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    'प्लास्टिक बेबी' अब बच्चों की तरह हंसता-खेलता है:यूपी में 10 साल तक चला इलाज, दिल्ली-मुंबई से आते थे इंजेक्शन

    11 hours ago

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    जन्म के तुरंत बाद 20 दिन तक एनआईसीयू में रहा। जब बाहर आया तो उसकी पूरी त्वचा प्लास्टिक जैसी दिखाई दे रही थी। इसी वजह से उसे 'प्लास्टिक बेबी' कहा जाने लगा। कोई उसे छू देता तो संक्रमण का खतरा हो जाता था। इसलिए उसके माता-पिता भी उसे गोद में नहीं ले पाते थे। थोड़ा बड़ा होने पर भी वह न ठीक से हंस पाता था और न ही रो पाता था। यहां तक कि उसे खाना खाने में भी दिक्कत होती थी, लेकिन डॉक्टर उसके लिए किसी भगवान से कम साबित नहीं हुए। मुंबई और दिल्ली से विशेष इंजेक्शन मंगवाए गए, जो उसे नियमित रूप से दिए जाते रहे। 10 साल तक चले इलाज और लगातार फिजियोथेरेपी के बाद अब वह कुछ हद तक सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी रहा है। यह कहानी श्रावस्ती के रेहान की है। भेला गांव की रहने वाली तरन्नुम ने अक्टूबर, 2016 में जिला अस्पताल में उसे जन्म दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि रेहान की 80 प्रतिशत रिकवरी हो चुकी है, हालांकि उसे जीवनभर दवाएं लेनी पड़ेंगी। दरअसल, रेहान उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा मामला नहीं है। इससे पहले बलरामपुर में भी इसी तरह के एक बच्चे का जन्म हुआ था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका था। पढ़िए प्लास्टिक बेबी की पूरी कहानी… पहले तस्वीरें देखिए… अब विस्तार से जानें पूरा मामला… श्रावस्ती के भेला गांव निवासी तरन्नुम ने अक्टूबर 2016 में जिला अस्पताल में रेहान को जन्म दिया था। जन्म के बाद रेहान ठीक से न सांस ले पा रहा था, न ही रो पा रहा था। डॉक्टर्स ने उसकी स्थिति को देखते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। हालांकि, परिजन उसे लखनऊ न ले जाकर बहराइच के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टर्स ने एनआईसीयू में भर्ती किया। करीब 20 दिनों तक बच्चा एनआईसीयू में रहा। डॉक्टर्स उसकी फीडिंग ट्यूब से कराते थे। लेकिन हालत जस की तस बनी रही। परिजन ने कई डॉक्टर्स से उसके केस के बारे में सलाह ली, लेकिन कहीं से कोई राहत की उम्मीद न दिखी। थक हारकर वे बहराइव के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.शिशिर से मिले। उनसे मिलकर उम्मीद जगी। डॉ.शिशिर ने बच्चे को इलाज के लिए अपने यहां भर्ती कराया। कई जांच कराए। डॉ.शिशिर के अनुसार, जांच पता चला कि वह TGM1 जीन डिफेक्ट नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। यह बीमारी त्वचा के सामान्य विकास को प्रभावित करती है। ऐसे बच्चों की त्वचा मोटी झिल्ली जैसी बन जाती है। अमेरिकी विशेषज्ञ से भी ली गई सलाह इस दौरान अमेरिका के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज अग्रवाल से भी सलाह ली गई और इलाज की नई रणनीति तैयार की गई। इलाज आसान नहीं था। बच्चे को लगातार विशेष प्रोटीन और एल्ब्यूमिन इंजेक्शन दिए गए, जो मुंबई और दिल्ली से मंगाए जाते थे। साथ ही उसको नियमित फिजियोथेरेपी दी जाने लगी। डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे के परिजन काफी जागरूक रहे, वे हर फॉलोअप पर समय से पहुंचते और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते थे। धीरे-धीरे बच्चे की त्वचा में सुधार होने लगा और शरीर की असामान्य झिल्ली कम होती गई। डॉक्टर बताते हैं कि आज 10 साल बाद बच्चा 80 प्रतिशत फिट है। वह हंसता है, रोता है, बात करता है और सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, वह बताते हैं कि उसकी त्वचा कभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकेगी। एक लाख में एक मामला डॉक्टर के अनुसार, इस तरह के ‘प्लास्टिक बेबी’ के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। चिकित्सा विज्ञान में लगभग एक लाख बच्चों में एक ऐसा मामला देखने को मिलता है। उनमें भी बहुत कम बच्चे इस स्तर तक ठीक हो पाते हैं। इससे पहले भी बिहार और पंजाब के अमृतसर में कोलोडियन बेबी का जन्म हुआ था। लेकिन कुछ ही दिन में उनकी मौत हो गई। कंसैंग्विनियस मैरिज से अधिक रिस्क विशेषज्ञों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारी में विवाह होने पर ऐसी आनुवंशिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विज्ञान की भाषा में इसे कंसैंग्विनियस मैरिज (Consanguineous Marriage) कहा जाता है जिसका का अर्थ रक्त-संबंधी रिश्तेदारों के बीच विवाह होता। इसके अलावा 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण और परिवार में पहले से मौजूद जेनेटिक बीमारी की हिस्ट्री भी जोखिम बढ़ाती है। ऐसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है और मामूली संक्रमण भी उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। होने वाली संतान को 5 प्रतिशत जीन डिफेक्ट का खतरा डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब काफी हद तक सामान्य जीवन जी रहा है, लेकिन भविष्य में उसकी संतान में भी 3 से 5 प्रतिशत तक जीन डिफेक्ट का खतरा बना रहेगा। -------------------------------- यह खबर भी पढ़ें- विराट कोहली IPL जीतने के बाद प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे:पत्नी अनुष्का भी साथ थीं; वृंदावन आश्रम में दोनों नंगे पैर चलते नजर आए IPL जीतने के बाद क्रिकेटर विराट कोहली और पत्नी अनुष्का शर्मा ने वृंदावन में संत प्रेमानंद के दर्शन किए। दोनों मंगलवार सुबह 7 बजे केली कुंज आश्रम पहुंचे। चेहरे पर मास्क लगाकर कार से उतरे और नंगे पांव आश्रम के अंदर गए। यहां पढ़ें पूरी खबर
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