैं। छोटे से छोटा मजदूर भी जो है पिक्चर देखता है अगर जो फिल्म टिकट सस्ती हो जाए और इस पर टैक्स न लगे तो इससे सिंगल स्क्रीन सिनेमा को बूस्ट अप मिलेगा।
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