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    परिवार नियोजन में महिलाएं पुरुषों से आगे:साल भर में सिर्फ 18 पुरुषों ने कराई नसबंदी, 2625 महिलाओं ने अपनाया स्थायी तरीका

    18 hours ago

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    जनपद में परिवार नियोजन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी अधिक है। स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जहां एक साल में केवल 18 पुरुषों ने नसबंदी कराई है, वहीं 2625 महिलाओं ने स्थायी नसबंदी का विकल्प चुना है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी अभी भी मुख्य रूप से महिलाओं पर है। सरकार पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए 2500 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है, जबकि महिला नसबंदी पर 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि निर्धारित है। इस वित्तीय प्रोत्साहन के बावजूद, पुरुषों की भागीदारी बेहद कम बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जागरूकता की कमी और सामाजिक भ्रांतियां पुरुषों को आगे आने से रोक रही हैं। अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में भी महिलाओं की संख्या अधिक है। जिले में 13 हजार से अधिक महिलाओं ने कॉपर-टी लगवाई है, जबकि 9732 महिलाओं ने 'अंतरा' इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक का उपयोग किया है। इसके अतिरिक्त, 47227 महिलाएं 'छाया' गर्भनिरोधक गोली का नियमित रूप से उपयोग कर रही हैं। 'छाया' एक गर्भनिरोधक गोली है जिसे प्रसव के बाद या सामान्य रूप से गर्भधारण से बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे तीन महीने तक सप्ताह में दो दिन निर्धारित अंतराल पर लेना होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है जिसके आमतौर पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अंशुमान सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव तक परिवार नियोजन संबंधी जानकारी पहुंचाई जा रही है। उन्होंने पुरुषों से भी अपील की है कि वे आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि परिवार नियोजन केवल महिलाओं तक सीमित न रहे।
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