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    पंजाब कांग्रेस के बागी गुट की मीटिंग में गर्मागर्मी:चन्नी बोले- वड़िंग कुर्सी छोड़ें, रंधावा बोले- कंप्रोमाइज्ड लीडर नहीं चाहिए; बघेल बोले- रिपोर्ट हाईकमान को दूंगा

    16 hours ago

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    पंजाब कांग्रेस में बगावत के बीच AICC के राज्य प्रभारी भूपेश बघेल ने शनिवार को चंडीगढ़ में बागी गुट से 2 घंटे मीटिंग की। इसमें हर वक्त माहौल गर्माया रहा। 3 सांसदों व 9 MLA वाले बागी गुट ने साफ कर दिया कि वह मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग की अगुआई में काम नहीं कर सकते। इस दौरान पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कहा कि कांग्रेस के हित में राजा वड़िंग को प्रधान पद से इस्तीफा देना चाहिए। इसी तरह सांसद सुखजिंदर रंधावा ने तो सीधे कह दिया कि हमें कांग्रेस को डुबोने वाला प्रधान नहीं चाहिए। कंप्रोमाइज्ड लीडर नहीं चलेगा। हमें ठोककर बोलने वाला प्रधान चाहिए। इसके अलावा सभी नेताओं ने राजा वड़िंग की कारगुजारी को लेकर जमकर सवाल खड़े किए। इस दौरान बघेल उन्हें समझाते रहे कि सारी बातें हाईकमान तक पहुंचाएंगे। माहौल देख नेता विपक्ष प्रताप बाजवा ने कहा कि हाईकमान को उनके नई नियुक्ति वाले फैसले की समीक्षा करनी चाहिए। सोर्सेज के मुताबिक विधायक प्रगट सिंह ने प्रभारी भूपेश बघेल को लेकर कहा इंटरव्यू देने के बजाय कांग्रेस को बचाना चाहिए। इसके बाद बघेल बाहर निकले तो उन्होंने कहा कि मैं सारी रिपोर्ट हाईकमान को दूंगा। कोई भी कंप्रोमाइज्ड नेता नहीं चलेगा। जो जीतने लायक है, उसके टिकट दी जाएगी। बघेल ने यह भी कहा कि कोई भी ये न सोचे कि उसके सिर पर किसी का हाथ नहीं है। मैं उसके साथ हूं। हालांकि हैरत की बात यह है कि भूपेश बघेल बागियों की मीटिंग में सवा घंटे लेट आए और उससे पहले वह कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग से मिले। यही नहीं, उनके खिलाफ शिकायतें सुनने के बाद मीटिंग खत्म कर वड़िंग की डिफेंडर गाड़ी में ही एयरपोर्ट के लिए निकल गए। गाड़ी खुद राजा वड़िंग ने ही ड्राइव की। रंधावा ने कहा- पार्टी में फैसले वापस लेने पड़ते हैं मीटिंग से बाहर आकर सुखजिंदर रंधावा ने कहा- हमने बघेल को कहा कि कांग्रेस को मजबूत करना है। नीचे वर्कर की जो भावनाएं हैं, जो आशंकाएं हैं, उसके बारे में बड़ी खुलकर बात की। वर्करों में यह है कि हमें वह काम करना है, जिससे पंजाब में कांग्रेस को आगे लाया जाए। उनसे बड़े अच्छे तरीके से बातचीत हुई है। हमने साथ ही यह भी कहा कि कई बार पार्टी में फैसले वापस भी लेने पड़ते हैं। हमने उन्हें कहा कि हमारी हाईकमान के सामने एक मांग रख दें कि यह जो लीडरशिप बैठी है, वह चाहती है कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने। और हम सब चाहते हैं कि पंजाब में जो कानून व्यवस्था के हालात हैं, जिस तरह से आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार है, उस पर अगर कोई रोक लगा सकता है तो वह कांग्रेस की एकजुटता है,एकजुट होंगे तभी रोक लगा पाएंगे। हमें डटकर बोलने वाला नेता चाहिए, हमें समझौता करने वाले नेता की जरूरत नहीं है। प्रगट सिंह ने कहा- अब सब हाईकमान के ऊपर MLA प्रगट सिंह ने कहा- देखो जो-जो भी शॉर्टकमिंग्स (कमियां) हैं, उसके बारे में चर्चा हुई है। बघेल ने यह आश्वासन दिया है कि हम सारे एक टीम हैं, एक परिवार है। उसमें कहीं थोड़ी बहुत ऊंच-नीच भी हो जाती है, उसको ठीक करेंगे। और आने वाले समय में पंजाब कांग्रेस को सत्ता में लाएगी। देखो राहुल गांधी जी कहते हैं कि कोई स्लीपर सेल है, कोई कुछ है। तो मैं तो देखो... मेरे को तो इतनी जानकारी नहीं, मैं तो अपने हलके (क्षेत्र) में काम करता हूँ। तो मेरे को ये पता नहीं है कि कौन स्लीपर है, कौन कॉम्प्रोमाइज्ड है। ऐसी कुछ बात नहीं हुई, जनरल (सामान्य) हालात के ऊपर चर्चा हुई है। देखो बड़ी सीधी सी बात है, अब हाईकमान के ऊपर है। ठीक है। जानिए, अन्य नेताओं ने क्या कहा- राजा वड़िंग ने पूछा- क्या मेरा नाम लिया कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने मीडिया से बातचीत में कंप्रोमाइज्ड नेता के बारे में पूछे जाने पर कहा- कौन है कॉम्प्रोमाइज्ड नेता? क्या उन्होंने नाम लिया? अगर नाम नहीं लिया, तो फिर आप यह क्यों कह रहे हैं? आप मेरी तरफ क्यों इशारा कर रहे हैं? दूसरी बात सुखजिंदर सिंह रंधावा बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। क्योंकि मैं सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ या वो मेरे साथ साढ़े चार-पौने पांच साल इकट्ठे रहे हैं। और अगर हममें से कोई कॉम्प्रोमाइज्ड होता, तो हम इतने लंबे समय तक एक साथ नहीं रह सकते थे। पर उनकी बात बिल्कुल ठीक है कि पार्टी के अंदर कोई भी 'स्लीपर सेल' या कॉम्प्रोमाइज्ड नेता नहीं होना चाहिए। कईयों पर दोष लगते हैं कि वो बीजेपी के नेताओं से मिलते हैं, कईयों पर दोष लगते हैं कि वो उत्तर प्रदेश के किसी नेता से मिलते हैं, कईयों पर दोष लगते हैं कि वो 'झाड़ू' (आम आदमी पार्टी) के नेताओं से मिलते हैं। वह 100% सही हैं कि पंजाब को स्लीपर सेल और कॉम्प्रोमाइज्ड नेता बिल्कुल नहीं चाहिए। इसलिए मैं उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। इसीलिए मैंने कहा कि हम दोनों कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं थे। इसी वजह से हमारी दोस्ती साढ़े चार सालों से लगातार है वैसे तो 25 सालों से है, पर लगातार साढ़े चार सालों से हमारी दोस्ती है। सुखजिंदर रंधावा किसी कॉम्प्रोमाइज्ड नेता के साथ नहीं रह सकते। और मेरे साथ तो अभी थोड़ा बहुत उनका मनमुटाव हुआ है, जो एक-आधे दिन में दूर हो जाएगा। चन्नी गुट ने शक्ति प्रदर्शन किया, 92 हलकों के नेता पहुंचे कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी को 2-3 नेताओं के साथ मिलने को कहा था। फिर भी चन्नी गुट के सभी नेताओं ने यहां पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। बागी गुट का दावा है कि उनकी मीटिंग में आज 117 में से 92 विधानसभा क्षेत्रों के नेता आए थे। मीटिंग से पहले बागी गुट ने पूर्व CM चरणजीत चन्नी को 2027 के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की मांग की। चन्नी गुट का कहना है कि अगर उन्हें प्रधान नहीं बनाना तो फिर CM चेहरा घोषित करें ताकि उनके नाम पर पंजाब में वोटें मांगी जा सकें। हालांकि हाईकमान पहले ही कह चुका है कि वह अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान पद से नहीं हटाएंगे। चन्नी गुट की शर्त के मुताबिक इस मीटिंग में प्रधान राजा वड़िंग को नहीं बुलाया गया है। जीरा ने वड़िंग को शेर बताया वहीं मीटिंग के बीच वड़िंग के सर्मथक पूर्व कांग्रेस MLA कुलबीर सिंह जीरा ने एक फोटो जारी की। जिसके कैप्शन में लिखा- जंगल में सियार और दूसरे जानवर चाहे कितने भी हों, लेकिन शेर एक ही होता है। और वह अकेला होकर भी पूरे जंगल पर राज करता है। यह सिर्फ बात नहीं, बल्कि साफ संदेश है। मीटिंग से पहले हुईं 2 बड़ी बातें… बघेल 4 दिन बाद चन्नी से मिलने क्यों आए? चरणजीत चन्नी व उनका गुट राजा वड़िंग की प्रधानगी में 2027 का चुनाव नहीं लड़ना चाहता। हाईकमान ने वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रखी तो चन्नी गुट नाराज हो गया। इसके बाद चन्नी ने AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का बायकॉट कर दिया। चन्नी सीधे राहुल गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन टाइम नहीं मिला। हाईकमान ने उन्हें बघेल से मिलने को कहा। बघेल को भी चन्नी से मिलने के लिए कहा गया। इस मुलाकात के बाद बघेल अपनी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल को देंगे। एक्सपर्ट बोले- चन्नी को साइडलाइन नहीं कर सकती कांग्रेस पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार रत्तू का मानना है कि चरणजीत सिंह चन्नी बड़े दलित-सिख नेता हैं। पंजाब में करीब 32% दलित वोट बैंक को देखते हु उन्हें साइडलाइन करना कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं है। सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि मीटिंग में कोई फैसला नहीं होगा क्योंकि बघेल के पास वो शक्तियां नहीं हैं जो चन्नी गुट की शिकायतों पर फैसला ले सके। अगर राहुल गांधी से बात करने के बाद अगर कांग्रेस हाईकमान ने बीच का रास्ता नहीं निकाला तो पार्टी टूट की तरफ जाएगी इस मामले की पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
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