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    पुरी अधिवेशन के प्रस्तावों पर मजदूरों ने सौंपा ज्ञापन:कानपुर में ACM को पीएम के नाम ज्ञापन, 7500 रुपए पेंशन की मांग

    2 hours ago

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    भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने बुधवार को कानपुर में अपर मुख्य मजिस्ट्रेट (ACM) के माध्यम से केंद्र सरकार को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम संबोधित था, जिसमें देश के करोड़ों श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे प्रमुख मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया। संघ ने पुरी, उड़ीसा में संपन्न हुए अपने 21वें अखिल भारतीय त्रैवार्षिक अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को लागू करने की मांग की है। यह अधिवेशन हाल ही में 6 से 8 फरवरी 2026 तक भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी में आयोजित हुआ था। तीन दिनों तक चले इस अधिवेशन में देशभर से आए श्रमिक प्रतिनिधियों ने वर्तमान श्रम परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। कानपुर में जुटे संघ के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को लागू कराना अब उनकी प्राथमिकता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया से मुलाकात की थी, जहां उन्हें समाधान का आश्वासन मिला था। हालांकि, धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। मजदूर संघ ने अपनी मांगों में श्रम कानूनों की निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। संगठन का कहना है कि सरकार को सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के लागू करना चाहिए। ज्ञापन में विशेष रूप से 'इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020' और 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020' में व्याप्त विसंगतियों पर आपत्ति जताई गई है, जिनसे मजदूरों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। संघ की मांग है कि श्रम कानूनों के क्रियान्वयन में 'अंत्योदय' की भावना परिलक्षित होनी चाहिए, ताकि समाज के अंतिम छोर पर खड़े मजदूर को भी न्याय मिल सके। पेंशन में भारी बढ़ोतरी और त्रिपक्षीय संवाद की मांग बुधवार को सौंपे गए इस मांग पत्र में ईपीएस-95 (EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। संघ ने मांग की है कि वर्तमान में दी जा रही 1000 रुपये की मामूली पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह किया जाए और इसे महंगाई भत्ते (DA) के साथ जोड़ा जाए। इसके अलावा, ठप पड़े त्रिपक्षीय तंत्र को पुनर्जीवित करने की वकालत करते हुए 'इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस' को तुरंत बुलाने की मांग की गई है। संघ का मानना है,कि जब तक सरकार, नियोक्ता और मजदूर संगठनों के बीच नियमित संवाद नहीं होगा, तब तक औद्योगिक शांति और श्रमिकों का कल्याण संभव नहीं है। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारी संख्या में श्रमिक नेता उपस्थित रहे, जिन्होंने मांगों के पूरा न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
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