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    प्रसूता की मौत मामला, अस्पताल संचालक-स्टाफ पर केस दर्ज:सीतापुर सीएचसी अधीक्षक की जांच में लापरवाही, इलाज में देरी से मौत की पुष्टि

    2 hours ago

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    सीतापुर के रेउसा थाना क्षेत्र में दो दिन पूर्व उजाला जनता सेवा अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। सीएचसी अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालक व स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसडीएम बिसवां की जांच में भी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। जांच में पाया गया कि महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे समय रहते रेफर नहीं किया गया, जिससे उसकी जान चली गई। जानकारी के अनुसार, थाना थानगांव क्षेत्र के राजापुर इसरौली निवासी विपिन की पत्नी प्रीती (करीब 20 वर्ष) को 4 मार्च को प्रसव के लिए रेउसा कस्बे में सीएचसी के सामने स्थित उजाला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 5 मार्च को अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। प्रसूता की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण भड़क उठे और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल संचालक पर बिना डिग्री इलाज करने और लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। बताया जाता है कि देर रात तक चले हंगामे के बाद अस्पताल संचालक और परिजनों के बीच समझौता हो गया, जिसके चलते परिजन बिना किसी लिखित शिकायत और बिना पोस्टमार्टम कराए रात करीब दो बजे शव को लेकर घर चले गए। मामले के संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने एसडीएम बिसवां शिखा शुक्ला की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर रिपोर्ट तलब की थी। जांच में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आने पर सीएचसी अधीक्षक की तहरीर पर अस्पताल संचालक और स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इस अस्पताल को सीएचसी अधीक्षक अनंत मिश्रा द्वारा नोटिस दिया जा चुका है। करीब दो माह पहले मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान कई कमियां मिलने पर अस्पताल बंद करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी रहा।
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