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    प्रो. रमेशचंद की स्मृति में सजी सतरंगी संगीत संध्या:पंचस्तोत्र से हुआ आध्यात्मिक आगाज़ , संतूर और सूफी गायन ने बांधा समां

    10 hours ago

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    सरगम मंदिर, मेरठ के तत्वावधान में आईएमए हॉल में प्रो. मुकेश चन्द्र (पूर्व अध्यक्ष, विधि विभाग, मेरठ कॉलेज) की स्मृति में आयोजित सतरंगी संगीत संध्या भावनाओं और सुरों का अनूठा संगम बन गई। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनन्दा मुकेश ने कहा, “किसी को रोकर क्यों याद करें, हँसकर याद करो… उनकी जैसी पर्सनैलिटी थी, वैसी ही याद करो।” उनके इस संदेश ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुआ। श्री एस.के. अग्रवाल, कविवर हरिओम पंवार और डान्यवर सिंह ने प्रो. मुकेश चन्द्र से जुड़ी स्मृतियाँ साझा कीं। सभी ने उन्हें एक हँसमुख, सरल और संगीत-प्रेमी व्यक्तित्व के रूप में याद किया। संगीतमय संध्या की शुरुआत वेदांश और डॉ. रागिनी प्रताप द्वारा प्रस्तुत पंचस्तोत्र से हुई। पाँच अलग-अलग भावों में निहित श्लोकों की प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इसके बाद कश्मीर से पधारे संतूर वादक ने संतूर की मोहक प्रस्तुति दी। कश्मीरी लोकसंगीत और शास्त्रीय रागों के सुंदर समन्वय ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला और पखावज की सधी संगत ने प्रस्तुति को और ऊँचाई दी। मुंबई से आए लोकप्रिय गायक शुभम ने गजल और सूफी गायन से महफिल में जोश भर दिया। वाद्य-वृंद के फ्यूजन में तबला, ढोलक, पैड, गिटार और हारमोनियम की संगत पर श्रोता झूम उठे। वेदांग सोहन के शास्त्रीय गायन ने संध्या में मिठास घोल दी। अंतिम चरण में डॉ. रागिनी के साथ होली और फोक गीतों की ऐसी रंगारंग प्रस्तुति हुई कि फूलों की होली के बीच पूरा सभागार रंगमय हो गया। सचमुच यह सतरंगी संगीत सभा अपने नाम के अनुरूप अद्वितीय रही। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. सुनन्दा मुकेश ने कुशलता से किया। योग संस्कृति समिति और परिवार के सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। हारमोनियम पर लक्ष्मी जी, गिटार पर मिंटल गाजी, मृदंग पर ऋषि जी, की-बोर्ड पर आशीष कुमार, तबले पर उदय कुमार और अन्य कलाकारों ने संगत देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
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